
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के दफ्तर और इसके को-फाउंडर प्रतीक जैन के आवास पर की गई छापेमारी ने राज्य में एक बड़े संवैधानिक और राजनीतिक संकट को जन्म दे दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस कार्रवाई को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार देते हुए आज (शुक्रवार) कोलकाता की सड़कों पर उतरने का एलान किया है।
वहीं, इतिहास में पहली बार किसी मुख्यमंत्री पर जांच एजेंसी के काम में बाधा डालने के आरोप लगे हैं, जिसके बाद ईडी ने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
जादवपुर से हाजरा तक ममता का शक्ति प्रदर्शन
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों को खुली चुनौती दी है। गुरुवार को गंगासागर मेले के ट्रांजिट कैंप का उद्घाटन करते हुए ममता ने कहा, “चुनाव से पहले ये सब जानबूझकर किया जा रहा है। उन्होंने हमारे चुनावी दस्तावेज और डेटा चुरा लिया है। क्या मुझे इसका विरोध नहीं करना चाहिए?”
ममता बनर्जी आज जादवपुर 8B बस स्टैंड से हाजरा चौराहे तक 5 किलोमीटर लंबी विशाल विरोध रैली का नेतृत्व करेंगी। टीएमसी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ किया कि अगर उन पर हमला होगा, तो वे चुप नहीं बैठेंगी और ईंट का जवाब पत्थर से देंगी।
ED बनाम ममता: कलकत्ता हाई कोर्ट में ‘आर-पार’ की जंग
यह मामला अब कानूनी गलियारों में पहुंच गया है। शुक्रवार को हाई कोर्ट में दो अहम याचिकाओं पर सुनवाई होने की संभावना है:
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ED की याचिका: केंद्रीय एजेंसी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ने छापेमारी स्थल पर पहुंचकर जांच में हस्तक्षेप किया। ईडी का दावा है कि मुख्यमंत्री और उनके साथ आए पुलिसकर्मियों ने मौके से डिजिटल साक्ष्य और महत्वपूर्ण फाइलें जबरन हटा दीं।
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TMC की याचिका: तृणमूल कांग्रेस ने ईडी पर पार्टी की चुनावी रणनीति और गोपनीय दस्तावेज चोरी करने का आरोप लगाते हुए न्यायमूर्ति शुभ्रा घोष की अदालत में गुहार लगाई है। पार्टी का कहना है कि एजेंसी के पास राजनीतिक दस्तावेजों को जब्त करने का कोई अधिकार नहीं है।
क्या है पूरा विवाद? (Inside Story of ED Raid)
गुरुवार को ईडी की टीमों ने कोयला चोरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में साल्ट लेक स्थित आई-पैक (I-PAC) के ऑफिस और इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित घर पर छापेमारी की थी। आई-पैक साल 2019 से ही टीएमसी के लिए चुनावी रणनीति तैयार करने का काम कर रही है।
घटनाक्रम जो चर्चा में है:
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जब छापेमारी चल रही थी, तब सीएम ममता बनर्जी खुद प्रतीक जैन के घर पहुंचीं।
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परिसर से बाहर निकलते समय सीएम के हाथ में कुछ दस्तावेज और एक लैपटॉप देखा गया।
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इसके बाद वह आई-पैक के साल्ट लेक ऑफिस भी गईं, जहां उनके सुरक्षाकर्मियों को दफ्तर से फाइलें और डायरियां निकालकर उनकी गाड़ी में रखते देखा गया।
‘भारत के इतिहास में पहली बार’: बीजेपी का तीखा हमला
बीजेपी ने इस घटनाक्रम को लोकतंत्र के लिए काला दिन बताया है। प्रदेश बीजेपी नेताओं का कहना है कि भारत के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि कोई मुख्यमंत्री खुद जांच स्थल पर जाकर ‘सबूतों’ को नष्ट करने या हटाने का काम कर रही है। बीजेपी ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी आगामी विधानसभा चुनाव में हार के डर से केंद्रीय एजेंसियों पर दबाव बना रही हैं।
चुनाव पर पड़ेगा क्या असर?
पश्चिम बंगाल में अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव होने हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ममता बनर्जी इस घटना को ‘बंगाल की अस्मिता’ और ‘बाहरी बनाम भीतरी’ के नैरेटिव से जोड़कर चुनावी लाभ लेने की कोशिश करेंगी। वहीं, भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ईडी की यह कार्रवाई चुनाव से पहले टीएमसी की घेराबंदी को और कड़ा कर सकती है।
प्रमुख बिंदु: एक नजर में
| विषय | विवरण |
| छापेमारी का कारण | कोयला चोरी घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग जांच |
| लक्षित संस्थान | आई-पैक (I-PAC) और प्रतीक जैन |
| सीएम का आरोप | चुनावी डेटा और उम्मीदवारों की लिस्ट की चोरी |
| कोर्ट का रुख | ईडी और टीएमसी दोनों की याचिकाओं पर आज सुनवाई |
| विपक्षी हमला | बीजेपी ने कहा- सीएम ने जांच में डाली बाधा |
बंगाल की सत्ता की लड़ाई अब सड़कों से निकलकर अदालतों तक पहुंच गई है। आज होने वाली विरोध रैली और हाई कोर्ट की टिप्पणी यह तय करेगी कि बंगाल चुनाव का ऊंट किस करवट बैठेगा।



