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महाराष्ट्र: वाशिम के ब्रम्हा गांव में शराब की दुकान बंद कराने के लिए हुआ मतदान, परिणाम जानकर उड़ जायेंगे होश

वाशिम (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र के वाशिम जिले के ब्रम्हा गांव ने पूरे देश के सामने सामाजिक परिवर्तन की एक नई इबारत लिख दी है। गांव में शराब की बिक्री और वाइन बार के संचालन को लेकर सोमवार को हुई ऐतिहासिक वोटिंग में ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं ने निर्णायक भूमिका निभाई। भारी सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी के बीच हुए इस मतदान में शराबबंदी के पक्ष में ‘प्रचंड बहुमत’ देखने को मिला, जिसने यह स्पष्ट कर दिया कि विकास की राह में नशा सबसे बड़ी बाधा है।

महिलाओं का फैसला रहा सर्वोपरि: केवल 14 लोगों ने मांगा ‘जाम’

ब्रम्हा गांव में लंबे समय से शराबबंदी की मांग उठ रही थी। अंततः जिलाधिकारी योगेश कुंभेजकर के आदेश पर इस संवेदनशील मुद्दे पर लोकतांत्रिक तरीके से फैसला लेने के लिए मतदान प्रक्रिया आयोजित की गई। मतदान का मुख्य सवाल था— “क्या गांव की सीमा में वाइन बार की अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) बंद की जानी चाहिए?”

शाम को जब चुनाव अधिकारी नायब तहसीलदार एच.एस. आडे की उपस्थिति में मतगणना शुरू हुई, तो नतीजे चौंकाने वाले और एकतरफा थे। कुल पड़े मतों में से 523 वोट शराबबंदी के पक्ष में पड़े, जबकि शराब की बिक्री जारी रखने के पक्ष में केवल 14 वोट ही मिल सके। इसके अतिरिक्त, 16 मतों को अवैध घोषित किया गया। यह आंकड़े गवाही देते हैं कि गांव का एक बड़ा वर्ग नशे की लत से छुटकारा पाने के लिए कितना आतुर था।

सुबह से शाम तक चला ‘लोकतंत्र का उत्सव’

वोटिंग प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए थे। जिला परिषद स्कूल में दो विशेष मतदान केंद्र बनाए गए थे, जहां सुबह 8 बजे से ही मतदाताओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। शाम 5 बजे तक चली इस प्रक्रिया में महिलाओं का उत्साह देखते ही बनता था। शासन के नियमों के अनुसार, इस तरह के सामाजिक मुद्दों पर होने वाले मतदान में महिला मतदाताओं की राय को ‘निर्णायक’ का दर्जा प्राप्त है, और ब्रम्हा गांव की महिलाओं ने इस अधिकार का भरपूर उपयोग किया।

ऐतिहासिक कदम: सामाजिक प्रगति की नई दिशा

मतदान के नतीजों के बाद गांव में जश्न का माहौल है। कई महिला मतदाताओं ने इसे ‘ऐतिहासिक जीत’ बताते हुए कहा कि शराब के कारण न केवल आर्थिक स्थिति बिगड़ रही थी, बल्कि घरेलू हिंसा और युवाओं का भविष्य भी दांव पर लगा था। अब ग्राम पंचायत ब्रम्हा की सीमा में शराब बिक्री की अनुज्ञप्ति को आधिकारिक रूप से रद्द करने की प्रक्रिया जिला प्रशासन द्वारा शुरू कर दी जाएगी।

जिलाधिकारी कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, इस वोटिंग के कानूनी परिणाम बेहद प्रभावशाली होंगे। शराबबंदी का यह फैसला अब कागजों पर भी लागू किया जाएगा, जिससे गांव में वाइन शॉप या बार का संचालन पूरी तरह अवैध हो जाएगा।

प्रशासन की मुस्तैदी और पारदर्शिता

नायब तहसीलदार एच.एस. आडे ने बताया कि पूरी प्रक्रिया जिलाधिकारी के मार्गदर्शन में अत्यंत सुचारू रही। मतदान केंद्रों पर पुलिस बल तैनात था और वीडियोग्राफी के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी गई। प्रशासन का मानना है कि इस तरह के जनमत संग्रह अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा बनेंगे, जहां ग्रामीण नशे के खिलाफ आवाज उठाना चाहते हैं।

गांव में बदलाव की उम्मीद: शांति और सुरक्षा का नया दौर

ग्रामीणों को विश्वास है कि इस फैसले से ब्रम्हा गांव के सामाजिक वातावरण में सकारात्मक बदलाव आएगा। अपराधों में कमी आने और युवाओं के सही रास्ते पर चलने की उम्मीद जताई जा रही है। यह फैसला केवल एक दुकान बंद करने का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को एक स्वस्थ और नशामुक्त वातावरण देने का संकल्प है।

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