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कानपुर किडनी कांड: नोटों की गड्डियों पर ‘इंसानी अंगों’ का सौदा; वायरल वीडियो ने खोली सफेदपोश अपराधियों की पोल

कानपुर (विशेष संवाददाता): उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में मानवता को शर्मसार करने वाले कानपुर किडनी रैकेट खुलासा मामले में हर दिन नई और चौंकाने वाली परतें खुल रही हैं। इंसानी अंगों के इस काले बाजार की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक ताजा वीडियो ने पूरे पुलिस महकमे और नागरिक समाज में हड़कंप मचा दिया है। इस वीडियो में मुख्य आरोपी डॉ. अफजल और उसका साथी परवेज सैफी एक आलीशान होटल के कमरे में बेड पर बिछी नोटों की गड्डियों के साथ ‘जश्न’ मनाते नजर आ रहे हैं। यह वीडियो चीख-चीख कर गवाही दे रहा है कि किस तरह जरूरतमंदों की मजबूरी और बीमारी को नोटों में बदला जा रहा था।

वायरल वीडियो: गुनाहों की ‘सजीव’ गवाही

सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा यह वीडियो किसी फिल्म के सीन जैसा प्रतीत होता है, लेकिन इसकी हकीकत बेहद कड़वी है। वीडियो में अपराधी नोटों के बंडलों के बीच बैठे हैं, जो स्पष्ट करता है कि एक-एक किडनी के बदले लाखों-करोड़ों का वारा-न्यारा किया जा रहा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह वीडियो इस गिरोह के आत्मविश्वास और बेखौफ अंदाज को दर्शाता है। यह वीडियो उस समय का बताया जा रहा है जब एक सफल ‘डील’ के बाद गिरोह के सदस्य गाजियाबाद के किसी होटल में ठहरे थे।

गाजियाबाद का ‘लॉजिस्टिक्स किंग’ और शातिर अपराधी परवेज

जांच में यह बात प्रमुखता से उभरी है कि इस पूरे नेक्सस का ‘लॉजिस्टिक्स हेड’ परवेज सैफी है। परवेज कोई नया खिलाड़ी नहीं है; उसका पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। वह पूर्व में गाजियाबाद में लूट और डकैती जैसे जघन्य अपराधों में जेल की सजा काट चुका है। कानपुर किडनी रैकेट खुलासा में परवेज की भूमिका बेहद अहम थी। उसका काम दिल्ली और एनसीआर (NCR) के बड़े अस्पतालों से डॉक्टरों, तकनीशियनों और विशेषज्ञों की टीम को सुरक्षित तरीके से कानपुर के चिन्हित अस्पतालों तक पहुंचाना था।

रविवार को पुलिस ने आहूजा हॉस्पिटल की घेराबंदी कर जब छापेमारी की, तब परवेज ही वह व्यक्ति था जो पूरी मेडिकल टीम को अपनी गाड़ियों के काफिले के साथ वहां लेकर पहुंचा था। पुलिस अब उन वाहनों की भी तलाश कर रही है जिनका उपयोग इस अवैध तस्करी में किया जाता था।

फर्जी डॉक्टरों का ‘खूनी’ सिंडिकेट

कानपुर के पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चौंकाने वाले तथ्य साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि जिन चार लोगों को शुरू में विशेषज्ञ चिकित्सक समझा जा रहा था, वे वास्तव में अयोग्य और फर्जी निकले।

  • रोहित तिवारी उर्फ राहुल: जो मुख्य तकनीशियन की भूमिका में था।

  • अमित उर्फ अनुराग: जो एक फिजियोथेरेपिस्ट होकर सर्जरी में हाथ बंटाता था।

  • अफजल: जो फार्मेसी ऑपरेटर था लेकिन खुद को सर्जन बताता था।

  • वैभव: जो पेशे से डेंटिस्ट था मगर किडनी प्रत्यारोपण के जटिल कार्यों में शामिल था।

प्रशासन के मुताबिक, ये चारों आरोपी फिलहाल फरार हैं और इनकी गिरफ्तारी के लिए दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा में लगातार छापेमारी की जा रही है।

गॉलब्लैडर के नाम पर किडनी का खेल

जांच में अब तक कम से कम छह अवैध प्रत्यारोपणों की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। इनमें से पांच ऑपरेशन ‘अहूँजा अस्पताल’ और एक ‘मेडलाइफ’ सुविधा केंद्र में किए गए थे। इस गिरोह की कार्यप्रणाली (Modus Operandi) इतनी शातिर थी कि वे किडनी प्रत्यारोपण के मामलों को कागजों पर ‘गॉलब्लैडर’ (पित्ताशय) का ऑपरेशन दिखाते थे।

हैरानी की बात यह है कि करीब एक साल पहले एक महिला की अवैध प्रत्यारोपण के बाद मौत हो गई थी। उस मामले को दबाने के लिए गिरोह ने फर्जी मेडिकल रिकॉर्ड बनवाए और उसे पित्ताशय के इलाज के बहाने एक बड़े अस्पताल में शिफ्ट कर दिया, ताकि किसी को शक न हो। पुलिस अब उन दो सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों की भूमिका की भी जांच कर रही है, जहां इन मरीजों को संदिग्ध परिस्थितियों में भेजा गया था।


बिचौलिया साहिल: आधी कीमत पर ‘मौत का सौदा’

इस रैकेट की सबसे अहम कड़ी कानपुर का स्थानीय बिचौलिया ‘साहिल’ बताया जा रहा है। साहिल वह शख्स था जो डोनर (दाता) और मरीज के बीच सेतु का काम करता था। वह उन मरीजों को टारगेट करता था जो आर्थिक रूप से कमजोर थे या जिन्हें बड़े अस्पतालों की लंबी वेटिंग लिस्ट से डर लगता था। साहिल बाजार दर से लगभग आधी कीमत पर किडनी उपलब्ध कराने का झांसा देता था और गरीब लोगों को चंद पैसों का लालच देकर उनकी किडनी निकलवा लेता था।

सफेदपोशों पर शिकंजा कसने की तैयारी

पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि यह केवल कुछ छोटे अपराधियों का काम नहीं है। इस कानपुर किडनी रैकेट खुलासा के तार दिल्ली और गाजियाबाद के कुछ रसूखदार सफेदपोश लोगों और बड़े अस्पताल प्रबंधन से जुड़े होने की प्रबल आशंका है। पुलिस की कई टीमें अब इस बात की तफ्तीश कर रही हैं कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर अवैध सर्जरी के लिए क्लीनिकल सेटअप और उपकरण कैसे उपलब्ध कराए जा रहे थे।

मानवता के दुश्मनों पर प्रहार

कानपुर का यह किडनी कांड स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर एक बड़ा धब्बा है। जिस तरह से डॉ. अफजल और परवेज सैफी ने नोटों की गड्डियों के साथ अपनी कामयाबी का जश्न मनाया, वह समाज के लिए एक चेतावनी है। पुलिस की सक्रियता ने इस गिरोह के एक बड़े हिस्से को बेनकाब कर दिया है, लेकिन असली चुनौती उन ‘बड़े चेहरों’ को सामने लाने की है जो पर्दे के पीछे रहकर इस खूनी खेल को फंड कर रहे थे।

शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि ऐसे क्लीनिकों और अस्पतालों पर स्थायी रूप से ताला लगना चाहिए जो चंद रुपयों के लिए लोगों की जान से खिलवाड़ करते हैं। फिलहाल, कानपुर पुलिस की छापेमारी जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही कुछ और चौंकाने वाले नाम इस लिस्ट में जुड़ेंगे।

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