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The Hill India > Blog > फीचर्ड > ईरान की ‘पाताललोक’ वाली मिसाइल सिटी से दुनिया हैरान: गहरी सुरंगों में हथियारों का जखीरा, क्या ट्रंप और नेतन्याहू के चक्रव्यूह को भेद पाएगा तेहरान?
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ईरान की ‘पाताललोक’ वाली मिसाइल सिटी से दुनिया हैरान: गहरी सुरंगों में हथियारों का जखीरा, क्या ट्रंप और नेतन्याहू के चक्रव्यूह को भेद पाएगा तेहरान?

The Hill India News
Last updated: March 24, 2026 5:07 am
The Hill India News
Published: March 24, 2026
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तेहरान/वॉशिंगटन | पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भीषण जंग अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां हथियारों के साथ-साथ ‘साइकोलॉजिकल वॉर’ (मनोवैज्ञानिक युद्ध) भी चरम पर है। ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष के 25वें दिन ईरान ने अपनी सैन्य शक्ति का एक ऐसा वीडियो जारी किया है, जिसने वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। ईरान द्वारा जारी इस वीडियो में उसकी ‘अंडरग्राउंड मिसाइल सिटी’ की झलक दिखाई गई है, जो जमीन से सैकड़ों फीट नीचे कंक्रीट की मजबूत परतों के बीच स्थित है। तेहरान का दावा है कि यह उसकी सैन्य क्षमता का महज ‘टिप ऑफ द आइसबर्ग’ यानी एक छोटा सा हिस्सा है।

Contents
मिसाइल सिटी: जहाँ बंकर-बस्टर बम भी हैं बेअसरट्रंप और नेतन्याहू की बढ़ी मुश्किलेंक्या यह महज ‘साइकोलॉजिकल वॉर’ है?जंग का भविष्य: बमबारी या समझौता?

मिसाइल सिटी: जहाँ बंकर-बस्टर बम भी हैं बेअसर

ईरान के सरकारी मीडिया द्वारा जारी किए गए फुटेज में देखा जा सकता है कि लंबी दूरी की बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों का एक अंतहीन सिलसिला कंक्रीट की बनी विशाल सुरंगों में सजा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये मिसाइल ठिकाने इतनी गहराई में बनाए गए हैं कि इन पर आधुनिक ‘बंकर-बस्टर’ बमों का भी कोई खास असर नहीं होगा।

युद्ध की शुरुआत में अमेरिका और इजरायल का अनुमान था कि ईरान को एक सप्ताह के भीतर घुटनों पर ला दिया जाएगा। लेकिन जंग के 25वें दिन भी ईरान मिसाइल सिटी वीडियो के जरिए यह संदेश दे रहा है कि उसके पास हफ्तों तक युद्ध लड़ने के लिए पर्याप्त गोला-बारूद मौजूद है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी सुरंगें केवल भंडारण के लिए नहीं, बल्कि यहीं से मिसाइलें लॉन्च करने की तकनीक से भी लैस हैं।

ट्रंप और नेतन्याहू की बढ़ी मुश्किलें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के लिए यह वीडियो एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है। जहां एक ओर इजरायल गाजा और लेबनान के साथ-साथ ईरान के खिलाफ मोर्चे खोले हुए है, वहीं दूसरी ओर रूस का ईरान के समर्थन में खड़ा होना समीकरणों को जटिल बना रहा है। फ्लोरिडा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के साथ बातचीत चल रही है और एक संभावित समझौता करीब है।

हालांकि, ईरान की ओर से इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। ईरानी मीडिया का कहना है कि ट्रंप का बयान केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए दिया गया एक राजनीतिक स्टंट है। तेहरान का रुख स्पष्ट है—वे बातचीत की मेज पर झुकने के बजाय अपनी सैन्य ताकत के प्रदर्शन को प्राथमिकता दे रहे हैं।

#WATCH | A video from Iran’s state-run IRIB News shows rows of missiles inside an underground facility, described as 'the tip of the iceberg'.

(Visuals Source: IRIB via ANI) pic.twitter.com/l9bXDNAbup

— ANI (@ANI) March 23, 2026

क्या यह महज ‘साइकोलॉजिकल वॉर’ है?

रक्षा विशेषज्ञों का एक वर्ग इसे ईरान की मनोवैज्ञानिक युद्धनीति का हिस्सा मान रहा है। युद्ध के बीच में अपने गुप्त ठिकानों का वीडियो जारी करने का मुख्य उद्देश्य इजरायल और उसके सहयोगियों के मन में डर पैदा करना है। इस ईरान मिसाइल सिटी वीडियो के माध्यम से ईरान यह संदेश देना चाहता है कि यदि इजरायल ने उसके परमाणु ठिकानों या तेल डिपो पर हमला किया, तो पाताललोक से निकलने वाली ये मिसाइलें पूरे इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को तबाह करने की क्षमता रखती हैं।

इससे पहले भी ईरान ने अपनी अंडरग्राउंड ‘ईगल-44’ एयरबेस और नौका ड्रोन (USV) के वीडियो जारी किए थे। यह रणनीति दुश्मन को यह सोचने पर मजबूर करती है कि उसके पास छिपे हुए और कितने घातक विकल्प मौजूद हो सकते हैं।

जंग का भविष्य: बमबारी या समझौता?

वर्तमान स्थिति बेहद अनिश्चित बनी हुई है। डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि बातचीत पांच दिनों के भीतर किसी तार्किक परिणति पर नहीं पहुंचती, तो अमेरिका और इजरायल की बमबारी और तेज हो सकती है। वहीं, सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों पर हो रहे ड्रोन हमलों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को खतरे में डाल दिया है।

ईरान की मिसाइल सिटी ने यह साबित कर दिया है कि यह जंग उतनी आसान नहीं होगी जितनी वॉशिंगटन और तेल अवीव ने सोची थी। रूस और चीन की पर्दे के पीछे से मिल रही मदद ने ईरान के हौसलों को और मजबूत किया है। अब देखना यह होगा कि क्या कूटनीति इस बारूदी ढेर को फटने से रोक पाती है या फिर ‘मिसाइल सिटी’ की ये सुरंगें दुनिया को एक विनाशकारी महायुद्ध की ओर ले जाएंगी।

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