नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान पर अमेरिका व इजरायल के हालिया हमलों ने भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी चिंताएं पैदा कर दी हैं। अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के मद्देनजर, केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक ‘हाई-लेवल सिक्योरिटी अलर्ट’ जारी किया है।
यह सतर्कता विशेष रूप से 28 फरवरी को ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की कथित हत्या के बाद देश भर में शिया समुदाय द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों और संभावित हिंसा की आशंका को देखते हुए बरती जा रही है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वैश्विक स्तर पर हो रही उथल-पुथल का असर भारत की शांति व्यवस्था पर पड़ सकता है, इसलिए सुरक्षा एजेंसियां ‘जीरो टॉलरेंस’ मोड में रहें।
दूतावासों और यहूदी संस्थानों पर ‘थ्री-लेयर’ सुरक्षा
गृह मंत्रालय द्वारा राज्यों को भेजे गए आधिकारिक निर्देश में कहा गया है कि वे ईरान समर्थक और ईरान विरोधी समूहों की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखें। दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में स्थित ईरानी, अमेरिकी और इजरायली दूतावासों व वाणिज्य दूतावासों के आसपास सुरक्षा घेरा बेहद मजबूत कर दिया गया है।
सुरक्षा के रणनीतिक दृष्टिकोण से, इजरायली दूतावास और यहूदी सांस्कृतिक केंद्रों (चाबाड हाउस) को ‘अति-संवेदनशील’ श्रेणी में रखा गया है। दिल्ली पुलिस और अन्य राज्य पुलिस बलों को निर्देश दिए गए हैं कि इन प्रतिष्ठानों के बाहर बैरिकेडिंग बढ़ाने के साथ-साथ पीसीआर वैन की गश्त तेज की जाए।
खुफिया इनपुट: आतंकी संगठनों की फिराक पर नजर
इस अलर्ट के पीछे केवल छिटपुट विरोध प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि गंभीर खुफिया इनपुट भी शामिल हैं। गृह मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि शिया मिलिशिया के साथ-साथ कट्टरपंथी सुन्नी संगठन जैसे इस्लामिक स्टेट (ISIS) और अल-कायदा इस तनावपूर्ण माहौल का फायदा उठा सकते हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि आतंकी समूह इस भू-राजनीतिक अस्थिरता का उपयोग सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने या किसी बड़े हमले को अंजाम देने के लिए कर सकते हैं। विशेष रूप से पश्चिमी देशों से जुड़े संस्थानों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कार्यालयों और लोकप्रिय पर्यटन स्थलों को संभावित सॉफ्ट टारगेट माना जा रहा है।
पुलिस महानिदेशकों (DGP) को कड़े निर्देश
केंद्र ने सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को व्यक्तिगत रूप से स्थिति की निगरानी करने को कहा है। जारी गाइडलाइंस के अनुसार:
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संवेदनशील इलाकों की पहचान: शिया बहुल इलाकों और यहूदी बस्तियों में अतिरिक्त पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जाए।
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एंटी-सabotage चेकिंग: भीड़भाड़ वाले बाजारों, रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर आईईडी (IED) जैसे विस्फोटकों की पहचान के लिए नियमित चेकिंग अभियान और ‘मॉक ड्रिल’ संचालित की जाएं।
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क्विक रिस्पांस टीमें (QRT): किसी भी अप्रिय घटना या दंगे जैसी स्थिति से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया टीमों को 24×7 स्टैंडबाय मोड पर रखा जाए।
साइबर सेल और सोशल मीडिया पर विशेष निगरानी
वर्तमान डिजिटल युग में अफवाहें आग की तरह फैलती हैं। गृह मंत्रालय ने सोशल मीडिया की निगरानी पर विशेष जोर दिया है। राज्यों की साइबर सेल को निर्देश दिया गया है कि वे फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर प्रसारित होने वाले भड़काऊ संदेशों और फेक न्यूज पर कड़ी नजर रखें।
मंत्रालय का मानना है कि विदेशी प्रोपेगेंडा मशीनें भारत में धार्मिक भावनाओं को भड़काने के लिए डिजिटल कंटेंट का सहारा ले सकती हैं। सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले किसी भी व्यक्ति या समूह के खिलाफ ‘नेशनल सिक्योरिटी एक्ट’ (NSA) के तहत कार्रवाई करने के संकेत दिए गए हैं।
आंतरिक सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन
भारत के लिए यह स्थिति कूटनीतिक और आंतरिक सुरक्षा, दोनों मोर्चों पर चुनौतीपूर्ण है। एक ओर जहां भारत के ईरान के साथ ऐतिहासिक संबंध हैं, वहीं अमेरिका और इजरायल के साथ रणनीतिक साझेदारी भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में देश के भीतर इन अंतरराष्ट्रीय गुटों के समर्थकों के बीच टकराव को रोकना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हम स्थिति की निरंतर समीक्षा कर रहे हैं। राज्यों के साथ हमारा समन्वय वास्तविक समय (Real-time) पर आधारित है। भारत की धरती पर किसी भी विदेशी संघर्ष की छाया नहीं पड़ने दी जाएगी।”
सतर्कता ही बचाव है
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता तनाव केवल एक क्षेत्रीय युद्ध नहीं रह गया है, बल्कि इसके वैश्विक पदचिह्न (Global Footprints) भारत में भी महसूस किए जा रहे हैं। गृह मंत्रालय का यह सक्रिय कदम सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी संभावित सेंध को रोकने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। आम जनता से भी अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति की सूचना तत्काल स्थानीय पुलिस को दें और सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली असत्यापित खबरों पर विश्वास न करें।



