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आम आदमी पर महंगाई की मार: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर का बड़ा उछाल; जानें आपके शहर के नए रेट और बढ़ोतरी की असली वजह

नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ना शुरू हो गया है। शुक्रवार सुबह देश की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया। नई दरें आज शुक्रवार शाम 5 बजे से प्रभावी हो गई हैं। तेल की कीमतों में इस अचानक वृद्धि ने मिडिल क्लास और ट्रांसपोर्ट सेक्टर की चिंताओं को बढ़ा दिया है, जिससे आने वाले दिनों में मालभाड़े और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी तेजी आने की संभावना है।

महानगरों में ईंधन का नया गणित: दिल्ली से मुंबई तक कीमतें बढ़ीं

तेल कंपनियों द्वारा जारी की गई नई मूल्य सूची के अनुसार, देश के चारों प्रमुख महानगरों में ईंधन की कीमतों में बड़ा बदलाव देखा गया है। दिल्ली में पेट्रोल अब ₹97 के पार चला गया है, जबकि मुंबई और कोलकाता में यह ₹100 के मनोवैज्ञानिक स्तर को काफी पीछे छोड़ चुका है।

प्रमुख शहरों में पेट्रोल के नए दाम (प्रति लीटर)

राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत अब ₹97.77 हो गई है, जो पहले की तुलना में पूरे 3 रुपये अधिक है। अन्य महानगरों का हाल कुछ इस प्रकार है:

  • कोलकाता: ₹108.74 (वृद्धि: ₹3.29)

  • मुंबई: ₹106.68 (वृद्धि: ₹3.14)

  • चेन्नई: ₹103.67 (वृद्धि: ₹2.83)

डीजल की कीमतों ने भी भरी रफ्तार

खेती और माल ढुलाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण ईंधन डीजल की कीमतों में भी औसतन ₹3 की बढ़ोतरी की गई है।

  • दिल्ली: ₹90.67 (वृद्धि: ₹3.00)

  • कोलकाता: ₹95.13 (वृद्धि: ₹3.11)

  • मुंबई: ₹93.14 (वृद्धि: ₹3.11)

  • चेन्नई: ₹95.25 (वृद्धि: ₹2.86)

आखिर क्यों लगी तेल की कीमतों में आग?

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली कोई भी हलचल सीधे तौर पर घरेलू बाजार में पेट्रोल डीजल की कीमतें प्रभावित करती है। इस बार की बढ़ोतरी के पीछे प्रमुख रूप से अंतरराष्ट्रीय और कूटनीतिक कारण जिम्मेदार हैं।

1. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का संकट

मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में लंबे समय से जारी तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया है। विशेष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य झड़पों के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही बाधित हुई। हालांकि, दोनों देशों के बीच सीजफायर की खबरें आईं, लेकिन इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर आवाजाही का समाधान अभी तक नहीं निकल पाया है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, और यहाँ गतिरोध होने के कारण आपूर्ति में कमी आई है।

2. कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल

सप्लाई चेन बाधित होने और वैश्विक मांग बढ़ने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ‘ब्रेंट क्रूड’ की कीमतों में काफी तेजी आई है। वैश्विक ऊर्जा कीमतों में हुई इस वृद्धि का बोझ तेल कंपनियों ने अब उपभोक्ताओं पर डालना शुरू कर दिया है। जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता नहीं आई, तो आने वाले हफ्तों में एक और राउंड की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

महंगाई के मोर्चे पर दोहरी चुनौती

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर आम आदमी की रसोई और बजट पर पड़ता है। डीजल महंगा होने से ट्रक और अन्य परिवहन वाहनों का परिचालन खर्च बढ़ जाता है, जिससे फल, सब्जियां और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में इजाफा होना तय है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, पेट्रोल डीजल की कीमतें बढ़ने से थोक मुद्रास्फीति (WPI) पर दबाव बढ़ेगा, जो अंततः खुदरा महंगाई को भी ऊपर ले जाएगा।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि तेल कंपनियां पिछले काफी समय से अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव को झेल रही थीं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के कारण कंपनियों के मार्जिन पर दबाव था। विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट का संकट हल होना भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए बेहद जरूरी है। यदि यह मार्ग सुचारू नहीं होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $90-$100 प्रति बैरल के स्तर को भी पार कर सकती हैं।

शुक्रवार को हुई इस बढ़ोतरी ने आम जनता को महंगाई का एक नया ‘झटका’ दिया है। जहाँ एक तरफ अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा, वहीं दूसरी तरफ घरेलू बाजार में ईंधन की बढ़ती कीमतें मध्यम वर्ग के लिए सिरदर्द बन गई हैं। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर जनता को कुछ राहत देती है या नहीं।

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