गांधीनगर (गुजरात): भारत अब खतरनाक वायरस और संक्रामक महामारियों की जांच के लिए विदेशी प्रयोगशालाओं का मोहताज नहीं रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुधवार को गुजरात की राजधानी गांधीनगर में गुजरात बायोटेक्नॉलजी रिसर्च सेंटर (GBRC) की अत्याधुनिक BSL-4 (Biosafety Level 4) बायो-कंटेनमेंट फैसिलिटी का शिलान्यास किया।
यह परियोजना न केवल गुजरात बल्कि पूरे भारत के स्वास्थ्य ढांचे और जैविक सुरक्षा (Biosecurity) के लिए एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है।
देश की दूसरी और राज्य सरकार की पहली BSL-4 लैब
शिलान्यास समारोह के दौरान सभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि यह भारत की रक्षा और स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। वर्तमान में भारत में केवल पुणे (NIV) में इस स्तर की लैब उपलब्ध है। गांधीनगर में बनने वाली यह फैसिलिटी देश की दूसरी और किसी भी राज्य सरकार द्वारा संचालित होने वाली पहली BSL-4 लैब होगी।
362 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाली यह लैब लगभग 11,000 वर्ग मीटर के विशाल क्षेत्र में फैली होगी। इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है, जहाँ वैज्ञानिक सबसे घातक और संक्रामक वायरस पर सुरक्षित वातावरण में शोध कर सकेंगे।
खतरनाक वायरस की जांच में भारत होगा आत्मनिर्भर
गृह मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कोविड-19 जैसी महामारियों ने हमें सिखाया है कि देश के पास अपनी उच्च-स्तरीय शोध सुविधाएं होना कितना अनिवार्य है। उन्होंने कहा:
“इस फैसिलिटी के निर्माण के बाद, भारत को इबोला, मारबर्ग और अन्य उभरते हुए घातक वायरस की जांच के लिए विदेशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। यह लैब हमारे वैज्ञानिकों को एक ऐसा सुरक्षित प्लेटफॉर्म देगी, जहाँ वे संक्रामक रोगों के विरुद्ध स्वदेशी वैक्सीन और दवाओं का विकास कर सकेंगे।”
यह लैब विशेष रूप से ‘ज़ूनोटिक रोगों’ (पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियां) के अध्ययन की विश्वस्तरीय व्यवस्था प्रदान करेगी, जो भविष्य की महामारियों को रोकने में सहायक होगी।
AMR: एक ‘साइलेंट डिजास्टर’ के प्रति चेतावनी
अपने संबोधन में अमित शाह ने स्वास्थ्य जगत के एक बड़े खतरे— एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR)—पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने इसे एक ‘साइलेंट डिजास्टर’ (मूक आपदा) करार देते हुए कहा कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में सामान्य बीमारियां भी लाइलाज हो सकती हैं।
उन्होंने वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं से आग्रह किया कि AMR से निपटने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाए और जनता के बीच दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर जागरूकता बढ़ाई जाए।
बायो-इकोनॉमी में 10 गुना से ज्यादा की वृद्धि
बायोटेक्नॉलजी के क्षेत्र में भारत की प्रगति के आंकड़े पेश करते हुए गृह मंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत की बायो-इकोनॉमी (Bio-Economy) ने अभूतपूर्व ऊंचाइयों को छुआ है।
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2014 में बायो-इकोनॉमी: 10 अरब डॉलर
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2024 में बायो-इकोनॉमी: 166 अरब डॉलर
उन्होंने कहा कि यह वृद्धि दर्शाती है कि भारत वैश्विक बायोटेक हब बनने की ओर तेजी से अग्रसर है और आने वाले समय में यह क्षेत्र भारत की जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
विज्ञान और विरासत का अनूठा संतुलन
मोदी सरकार की प्राथमिकताओं का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि वर्तमान सरकार ‘विज्ञान और विरासत’ (Science and Heritage) को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि एक तरफ हम आधुनिकतम BSL-4 लैब बना रहे हैं, तो दूसरी तरफ अपनी पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और ज्ञान को भी वैश्विक मंच पर पुनर्स्थापित कर रहे हैं।
BSL-4 लैब की तकनीकी विशेषताएं (Box Item)
| विशेषता | विवरण |
| लागत | ₹362 करोड़ |
| क्षेत्रफल | 11,000 वर्ग मीटर |
| स्तर | बायो-सेफ्टी लेवल 4 (उच्चतम सुरक्षा स्तर) |
| उद्देश्य | घातक वायरस शोध, वैक्सीन विकास और जैविक सुरक्षा |
| संचालन | गुजरात बायोटेक्नॉलजी रिसर्च सेंटर (GBRC) |
जैविक हमलों और महामारियों के खिलाफ मजबूत कवच
गांधीनगर BSL-4 लैब शिलान्यास (Gandhinagar BSL-4 Lab Foundation Stone) केवल एक बुनियादी ढांचे का निर्माण नहीं है, बल्कि यह उभरते हुए जैविक खतरों (Bio-threats) के खिलाफ भारत की प्रतिरक्षा प्रणाली को तैयार करने की कवायद है। यह परियोजना गुजरात को वैश्विक बायोटेक मानचित्र पर स्थापित करने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को भी सुनिश्चित करेगी।
जैसे-जैसे वैश्विक स्तर पर संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ रहा है, गांधीनगर की यह लैब भारत के लिए एक ‘सुरक्षा कवच’ की तरह काम करेगी, जो समय रहते बीमारियों की पहचान और उनके समाधान में सक्षम होगी।



