
देहरादून, 11 मार्च 2026: राजधानी देहरादून के सर्वे चौक स्थित भवन सभागार में बुधवार को विश्व प्लम्बर दिवस के अवसर पर एक विशेष ‘प्लम्बर सम्मान समारोह’ का आयोजन किया गया। जिला जल एवं स्वच्छता मिशन, देहरादून के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य उन ‘मौन जल योद्धाओं’ को सम्मानित करना था, जो दिन-रात कड़ी मेहनत कर हर घर तक शुद्ध पेयजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि मुख्य विकास अधिकारी (CDO) व उपाध्यक्ष जिला जल एवं स्वच्छता मिशन, अभिनव शाह द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस दौरान उन्होंने जल जीवन मिशन की सफलता में ग्राउंड जीरो पर काम करने वाले तकनीकी कर्मियों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
33 तकनीकी कर्मियों को भेंट की गई ‘सम्मान की टूल किट’
इस गौरवमयी समारोह के दौरान उत्तराखण्ड पेयजल निगम और उत्तराखण्ड जल संस्थान के विभिन्न प्रभागों में कार्यरत उन कर्मियों को चिन्हित किया गया, जिन्होंने पेयजल योजनाओं के संचालन और रख-रखाव में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। विश्व प्लम्बर दिवस के उपलक्ष्य में कुल 33 प्लम्बर्स, पंप ऑपरेटरों और फीटर्स को उनके अनुकरणीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।
सम्मान के रूप में सभी चयनित कर्मियों को आधुनिक टूल किट भेंट की गई। विभाग का मानना है कि इन आधुनिक उपकरणों से लैस होकर ये कर्मी भविष्य में और अधिक कुशलता और तेजी के साथ लीकेज और तकनीकी खराबियों को दूर कर सकेंगे।
शुद्ध जल से स्वास्थ्य क्रांति: सीडीओ अभिनव शाह का संबोधन
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने कहा कि प्लम्बर्स और पंप ऑपरेटर्स पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के ‘फ्रंटलाइन वर्कर्स’ यानी प्रथम पंक्ति के कार्यकर्ता हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज यदि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को घर पर ‘नल से जल’ मिल रहा है, तो इसके पीछे इन तकनीकी विशेषज्ञों का अथक परिश्रम है।
सीडीओ ने अपने संबोधन में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर प्रकाश डाला:
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बीमारियों में कमी: पेयजल योजनाओं के कुशल संचालन से लोगों को शुद्ध जल मिल रहा है, जिससे जल जनित रोगों (Waterborne Diseases) के ग्राफ में गिरावट आई है।
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शिशु मृत्यु दर पर प्रभाव: स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार ला रही है, जिससे शिशु मृत्यु दर में भी कमी दर्ज की गई है।
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त्वरित समाधान: तकनीकी कर्मियों की सक्रियता के कारण ही बड़ी पाइपलाइन खराबियों को कम समय में ठीक किया जा रहा है।
जल संरक्षण की शपथ: आने वाली पीढ़ियों के लिए संकल्प
विश्व प्लम्बर दिवस का यह अवसर केवल सम्मान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे एक सामाजिक अभियान का रूप दिया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अधिकारियों, कार्मिकों और आम नागरिकों को जल संरक्षण एवं संवर्द्धन की सामूहिक शपथ दिलाई गई।
शपथ के माध्यम से यह संकल्प लिया गया कि प्रत्येक व्यक्ति अपने परिवार, मित्रों और समाज को जल की एक-एक बूंद बचाने के लिए प्रेरित करेगा। साथ ही, पारंपरिक पेयजल स्रोतों के संरक्षण और उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए आने वाली पीढ़ियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएगा।
ब्लॉक स्तर पर भी गूंजा ‘सम्मान का स्वर’
देहरादून जिला स्तर पर आयोजित इस मुख्य कार्यक्रम के अतिरिक्त, जनपद के सभी 06 विकासखण्डों में भी इसी प्रकार के सम्मान समारोह आयोजित किए गए। यह पहली बार देखा गया कि विकासखंड स्तर पर भी प्लम्बर्स और फिटर्स के कार्यों को इतनी प्रमुखता से सराहा गया है। इससे न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ा है, बल्कि समाज में इस पेशे के प्रति सम्मान की दृष्टि भी विकसित हुई है।
कार्यक्रम में गरिमामयी उपस्थिति
सम्मान समारोह में जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, पेयजल निगम मिशन की अधिशासी अभियन्ता कंचन रावत और सचिन सहित जिला जल एवं स्वच्छता मिशन के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उत्तराखण्ड पेयजल निगम और जल संस्थान की विभिन्न शाखाओं के कार्मिकों ने प्रतिभाग किया।
विशेषज्ञ की राय: क्यों खास है यह पहल?
शहरी विकास के जानकारों का मानना है कि बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के निर्माण के बाद सबसे बड़ी चुनौती उसके ‘ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस’ (O&M) की होती है। प्लम्बर और पंप ऑपरेटर इस पूरी व्यवस्था की रीढ़ हैं। ऐसे कार्यक्रमों से न केवल उनकी तकनीकी क्षमता को पहचान मिलती है, बल्कि उन्हें यह अहसास होता है कि वे राष्ट्र निर्माण और जन स्वास्थ्य की दिशा में एक बड़ा योगदान दे रहे हैं।
देहरादून में आयोजित यह प्लम्बर सम्मान समारोह इस बात का प्रमाण है कि विकास केवल कंक्रीट की संरचनाओं से नहीं, बल्कि उन लोगों के समर्पण से होता है जो इसे संचालित करते हैं। जल जीवन मिशन के तहत ‘हर घर जल’ का सपना इन कर्मठ कामगारों के बिना पूरा होना असंभव है। विश्व प्लम्बर दिवस पर दी गई यह टूल किट केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि उनके कौशल के प्रति विभाग का विश्वास है।



