
नई दिल्ली, 19 नवंबर: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत में तपेदिक (टीबी) उन्मूलन के प्रयासों को ‘उत्साहजनक प्रगति’ बताते हुए देश की सराहना की है। डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय ने मंगलवार को जारी अपने आधिकारिक बयान में कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में टीबी नियंत्रण और मौतों में कमी के मोर्चे पर उल्लेखनीय सुधार दिखाए हैं।
भारत में टीबी मृत्यु दर में गिरावट के संकेत: डब्ल्यूएचओ
डब्ल्यूएचओ की ओर से जारी बयान में कहा गया कि भारत में टीबी से संबंधित मृत्यु दर में सुधार के स्पष्ट संकेत मिले हैं। संगठन ने माना कि भारत द्वारा बीमारी की रोकथाम, निदान और उपचार को तेज करने के लिए किए जा रहे व्यापक प्रयासों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है।
टीबी उन्मूलन के वैश्विक अभियान में भारत की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि विश्व के कुल टीबी बोझ का बड़ा हिस्सा दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में है और इसमें भारत की भागीदारी निर्णायक है।
टीबी उन्मूलन में भारत की रणनीति क्यों हो रही है सफल?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हालिया सुधार कई बड़े कदमों का परिणाम है:
- निक्षय पोर्टल के जरिए टीबी के मामलों की डिजिटल रिपोर्टिंग
- निक्षय सहायता योजना, जिसके तहत मरीजों को पोषण और आर्थिक सहायता
- अधिक गाँवों व शहरों में मॉलिक्यूलर टेस्टिंग,
- नई दवाओं और रेजिमेंस को प्राथमिकता
- निजी क्षेत्र के साथ बढ़ी भागीदारी
- समुदाय आधारित जागरूकता अभियान
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, इन पहलों ने निदान में देरी को कम किया है और उपचार के दौरान मरीजों के बीच टूटने (treatment dropout) को भी रोका है।
टीबी मुक्त भारत लक्ष्य 2025: अंतरराष्ट्रीय लक्ष्य से पाँच वर्ष पहले
भारत ने 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है, जबकि वैश्विक लक्ष्य 2030 का है। डब्ल्यूएचओ ने अपने बयान में दोहराया कि भारत ने इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की दिशा में जिस गति से काम किया है, वह क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रेरणादायक है।
दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के लिए संकेत
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, भारत की उपलब्धि पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है, क्योंकि क्षेत्र में टीबी अभी भी बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। संगठन ने कहा कि क्षेत्रीय देशों को भारत की सफलताओं से सीख लेकर टीबी उन्मूलन की रणनीतियों को और मजबूत करना चाहिए।
अगले चरण में क्या जरूरी है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी उन्मूलन के लिए भारत को अब निम्न क्षेत्रों पर और अधिक ध्यान देना होगा:
- उच्च जोखिम वाले जिलों में लक्षित अभियान
- दवा-प्रतिरोधी टीबी (DR-TB) के मामलों की तेज पहचान
- पोषण सहायता में विस्तार
- प्राइवेट सेक्टर केस नोटिफिकेशन की प्रभावी निगरानी
डब्ल्यूएचओ ने भी कहा है कि यदि भारत मौजूदा रफ्तार बरकरार रखता है, तो वह टीबी उन्मूलन में दुनिया के लिए एक मॉडल बन सकता है।



