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Uttarakhand: पिथौरागढ़ के सीमांत क्षेत्रों में भारी बर्फबारी, आदि कैलाश मार्ग पर जमी ढाई फुट बर्फ, ठंड को देखते हुए प्रशासन हाई अलर्ट पर

पिथौरागढ़ | उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में कुदरत का सफेद रॉक देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार भारी बर्फबारी ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों को पूरी तरह अपनी आगोश में ले लिया है। चीन सीमा से सटे व्यास और दारमा घाटियों में बर्फबारी ने जहां आवाजाही की रफ्तार रोक दी है, वहीं पर्यटन की नई उम्मीदों को भी पंख दिए हैं। हालांकि, सुरक्षा और कड़ाके की ठंड को देखते हुए प्रशासन ने जिले के स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है।

आदि कैलाश मार्ग अवरुद्ध: कुटी गांव में थमी रफ्तार

पिथौरागढ़ के सबसे ऊंचाई पर स्थित कुटी गांव में इस समय हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। 12,303 फुट की ऊंचाई पर स्थित यह गांव वर्तमान में डेढ़ से दो फुट बर्फ के नीचे दबा है। सबसे अधिक प्रभाव धारचूला से आदि कैलाश जाने वाली सड़क पर पड़ा है, जहां ढाई फुट से अधिक बर्फ जमा होने के कारण वाहनों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है।

हाल ही में गणतंत्र दिवस के अवसर पर गांव पहुंचे ग्राम प्रधान नगेंद्र सिंह कुटियाल ने बताया कि कुटी से आगे आदि कैलाश तक जाने वाली सड़क पर पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है। भारी हिमपात के कारण शीतकाल में इस क्षेत्र में आवाजाही पूरी तरह से बंद कर दी गई है।

व्यास और दारमा घाटियों का हाल: बर्फ से लदकद गांव

पिथौरागढ़ जिले में बर्फबारी का सबसे अधिक प्रभाव व्यास घाटी के सात प्रमुख गांवों में देखा जा रहा है:

  • बूंदी और गर्त्यांग: यहां हल्की से मध्यम बर्फबारी जारी है।

  • गुंजी, नपलच्यू और रांगकांग: इन गांवों में शीतलहर का प्रकोप है।

  • नाबी और कुटी: यहां रिकॉर्ड तोड़ बर्फबारी दर्ज की गई है।

दारमा घाटी के दांतू और दुग्तू गांवों में भी बर्फबारी का दौर जारी है। उच्च हिमालयी क्षेत्र के माइग्रेशन वाले ये गांव इस समय बर्फ की मोटी परतों से ढके हुए हैं।

पर्यटन और होम स्टे: चुनौतियों के बीच खिलते चेहरे

विपरीत मौसम के बावजूद पिथौरागढ़ में पर्यटन की गतिविधियां पूरी तरह थमी नहीं हैं। दारमा घाटी के होम स्टे संचालकों, संजय जंग और गुड्डू जंग के अनुसार, सड़क खुली होने का लाभ पर्यटकों को मिल रहा है। मंगलवार को हुई बर्फबारी के बावजूद दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और रुद्रपुर से आए लगभग 40 पर्यटकों ने पंचाचूली शिखर के दीदार किए।

सैलानियों ने दारमा घाटी की अछूती सुंदरता और बर्फबारी का जमकर लुत्फ उठाया। दिल्ली के आनंद और धर्मशाला के अक्षित कुमार जैसे पर्यटकों का कहना है कि बर्फ से ढकी चोटियां और शांत वादियां एक जादुई अनुभव प्रदान करती हैं।

सड़क कनेक्टिविटी ने बदली शीतकालीन तस्वीर

कुछ वर्षों पहले तक, दारमा और व्यास घाटियों के ग्रामीण अक्टूबर के अंत तक अपने पशुओं के साथ निचली घाटियों (माइग्रेशन) की ओर आ जाते थे। लेकिन सड़क निर्माण ने इस परंपरा और शीतकालीन जनजीवन को बदल दिया है:

  1. सड़क संपर्क: अब दोनों घाटियां सड़क से जुड़ी हैं, जिससे सर्दियों में भी आवाजाही संभव है।

  2. रोजगार: ग्रामीणों ने होम स्टे बनाए हैं, जिससे उन्हें अब सर्दियों में भी आय हो रही है।

  3. ग्लेशियर का खतरा: हालांकि, भारी बर्फबारी के समय सड़क के नालों पर अस्थायी ग्लेशियर बन जाते हैं, जो मार्ग को अवरुद्ध कर देते हैं। पिछले कुछ वर्षों में कम बर्फबारी के कारण ये रास्ते खुले रहे थे, लेकिन इस बार की बर्फबारी ने प्रशासन को सतर्क कर दिया है।

प्रशासन का कड़ा रुख: स्कूलों में छुट्टी और हाई अलर्ट

मौसम विभाग द्वारा जारी ‘हाई अलर्ट’ और मुनस्यारी क्षेत्र में मंगलवार शाम को दोबारा हुई बर्फबारी के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। जिलाधिकारी ने सुरक्षा के मद्देनजर बुधवार को जिले के सभी विद्यालयों (कक्षा 12 तक) में अवकाश घोषित कर दिया है। मुनस्यारी के थल-मुनस्यारी मार्ग पर कई जगह वाहन फंसे होने की सूचना है, जिन्हें निकालने के लिए बीआरओ (BRO) और लोक निर्माण विभाग की टीमें मशक्कत कर रही हैं।

शून्य से नीचे का तापमान और चुनौतियां

उच्च हिमालयी क्षेत्रों में इस समय हड्डियां कंपा देने वाली ठंड पड़ रही है। रात का तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे (-10°C से -15°C) तक जा रहा है। होम स्टे संचालकों के लिए ऐसी विषम परिस्थितियों में पर्यटकों को गर्म पानी, भोजन और हीटिंग की सुविधा प्रदान करना एक बड़ी चुनौती है। इसके बावजूद, वे भविष्य में यहां ‘शीतकालीन पर्यटन’ की अपार संभावनाएं देख रहे हैं।


पिथौरागढ़ की बर्फबारी एक तरफ जहां प्राकृतिक सौंदर्य का अनुपम उपहार लेकर आई है, वहीं सीमांत क्षेत्र के निवासियों के लिए यह संघर्ष की घड़ी भी है। आदि कैलाश और पंचाचूली जैसी चोटियों का आकर्षण दुनिया भर के पर्यटकों को खींच रहा है, लेकिन बुनियादी ढांचे को अभी भी मौसम की इन मारों से निपटने के लिए और अधिक सुदृढ़ होने की आवश्यकता है।

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