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गाजियाबाद में पोलियो वायरस मिलने से स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, 12 इलाकों में सवा लाख बच्चों का होगा सर्वे, 160 टीमें मैदान में

गाजियाबाद में वैक्सीन-व्युत्पन्न पोलियो वायरस (VDPV-1) मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। राजधानी दिल्ली से सटे इस जिले में सीवेज सैंपल की जांच के दौरान पोलियो वायरस की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने व्यापक स्तर पर निगरानी और सर्वे अभियान शुरू कर दिया है। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 160 विशेष टीमों का गठन किया है, जो जिले के चिन्हित क्षेत्रों में घर-घर जाकर बच्चों की जांच और टीकाकरण का कार्य करेंगी।

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, डूंडाहेड़ा स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से लिए गए नमूनों की जांच में वैक्सीन-व्युत्पन्न पोलियोवायरस टाइप-1 (VDPV-1) पाया गया है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए शहरी क्षेत्र के 12 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के अंतर्गत आने वाले इलाकों में विशेष सर्वे अभियान शुरू कर दिया है। इस अभियान के तहत लगभग सवा लाख बच्चों की निगरानी की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उनमें पोलियो से जुड़े किसी प्रकार के लक्षण मौजूद तो नहीं हैं।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. सचिन ने बताया कि फिलहाल जिले में किसी भी बच्चे में पोलियो संक्रमण के लक्षण नहीं पाए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह वायरस किसी संक्रमित मरीज में नहीं, बल्कि सीवेज सैंपल में मिला है। इसलिए लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं और एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, वैक्सीन-व्युत्पन्न पोलियो वायरस तब उत्पन्न हो सकता है जब ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) में मौजूद कमजोर जीवित वायरस लंबे समय तक कम प्रतिरक्षा वाले समुदायों में घूमता रहता है और उसमें आनुवंशिक बदलाव आ जाते हैं। हालांकि ऐसे मामलों में संक्रमण का खतरा तभी बढ़ता है जब बच्चों का टीकाकरण अधूरा हो। इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने पोलियो ड्रॉप्स पिलाने के अभियान को और तेज करने का निर्णय लिया है।

गाजियाबाद के जिन 12 क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है, वहां स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर पांच वर्ष तक की आयु के बच्चों की जांच करेंगे। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि सभी बच्चों को समय पर पोलियो की खुराक मिली है या नहीं। जिन बच्चों का टीकाकरण अधूरा होगा, उन्हें तुरंत पोलियो ड्रॉप्स दी जाएंगी।

डॉ. सचिन ने बताया कि इस प्रकार के मामले पहले भी देश के कुछ हिस्सों में सामने आ चुके हैं। वर्ष 2025 में वाराणसी में भी इसी प्रकार का वायरस पाया गया था। इसके अलावा मेघालय में भी ऐसे मामलों की पुष्टि हुई थी। लेकिन समय पर निगरानी और टीकाकरण अभियान के कारण किसी बड़े खतरे की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। सर्वे अभियान के दौरान बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े जुटाए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे स्वास्थ्य टीमों का सहयोग करें और अपने बच्चों को नियमित रूप से पोलियो की खुराक अवश्य दिलाएं।

गौरतलब है कि भारत को वर्ष 2014 में पोलियो मुक्त घोषित किया गया था। ऐसे में सीवेज नमूनों में वायरस की मौजूदगी स्वास्थ्य विभाग के लिए एक चेतावनी जरूर है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत टीकाकरण व्यवस्था और सक्रिय निगरानी के कारण स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। प्रशासन का कहना है कि यह एक नियमित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रक्रिया का हिस्सा है और लोगों को किसी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है।

फिलहाल गाजियाबाद में बड़े पैमाने पर चल रहे इस सर्वे और टीकाकरण अभियान का उद्देश्य यही है कि जिले का कोई भी बच्चा पोलियो के खतरे से प्रभावित न हो और पोलियो मुक्त भारत का दर्जा पूरी तरह सुरक्षित बना रहे।

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