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हरिद्वार में गौ-तस्करों के ‘सिंडिकेट’ पर महाप्रहार: 162 आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट, 57 गैंग चिन्हित; अब कुर्क होगी अवैध संपत्ति

हरिद्वार (ब्यूरो): उत्तराखंड के धर्मनगरी हरिद्वार में गौकशी और पशु क्रूरता करने वाले अपराधियों के खिलाफ पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक अभियान छेड़ दिया है। मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बाद हरिद्वार एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर के नेतृत्व में जनपद पुलिस ने गौ-तस्करों की कमर तोड़ने के लिए ‘ब्लू प्रिंट‘ तैयार कर लिया है। पुलिस ने पिछले 10 वर्षों के रिकॉर्ड खंगालते हुए जिले के 11 थाना क्षेत्रों में सक्रिय 57 गैंगों की कुंडली तैयार की है, जिनमें शामिल 162 कुख्यात अपराधियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

मायापुर स्थित एसपी सिटी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने स्पष्ट किया कि गौवंश संरक्षण और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम का बार-बार उल्लंघन करने वालों के लिए अब जिले में कोई जगह नहीं है।

10 साल का डेटा खंगाला, 57 गैंग रडार पर

हरिद्वार पुलिस ने इस बार केवल सतही कार्रवाई नहीं की है, बल्कि अपराध की जड़ पर प्रहार किया है। एसएसपी ने गौवंश संरक्षण स्क्वायड (Cow Protection Squad) के माध्यम से पिछले एक दशक का पूरा डेटा संकलित करवाया। जांच में सामने आया कि जनपद में गौकशी और तस्करी का एक संगठित जाल फैला हुआ है।

पुलिस ने कुल 162 आरोपियों को चिन्हित किया है जो अलग-अलग 57 गैंगों के माध्यम से इस अवैध कारोबार को संचालित कर रहे थे। इन सभी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की धाराएं लगाई जा रही हैं। यह हरिद्वार के इतिहास में गौ-अपराधियों के खिलाफ की गई अब तक की सबसे बड़ी सामूहिक वैधानिक कार्रवाई मानी जा रही है।

गुंडा एक्ट और जिला बदर: शहर से बाहर होंगे अपराधी

गैंगस्टर एक्ट के अलावा, पुलिस ने 67 ऐसे अपराधियों की सूची भी तैयार की है जो आदतन पशु क्रूरता और अवैध कटान में संलिप्त रहे हैं। एसएसपी भुल्लर के अनुसार, इन सभी के खिलाफ ‘गुंडा एक्ट’ के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अंतर्गत इन अपराधियों को जिला बदर (Externment) करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। प्रशासन का उद्देश्य इन अपराधियों के स्थानीय नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना है ताकि जिले की कानून व्यवस्था और धार्मिक शुचिता बनी रहे।

अवैध संपत्तियों पर चलेगा ‘कानूनी बुलडोजर’

इस पूरी कार्रवाई का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आर्थिक प्रहार है। एसएसपी ने बताया कि केवल जेल भेजना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपराध से अर्जित की गई अवैध संपत्तियों को भी निशाना बनाया जा रहा है। गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत इन सभी 162 आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों का ब्यौरा जुटाया जा रहा है।

“हमने सभी आरोपियों की संपत्तियां चिन्हित कर ली हैं। जल्द ही इन अवैध संपत्तियों को कुर्क (Attach) करने की प्रक्रिया शुरू होगी। हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि अपराध की कमाई से खड़े किए गए साम्राज्य को ढहाया जा सके।” – नवनीत सिंह भुल्लर, एसएसपी हरिद्वार

11 थाना क्षेत्रों में अलर्ट, स्क्वायड को मिली फ्री-हैंड

हरिद्वार जनपद के सभी 11 कोतवाली और थानों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। गौवंश संरक्षण स्क्वायड के प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे डेटा के आधार पर आरोपियों की धरपकड़ तेज करें। पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि कहीं भी अवैध पशु कटान या तस्करी की सूचना मिलती है, तो तत्काल नजदीकी थाने या स्क्वायड को सूचित करें। सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा और उसे पुलिस की ओर से सुरक्षा भी प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री के विजन पर पुलिस की मुहर

उत्तराखंड सरकार ने राज्य में गौवंश संरक्षण को लेकर शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) की नीति अपनाई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा दिए गए निर्देशों के क्रम में यह हरिद्वार पुलिस गैंगस्टर एक्ट कार्रवाई न केवल अपराधियों के मन में खौफ पैदा करेगी, बल्कि अन्य जनपदों के लिए भी एक मॉडल बनेगी। पुलिस द्वारा भारी जुर्माना और पाबंद करने की कार्रवाई से इन सिंडिकेट्स के आर्थिक स्रोत सूखने तय माने जा रहे हैं।

अपराधियों को चेतावनी: ‘सुधरें या जिला छोड़ें’

हरिद्वार पुलिस की इस चौतरफा घेराबंदी ने गौ-तस्करों में हड़कंप मचा दिया है। पुलिस ने साफ कर दिया है कि वैधानिक कार्रवाई का यह सिलसिला रुकने वाला नहीं है। गुंडा एक्ट के तहत जिला बदर होने वाले 67 आरोपियों को जल्द ही हरिद्वार की सीमाओं से बाहर कर दिया जाएगा। साथ ही, जमानत पर बाहर चल रहे अपराधियों की गतिविधियों पर एलआईयू (LIU) के माध्यम से भी पैनी नजर रखी जा रही है।


हरिद्वार पुलिस का यह “ऑपरेशन क्लीन” धर्मनगरी में शांति और पशु संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस का यह कड़ा रुख संदेश देता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।

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