पंचमहल (गुजरात)। शिक्षा के मंदिर को कलंकित करने वाली एक बेहद शर्मनाक घटना गुजरात के पंचमहल जिले से सामने आई है। यहाँ अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाली एक महिला शिक्षिका को केवल इसलिए सरेआम थप्पड़ मार दिया गया क्योंकि उन्होंने एक छात्र से परीक्षा में देरी से आने का कारण पूछने की ‘हिम्मत’ की थी। इस घटना ने न केवल शिक्षकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि आधुनिक पीढ़ी में नैतिकता के गिरते स्तर की भी पोल खोल दी है।
इस गुजरात स्कूल कांड का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और आरोपी छात्र को गिरफ्तार कर उसका सार्वजनिक रूप से जुलूस निकाला, ताकि समाज में कड़ा संदेश दिया जा सके।
क्या है पूरा मामला? देरी पर टोका तो जड़ा थप्पड़
यह घटना पंचमहल जिले के शेहरा कस्बे में स्थित एस.जे. दवे हाई स्कूल की है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, बीती 24 जनवरी को स्कूल में 12वीं कक्षा की दूसरी प्रारंभिक (Preliminary) परीक्षा चल रही थी। 18 वर्षीय छात्र मोहम्मद खान अंसारी परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय से काफी देरी से पहुंचा। जब कक्षा में मौजूद महिला पर्यवेक्षक (इन्विजिलेटर) ने छात्र से देरी का कारण पूछा, तो अंसारी ने इसे अपनी शान के खिलाफ समझा।
आरोपी छात्र ने अध्यापिका पर पलटवार करते हुए बेहद बदतमीजी से कहा, “घर पर मुझसे कोई कुछ नहीं पूछता, तो आप मुझसे सवाल करने वाली कौन होती हैं?” प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इसके तुरंत बाद अंसारी ने अपना आपा खो दिया और महिला शिक्षिका को जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। केवल थप्पड़ ही नहीं, उसने शिक्षिका को धक्का भी दिया और धौंस जमाते हुए कक्षा से बाहर निकल गया।
सीसीटीवी ने खोली पोल, बढ़ी लोगों की नाराजगी
पूरी वारदात स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। जैसे ही यह वीडियो सार्वजनिक हुआ, लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि कैसे एक छात्र अपनी गुरु का अपमान कर रहा है। हालांकि, घटना के दिन ही छात्र के पिता ने स्कूल के प्रभारी प्रधानाचार्य विपुल पाठक और पीड़ित शिक्षिका से माफी मांगकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की थी, लेकिन कहानी में मोड़ तीन दिन बाद आया।
माफी का बहाना और 20 लोगों के साथ धमकी
पुलिस जांच में सामने आया कि 27 जनवरी को मोहम्मद खान अंसारी अपने पिता और करीब 15 से 20 अज्ञात लोगों की भीड़ लेकर दोबारा स्कूल पहुंचा। छात्र ने कथित तौर पर महिला शिक्षिका को डराते-धमकाते हुए कहा कि वह कस्बे में अकेली रहती हैं, इसलिए उनका स्कूल में इस तरह का व्यवहार उनके लिए भविष्य में अच्छा नहीं होगा।
यद्यपि आरोपी छात्र ने दावा किया कि वह अपने साथियों के साथ केवल माफी मांगने गया था, लेकिन शिक्षिका ने इसे अपनी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना। सुरक्षा और सम्मान को ध्यान में रखते हुए, अंततः 3 फरवरी को पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई।
पंचमहल पुलिस की सख्त कार्रवाई: अपराध का नाट्य रूपांतरण
घटना की गंभीरता को देखते हुए पंचमहल पुलिस एक्शन मोड में आई। पुलिस निरीक्षक अंकुर चौधरी ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस उसे घटनास्थल पर ले गई। कानून व्यवस्था और जनता में विश्वास बनाए रखने के लिए पुलिस ने अपराध का नाट्य रूपांतरण (Crime Re-enactment) किया।
अधिकारी ने बताया कि आरोपी को उसी रास्ते और उसी स्कूल परिसर में ले जाया गया जहाँ उसने वारदात को अंजाम दिया था। इस दौरान पुलिस ने आरोपी को सार्वजनिक रूप से पेश किया, जिसे देखकर स्थानीय लोगों ने पुलिस की कार्रवाई की सराहना की।
विशेषज्ञ की राय: गिरता नैतिक स्तर और कानून का डर
राष्ट्रीय स्तर के मनोविज्ञानी और शिक्षाविदों ने इस घटना पर चिंता व्यक्त की है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों में “एंटाइटेलमेंट” (सब कुछ उनके हिसाब से होने की चाह) की भावना बढ़ रही है। जब घर पर बच्चों को अनुशासन नहीं सिखाया जाता, तो वे स्कूल जैसे सार्वजनिक स्थानों पर भी हिंसक व्यवहार करने से नहीं हिचकते।
पुलिस निरीक्षक अंकुर चौधरी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा:
“किसी भी शिक्षक के साथ इस तरह का दुर्व्यवहार कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमने आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया है। अपराध का नाट्य रूपांतरण इसलिए किया गया ताकि अन्य छात्रों को यह समझ आ सके कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और गुरु का सम्मान अनिवार्य है।”
वर्तमान स्थिति
आरोपी मोहम्मद खान अंसारी को शुक्रवार को अदालत ने जमानत पर रिहा कर दिया है, लेकिन मामले की जांच अभी भी जारी है। स्कूल प्रशासन ने आरोपी छात्र के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के संकेत दिए हैं। वहीं, पीड़ित शिक्षिका ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें उचित सुरक्षा का आश्वासन दिया है।
इस घटना ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है कि क्या स्कूलों में शिक्षकों को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध है? और क्या आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में ‘दंड’ के अभाव ने छात्रों को बेखौफ बना दिया है?



