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पिथौरागढ़ में बोले राज्यपाल गुरमीत सिंह- ‘सैनिक कभी भूतपूर्व नहीं होता’, सीमांत विकास और पर्यटन पर दिया बड़ा मंत्र

पिथौरागढ़। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) गुरमीत सिंह ने अपने एक दिवसीय जनपद भ्रमण के दौरान सीमांत जिले पिथौरागढ़ की सैन्य परंपराओं, पर्यटन क्षमताओं और स्थानीय उत्पादों की सराहना करते हुए इसे राज्य की प्रगति का मुख्य केंद्र बताया। राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि एक सैनिक वर्दी उतारने के बाद भी राष्ट्र निर्माण में सक्रिय रहता है और उनके अनुभव समाज के लिए अमूल्य धरोहर हैं।

सेना क्षेत्र में मेगा रैली: वीर नारियों और घायल योद्धाओं का सम्मान

राज्यपाल के दौरे का मुख्य आकर्षण सैन्य क्षेत्र में आयोजित ‘पूर्व सैनिक मेगा रैली’ रही। इस दौरान राज्यपाल ने उन जांबाज पूर्व सैनिकों को सम्मानित किया, जो विभिन्न युद्धों और सैन्य अभियानों के दौरान घायल हुए थे। साथ ही, वीर नारियों को सम्मानित करते हुए राज्यपाल भावुक नजर आए और उन्होंने सैन्य परिवारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा, “एक सैनिक कभी भूतपूर्व नहीं होता। अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा उनके डीएनए में होती है। पूर्व सैनिकों को सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाकर न केवल आत्मनिर्भर बनना चाहिए, बल्कि जिले की आर्थिकी को मजबूत करने में भी नेतृत्व करना चाहिए।”

जोरावर साइकिल रैली का समापन और जनसंवाद

राज्यपाल ने 12 कुमाऊं रेजीमेंट द्वारा आयोजित 750 किलोमीटर लंबी ‘जोरावर साइकिल रैली’ का भव्य समापन किया। यह रैली उत्तर प्रदेश के बरेली से शुरू होकर गुंजी और आदि कैलाश जैसे दुर्गम क्षेत्रों से होते हुए पिथौरागढ़ पहुंची थी। राज्यपाल ने रैली के सदस्यों के साहस की प्रशंसा की। रैली का मुख्य उद्देश्य पूर्व सैनिकों की समस्याओं का मौके पर समाधान करना और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना था।

राज्यपाल ने पिथौरागढ़ कंटोनमेंट की व्यवस्थाओं और ईसीएचएस (ECHS) सेवाओं पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे प्रदेश के लिए एक आदर्श मॉडल बताया।

पर्यटन और स्थानीय आर्थिकी: बेरीनाग चाय और राजमा को मिलेगी नई पहचान

सीमांत क्षेत्र की आर्थिक स्थिति पर चर्चा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि पिथौरागढ़ अब वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि जहां पिछले वर्ष 40 हजार पर्यटक यहां आए थे, वहीं आगामी वर्ष में यह संख्या 4 लाख को पार करने की उम्मीद है।

उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि:

  • धार्मिक पर्यटन: आदि कैलाश, ओम पर्वत और पाताल भुवनेश्वर जैसे स्थल जिले के पर्यटन की रीढ़ हैं।

  • स्थानीय उत्पाद: पिथौरागढ़ के राजमा, कीवी और विशेष रूप से ‘बेरीनाग की चाय’ में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की क्षमता है।

  • महिला सशक्तिकरण: राज्यपाल ने सेल्फ हेल्प ग्रुप्स (SHG) से जुड़ी महिलाओं के कार्यों की सराहना की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन उत्पादों की डिजिटल मार्केटिंग और बेहतर पैकेजिंग पर ध्यान दिया जाए ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो सके।

नैनीसैनी हवाई अड्डे पर गार्ड ऑफ ऑनर और विकास कार्यों की समीक्षा

इससे पूर्व, राज्यपाल के नैनीसैनी हवाई अड्डे पहुंचने पर जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई ने उनका स्वागत किया, जहां उन्हें पुलिस जवानों द्वारा ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। राज्यपाल ने हवाई अड्डा परिसर में जिला उद्योग केंद्र, पर्यटन विभाग और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया। उन्होंने उत्पादों की गुणवत्ता और पैकेजिंग की प्रशंसा करते हुए कहा कि डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर इन उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुँचाया जाना चाहिए।

पारदर्शिता और समयबद्धता पर जोर

जिले के उच्चाधिकारियों के साथ बैठक करते हुए राज्यपाल ने विकास योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने कड़े निर्देश दिए कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठे पात्र व्यक्ति तक पारदर्शी तरीके से पहुंचना चाहिए। उन्होंने भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और समयबद्ध क्रियान्वयन को प्राथमिकता देने पर बल दिया।

राज्यपाल गुरमीत सिंह का यह पिथौरागढ़ दौरा न केवल सैन्य मनोबल बढ़ाने वाला रहा, बल्कि इसने जिले के पर्यटन और स्थानीय उत्पादों को एक नई दिशा देने का कार्य किया है। सीमांत क्षेत्र में बुनियादी ढांचों के विकास और डिजिटल कनेक्टिविटी पर उनके जोर ने स्थानीय युवाओं और उद्यमियों में एक नई उम्मीद जगाई है।

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