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सरकारी नौकरी का ‘मायाजाल’: उत्तराखंड में डाक विभाग के नाम पर 27 लाख की बड़ी ठगी, दिल्ली बुलाकर कराया फर्जी इंटरव्यू

देहरादून: उत्तराखंड में सरकारी नौकरी पाने की चाहत रखने वाले युवाओं को निशाना बनाने वाला एक बड़ा गिरोह सक्रिय है। ताजा मामला राजधानी देहरादून से सामने आया है, जहाँ रुद्रप्रयाग के तीन शिक्षित युवकों को ‘मिनिस्ट्री ऑफ कमीशन डिपार्टमेंट ऑफ पोस्ट’ (डाक विभाग) में नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 27 लाख रुपये का चूना लगाया गया है। शातिरों ने जालसाजी की ऐसी बिसात बिछाई कि पीड़ितों को दिल्ली के डाक भवन तक बुलाकर फर्जी इंटरव्यू तक आयोजित करवाया गया। अब कोर्ट के कड़े रुख के बाद देहरादून की पटेल नगर कोतवाली पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।


विश्वास की आड़ में रची गई साजिश

यह पूरा मामला Uttarakhand Job Scam की उस गहरी जड़ों को दर्शाता है, जहाँ परिचित ही विश्वासघात के सूत्रधार बनते हैं। मुख्य पीड़ित अमित सिंह, निवासी रुद्रप्रयाग, ने बताया कि उसकी माता के परिचित पवन सकलानी ने उसे इस तथाकथित अवसर के बारे में जानकारी दी थी। पवन ने दावा किया कि देहरादून के बंजारावाला निवासी गौरव कुमार, उसकी पत्नी अलका चौधरी और अंकुर वर्मा की पहुँच ऊपर तक है और वे डाक विभाग में आसानी से नौकरी लगवा सकते हैं।

12 लाख से शुरू हुई ‘डील’, 9 लाख पर हुई तय

आरोपियों ने शुरुआत में अमित से 12 लाख रुपये की मांग की। अमित ने अपने दो दोस्तों, ठाकुर सिंह और भूपेंद्र (निवासी अगस्त्यमुनि), को भी इस बारे में बताया। जब तीनों युवकों ने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई, तो आरोपियों ने ‘डिस्काउंट’ का लालच देते हुए 9-9 लाख रुपये प्रति व्यक्ति का सौदा तय किया। इस तरह कुल 27 लाख रुपये नकद और ऑनलाइन माध्यम से आरोपियों के खातों में पहुँचा दिए गए।


हाई-टेक ठगी: फर्जी ईमेल और ‘डाक भवन’ का दौरा

इस Dehradun Fraud News का सबसे चौंकाने वाला पहलू आरोपियों द्वारा अपनाई गई मोडस ऑपरेंडी है। पैसे ऐंठने के बाद, जब युवकों ने दबाव बनाया, तो आरोपियों ने उन्हें पूरी तरह सरकारी दिखने वाले दस्तावेज सौंपे:

  1. फर्जी नियुक्ति पत्र: पीड़ितों को डाक विभाग में यूडीसी (Upper Division Clerk) के पद का फर्जी जॉइनिंग लेटर भेजा गया।

  2. सरकारी ईमेल का क्लोन: 21 दिसंबर 2024 को ‘इंडिया पोस्ट’ जैसी दिखने वाली फर्जी मेल आईडी से पीड़ितों को इंटरव्यू के दस्तावेज लाने का ईमेल भेजा गया।

  3. दिल्ली में ड्रामा: आरोपियों ने पीड़ितों को दिल्ली के पटेल चौक स्थित ‘डाक भवन’ बुलाया। वहाँ विभाग की फर्जी मोहरें, फर्जी असिस्टेंट डायरेक्टर के हस्ताक्षर और जाली आईडी कार्ड का उपयोग कर उन्हें यह यकीन दिलाया गया कि उनकी प्रक्रिया पूरी तरह वैध है।

यहाँ तक कि ठगों ने पीड़ितों को गुमराह करने के लिए फर्जी सिस्टम आईडी और समय-समय पर ‘ट्रांसफर आर्डर’ तक भेजे, ताकि किसी को शक न हो।


जब खुला राज: कोर्ट के आदेश पर एक्शन

काफी समय बीत जाने और वेतन न मिलने पर जब पीड़ितों ने स्वतंत्र रूप से जांच की, तो पता चला कि उनके पास मौजूद सभी दस्तावेज और आईडी कार्ड कूटरचित (फर्जी) थे। जब उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी।

पीड़ित अमित सिंह ने पहले एसएसपी और जिलाधिकारी के चक्कर लगाए, लेकिन जब पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया, तो उन्हें अदालत की शरण लेनी पड़ी। Ministry of Posts Recruitment Scam की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए।

पुलिसिया कार्रवाई और धाराएं

पटेल नगर कोतवाली प्रभारी चंद्रभान अधिकारी ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर आरोपी गौरव कुमार, अलका चौधरी और अंकुर वर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी (IPC/BNS की संबंधित धाराओं) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब इन आरोपियों के बैंक खातों और पुराने रिकॉर्ड को खंगाल रही है ताकि यह पता चल सके कि इन्होंने और कितने युवाओं को अपना शिकार बनाया है।


युवाओं के लिए चेतावनी: कैसे बचें ‘जॉब स्कैम’ से?

उत्तराखंड में बढ़ते Fake Joining Letter Fraud के मामलों को देखते हुए विशेषज्ञों ने कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी है:

  • आधिकारिक वेबसाइट: किसी भी सरकारी नौकरी की जानकारी केवल विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (.gov.in) से ही प्राप्त करें।

  • पैसे की मांग: सरकारी नौकरी के लिए कभी भी ‘बैकडोर एंट्री’ या रिश्वत की मांग नहीं की जाती। यदि कोई पैसे मांगता है, तो वह निश्चित रूप से ठगी है।

  • दस्तावेजों का सत्यापन: नियुक्ति पत्र मिलने पर संबंधित विभाग के मुख्यालय जाकर स्वयं भौतिक सत्यापन (Physical Verification) जरूर करें।


सिस्टम पर उठते सवाल

यह घटना न केवल ठगों के दुस्साहस को बयां करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे बेरोजगारी की मार झेल रहे युवा आसानी से Cyber Crime Uttarakhand का शिकार बन रहे हैं। दिल्ली के डाक भवन जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के बाहर फर्जीवाड़ा करना सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह होगा कि देहरादून पुलिस इन सफेदपोश ठगों से पीड़ितों की गाढ़ी कमाई वापस करा पाती है या नहीं।

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