
देहरादून। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के काशीपुर में किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या का मामला अब एक बड़े राजनीतिक तूफान में तब्दील हो गया है। इस घटना को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार, 16 जनवरी को उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में सैकड़ों कांग्रेसी कार्यकर्ता देहरादून स्थित पुलिस मुख्यालय (PHQ) का घेराव करेंगे। कांग्रेस की मांग है कि मामले में केवल छोटे कर्मचारियों पर गाज गिराने के बजाय जिले के कप्तान (SSP) पर सीधी कार्रवाई की जाए।
एसएसपी के निलंबन पर अड़ी कांग्रेस
कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री (संगठन) राजेंद्र भंडारी ने इस विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा साझा करते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला है। भंडारी ने कहा कि यह केवल एक आत्महत्या नहीं, बल्कि सिस्टम द्वारा की गई हत्या है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक ऊधमसिंह नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को निलंबित नहीं किया जाता, तब तक कांग्रेस शांत नहीं बैठेगी।
राजेंद्र भंडारी ने कहा, “मृतक किसान के परिजन और स्वयं किसान ने अपने आखिरी वीडियो में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे। छोटे पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर करना केवल एक दिखावा है। कांग्रेस की मांग है कि इस पूरी लापरवाही के लिए जिम्मेदार जिले के आला अधिकारियों पर कार्रवाई हो।”
क्या है पूरा घटनाक्रम? (Background of the Case)
काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह ने बीते शनिवार को हल्द्वानी के एक होटल में जहर खाकर जान दे दी थी। लेकिन उनकी मौत से ज्यादा उनके द्वारा छोड़े गए ‘सुसाइड वीडियो’ ने प्रदेश को हिला कर रख दिया।
वीडियो में लगाए गए गंभीर आरोप:
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₹4 करोड़ की धोखाधड़ी: सुखवंत सिंह ने आरोप लगाया था कि जमीन के एक सौदे में उनके साथ 4 करोड़ रुपये की भारी वित्तीय धोखाधड़ी हुई।
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पुलिस की संलिप्तता: किसान का आरोप था कि जब वे न्याय के लिए पुलिस के पास गए, तो अधिकारियों ने उनकी मदद करने के बजाय आरोपियों का साथ दिया और उन्हें ही डराया-धमकाया।
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सिस्टम से हताशा: वीडियो में किसान ने कई रसूखदार लोगों और पुलिस अधिकारियों के नामों का जिक्र किया था, जिससे पूरे महकमे में खलबली मची हुई है।
अब तक की पुलिस कार्रवाई: एसआईटी और तबादले
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP) के निर्देश पर एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। अब तक प्रशासन ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
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निलंबन: नामजद आरोपों के आधार पर 2 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया है।
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लाइन हाजिर: 10 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया।
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रेंज ट्रांसफर: मामले की निष्पक्ष जांच का हवाला देते हुए आरोपी पुलिसकर्मियों का तबादला कुमाऊं रेंज से हटाकर गढ़वाल रेंज में कर दिया गया है।
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मुकदमा: मृतक के भाई की तहरीर पर 26 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।
हालांकि, कांग्रेस इन कदमों को “ऊंट के मुंह में जीरा” बता रही है।
पुलिस मुख्यालय घेराव: अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी
प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में होने वाले इस कूच को लेकर कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे डीजीपी से मुलाकात कर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपेंगे।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें:
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एसएसपी का तत्काल निलंबन: जिले के सर्वोच्च पुलिस अधिकारी की जवाबदेही तय की जाए।
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निष्पक्ष न्यायिक जांच: एसआईटी के बजाय मामले की जांच हाई कोर्ट के सिटिंग जज या सीबीआई से कराई जाए।
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पीड़ित परिवार को सुरक्षा: नामजद 26 आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित हो।
राजेंद्र भंडारी ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस प्रशासन ने संतोषजनक कार्रवाई का आश्वासन नहीं दिया, तो कांग्रेसी कार्यकर्ता पुलिस मुख्यालय के बाहर ही अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने से पीछे नहीं हटेंगे।
राजनीतिक मायने और आगामी चुनाव
उत्तराखंड में किसान की आत्महत्या और उसमें पुलिस का नाम आना सरकार के लिए बड़ी असहजता का कारण बन गया है। कांग्रेस इस मुद्दे को ‘किसान विरोधी सरकार’ और ‘भ्रष्ट प्रशासन’ के नैरेटिव के साथ जोड़ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गणेश गोदियाल का यह आक्रामक रुख आगामी राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।
काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह की मौत ने देवभूमि की कानून-व्यवस्था पर कई गहरे सवाल दाग दिए हैं। एक तरफ जहाँ हाईकोर्ट में आरोपियों की याचिका पर सुनवाई चल रही है, वहीं दूसरी तरफ सड़कों पर विपक्ष का सैलाब उमड़ने को तैयार है। आज होने वाला पुलिस मुख्यालय का घेराव यह तय करेगा कि सरकार इस दबाव के आगे झुकती है या अपनी मौजूदा जांच पर कायम रहती है।



