नई दिल्ली, 17 नवंबर। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में शनिवार देर रात और रविवार तड़के भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, यह भूकंप रात करीब 2:00 बजे आया और इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.7 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र लेह क्षेत्र के पास 10 किलोमीटर की गहराई में स्थित था।
तड़के सो रहे लोगों ने हल्के झटके महसूस किए, जिसके बाद कई लोग एहतियातन अपने घरों से बाहर निकल आए। एनसीएस ने बताया कि यह भूकंप उथली गहराई पर उत्पन्न हुआ था, जिसके कारण झटके स्थानीय स्तर पर स्पष्ट महसूस किए गए। हालांकि कहीं से भी किसी तरह के जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है।
स्थानीय प्रशासन ने बताया कि भूकंप के बाद हालात सामान्य हैं और एहतियातन संवेदनशील क्षेत्रों की जांच की गई है। लेह क्षेत्र उच्च हिमालयी ज़ोन में होने के कारण भूकंपीय रूप से सक्रिय माना जाता है और यहां हल्के झटके समय-समय पर महसूस होते रहते हैं।
चीन के झिंजियांग में भी भूकंप, तीव्रता 4.4 दर्ज
भारत के पड़ोसी देश चीन में भी देर रात भूकंप के झटके दर्ज किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, चीन के झिंजियांग प्रांत में 4.4 तीव्रता का भूकंप आया। इसका केंद्र भी 10 किलोमीटर की गहराई पर था।
झिंजियांग चीन का भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील इलाका है, जहां मध्यम तीव्रता के भूकंप अक्सर महसूस किए जाते हैं। हालांकि इस भूकंप के बाद भी किसी बड़े नुकसान की जानकारी नहीं मिली है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कम गहराई वाले भूकंप अपेक्षाकृत अधिक खतरनाक माने जाते हैं, क्योंकि इनसे निकलने वाली भूकंपीय तरंगें कम दूरी तय कर सीधे सतह तक पहुंचती हैं और हिलने की तीव्रता बढ़ जाती है। भारत और चीन दोनों जगह आए इन झटकों ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र की भूकंपीय सक्रियता को उजागर किया है।
भूकंपीय गतिविधि पर विशेषज्ञों की नजर
भूकंप विज्ञानियों का मानना है कि भारत-तिब्बत प्लेट और यूरेशियन प्लेट के इंटरसेक्शन पर स्थित हिमालयी क्षेत्र लगातार टेक्टॉनिक दबाव झेल रहा है। यही वजह है कि लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड सहित पूरा उत्तरी हिमालयी क्षेत्र उच्च जोखिम वाले भूकंपीय ज़ोन में आता है।
एनसीएस और भूकंप अनुसंधान संस्थानों ने कहा है कि दोनों क्षेत्रों में दर्ज गतिविधि सामान्य है, लेकिन सतत निगरानी जारी रहेगी।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और भूकंप के दौरान व बाद में मानक सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करें।



