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Uttarakhand: उपनल कर्मी नीलम डोभाल की अचानक मौत से आंदोलन में शोक की लहर, नियमितीकरण की मांग पर संघर्ष आठवें दिन भी जारी

The Hill India News
Last updated: November 17, 2025 2:53 am
The Hill India News
Published: November 17, 2025
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देहरादून, 17 नवंबर। उत्तराखंड में नियमितीकरण और ‘समान कार्य–समान वेतन’ की मांग को लेकर चल रहे उपनल कर्मचारियों के आंदोलन के बीच रविवार सुबह एक दुखद घटना सामने आई। देहरादून में तैनात उपनल कर्मी नीलम डोभाल की अचानक मौत ने पूरे आंदोलन को शोकाकुल कर दिया है। आंदोलन स्थल पर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने नीलम के निधन की खबर मिलते ही दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

धरनास्थल के लिए घर से निकलते समय हुई मृत्यु

जानकारी के अनुसार नीलम डोभाल जिला निर्वाचन कार्यालय, देहरादून में कनिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत थीं। रविवार सुबह वह रोज की तरह धरनास्थल के लिए घर से निकल रही थीं, लेकिन अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और उनकी मृत्यु हो गई। हालांकि मौत धरनास्थल पर नहीं हुई, मगर इस घटना का गहरा भावनात्मक प्रभाव आंदोलनरत कर्मचारियों पर पड़ा है।

Contents
देहरादून, 17 नवंबर। उत्तराखंड में नियमितीकरण और ‘समान कार्य–समान वेतन’ की मांग को लेकर चल रहे उपनल कर्मचारियों के आंदोलन के बीच रविवार सुबह एक दुखद घटना सामने आई। देहरादून में तैनात उपनल कर्मी नीलम डोभाल की अचानक मौत ने पूरे आंदोलन को शोकाकुल कर दिया है। आंदोलन स्थल पर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने नीलम के निधन की खबर मिलते ही दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।धरनास्थल के लिए घर से निकलते समय हुई मृत्युलंबे तनाव में थीं नीलम, पति भी उपनल कर्मीनियमितीकरण की मांग पर आंदोलन सातवें दिन भी जारीहाईकोर्ट के आदेश का संदर्भ

लंबे तनाव में थीं नीलम, पति भी उपनल कर्मी

संयुक्त मोर्चा के प्रदेश संयोजक विनोद डोभाल ने बताया कि नीलम पिछले कई दिनों से मानसिक तनाव में थीं। नीलम और उनके पति दोनों उपनल कर्मी हैं और 10 नवंबर से हड़ताल में शामिल रहे हैं। लगातार जारी असुरक्षा की भावना, नियमितीकरण को लेकर भविष्य की अनिश्चितता और कोर्ट के आदेशों के बावजूद फैसलों में देरी को लेकर अनेक कर्मचारी तनाव में हैं।

नियमितीकरण की मांग पर आंदोलन सातवें दिन भी जारी

उपनल कर्मियों का धरना राजधानी देहरादून में लगातार सातवें दिन भी जारी रहा। कर्मचारी नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन, और सेवा शर्तों में सुधार की मांग कर रहे हैं। आंदोलन ने व्यापक रूप ले लिया है और प्रतिदिन हजारों कर्मचारी इसमें शामिल हो रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लगातार मिल रहे सामाजिक, राजनीतिक और कर्मचारी संगठनों के समर्थन से उनके हौसले और मजबूत हुए हैं।
कर्मचारियों ने सरकार से मांग की है कि न्यायालय के आदेशों के अनुरूप जल्द से जल्द नियमावली बनाई जाए और उपनल कर्मियों को स्थायी करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।


सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की रिव्यू पिटीशन खारिज की

उपनल कर्मचारियों की इस लड़ाई का कानूनी पहलू भी बेहद अहम है।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की रिव्यू पिटीशन खारिज कर दी है, जो इस मामले को और गंभीर बना देता है। इससे पहले नैनीताल हाईकोर्ट ने उपनल कर्मियों के नियमितीकरण हेतु नियमावली बनाने के स्पष्ट निर्देश दिए थे।

सरकार द्वारा आदेशों का अनुपालन न करने पर उपनल कर्मियों ने अवमानना याचिका भी दाखिल कर रखी है। सुप्रीम कोर्ट के इस ताज़ा आदेश के बाद सरकार पर निर्णय लेने का दबाव और बढ़ गया है।

हाईकोर्ट के आदेश का संदर्भ

हाईकोर्ट ने कहा था कि वर्षों से संविदा पर कार्यरत उपनल कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों की तरह अधिकार मिले और उनके हितों की रक्षा करने हेतु स्पष्ट नियमावली तैयार की जाए। नियम न बनने के कारण यह मामला न्यायालय में लगातार लंबित है और कर्मचारियों में बेचैनी बनी हुई है।


नीलम की मौत ने झकझोरा आंदोलन, कर्मचारियों में नाराज़गी

नीलम डोभाल की मौत ने आंदोलनरत कर्मचारियों में गहरी नाराज़गी और असंतोष पैदा किया है। कई कर्मचारियों ने कहा कि अनुचित देरी, अस्थायी नियुक्ति और अनिश्चित भविष्य ने हजारों परिवारों को मानसिक तनाव में रखा है।

संयुक्त मोर्चा के नेताओं ने सरकार से मांग की है कि नीलम के परिवार को आर्थिक सहायता, नौकरी सुरक्षा और मानवीय आधार पर सहायता प्रदान की जाए।


सरकार पर बढ़ा दबाव, समाधान की उम्मीद

सुप्रीम कोर्ट के आदेश, हाईकोर्ट के निर्देश और लगातार बढ़ते आंदोलन के बीच राज्य सरकार पर अब त्वरित निर्णय लेने का दबाव है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

इस पूरे प्रकरण ने संविदा व्यवस्था की कमियों और वर्षों से स्थायीकरण की प्रतीक्षा कर रहे हजारों उपनल कर्मियों की स्थिति को फिर से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है।

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