By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: दून विश्वविद्यालय का आपदा पीड़ितों के लिए बड़ा कदम: एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में दान
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > उत्तराखंड > दून विश्वविद्यालय का आपदा पीड़ितों के लिए बड़ा कदम: एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में दान
उत्तराखंडफीचर्ड

दून विश्वविद्यालय का आपदा पीड़ितों के लिए बड़ा कदम: एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में दान

The Hill India News
Last updated: September 3, 2025 3:39 pm
The Hill India News
Published: September 3, 2025
Share
SHARE

देहरादून, 3 सितंबर 2025: उत्तराखंड में आई आपदा के बीच दून विश्वविद्यालय ने राहत और पुनर्वास कार्यों को मजबूती देने के लिए सराहनीय पहल की है। बुधवार को विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में शिष्टाचार भेंट की और इस दौरान विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों का एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में भेंट किया।

Contents
सामूहिक सहयोग की मिसालसरकार की प्राथमिकता: त्वरित राहत और पुनर्वासशिक्षा जगत की सामाजिक भूमिकाआपदा प्रभावित क्षेत्रों में चुनौतियांअन्य संस्थानों के लिए प्रेरणा

मुख्यमंत्री ने इस योगदान को एक प्रेरणादायी कदम बताते हुए कहा कि यह न केवल आपदा प्रभावित लोगों के लिए सहारा बनेगा, बल्कि राज्य के शैक्षणिक संस्थानों की सामाजिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को भी उजागर करता है।


सामूहिक सहयोग की मिसाल

मुख्यमंत्री धामी ने दून विश्वविद्यालय के इस योगदान की सराहना करते हुए कहा,

“आपदा की इस घड़ी में दून विश्वविद्यालय का यह कदम एक मिसाल है। इससे अन्य शैक्षणिक, सामाजिक और निजी संस्थान भी प्रेरित होंगे और आपदा राहत कार्यों में सहयोग देंगे।”

उन्होंने कुलपति प्रो. डंगवाल और विश्वविद्यालय परिवार का आभार व्यक्त करते हुए भरोसा जताया कि इस प्रकार की सामूहिक भागीदारी से राहत और पुनर्वास कार्य और अधिक प्रभावी ढंग से संपन्न होंगे।


सरकार की प्राथमिकता: त्वरित राहत और पुनर्वास

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार आपदा प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित राहत और पुनर्वास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। सरकार की टीम लगातार प्रभावित इलाकों में कार्यरत है और जन सहयोग से इन प्रयासों को और मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में सरकारी मशीनरी के साथ-साथ सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और स्थानीय समुदायों की भूमिका भी बेहद अहम है।


शिक्षा जगत की सामाजिक भूमिका

दून विश्वविद्यालय का यह योगदान राज्य के शिक्षा जगत के लिए भी एक नई दिशा तय करता है। आमतौर पर विश्वविद्यालय और संस्थान अपनी शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित रहते हैं, लेकिन इस कदम से यह संदेश गया है कि शैक्षणिक संस्थान केवल ज्ञान के केंद्र नहीं, बल्कि समाजिक जिम्मेदारी निभाने वाले स्तंभ भी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब विश्वविद्यालय और कॉलेज इस प्रकार राहत कार्यों में सहभागी बनते हैं, तो छात्र-छात्राओं में भी सेवा, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना मजबूत होती है।


आपदा प्रभावित क्षेत्रों में चुनौतियां

राज्य के कई हिस्सों में हालिया आपदा ने जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

  • सड़कों, पुलों और मकानों को भारी नुकसान हुआ है।
  • हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है।
  • सरकार द्वारा राहत शिविर, भोजन, चिकित्सा और पुनर्वास की व्यवस्था की जा रही है।

ऐसे समय में दून विश्वविद्यालय का योगदान प्रभावित परिवारों के लिए संबल साबित होगा।


अन्य संस्थानों के लिए प्रेरणा

मुख्यमंत्री धामी ने उम्मीद जताई कि दून विश्वविद्यालय की इस पहल से राज्य के अन्य संस्थान, निजी कंपनियां और समाजसेवी संगठन भी आगे आएंगे। आपदा प्रबंधन और राहत कार्य केवल सरकार के भरोसे नहीं छोड़े जा सकते, बल्कि इसमें जन-भागीदारी से ही सफलता मिलती है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश का हर नागरिक यदि अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग करता है तो आपदा पीड़ितों को तेजी से राहत और पुनर्वास मिल सकता है।

दून विश्वविद्यालय द्वारा मुख्यमंत्री राहत कोष में एक दिन का वेतन दान करना न केवल आपदा पीड़ितों के लिए राहत का बड़ा कदम है, बल्कि यह पूरे राज्य के लिए एक सकारात्मक और प्रेरक संदेश भी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की बातों में साफ झलकता है कि सरकार जनसहयोग को आपदा प्रबंधन का महत्वपूर्ण आधार मानती है। आने वाले दिनों में यदि अन्य संस्थान भी इसी प्रकार आगे आते हैं तो उत्तराखंड न केवल आपदा से उबर पाएगा बल्कि एक सशक्त और संवेदनशील समाज का निर्माण भी होगा।

You Might Also Like

कश्मीर में फिर बढ़ी दहशत! सैकड़ों कश्मीरी पंडित कर्मचारी छुट्टी पर भेजे गए, 3 हजार से ज्यादा संदिग्ध हिरासत में; क्या घाटी में फिर सक्रिय हो रहा आतंकी नेटवर्क?
रील बनाने के चक्कर में भागीरथी में बही महिला,तलाश जारी
Uttarakhand: मुख्यमंत्री ने अगस्त्यमुनि में आयोजित रक्षाबंधन एवं जन मिलन कार्यक्रम को किया वर्चुअल माध्यम से संबोधित
UP विधानसभा उपचुनाव: राहुल गाँधी और अखिलेश यादव साथ मिलकर लड़ेंगे चुनाव
79वां स्वतंत्रता दिवस: राष्ट्रपति भवन में ‘एट होम’ समारोह, PM मोदी समेत कई दिग्गज शामिल
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
देशफीचर्डस्पोर्ट्स

एशियन गेम्स में भारत का ‘गोल्डन’ आगाज, महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम ने रचा इतिहास; दक्षिण कोरिया को हराकर जीता स्वर्ण

The Hill India News
The Hill India News
October 2, 2026
कोटद्वार में ‘मोहम्मद’ दीपक की गिरफ्तारी से फिर गरमाया विवाद, दुकान में घुसकर बदसलूकी का आरोप; व्यापारियों ने कोतवाली में दिया धरना
गांधी-शास्त्री जयंती पर देशभर में गूंजा श्रद्धा और संकल्प का संदेश, राष्ट्रपति मुर्मू से PM मोदी तक ने दी श्रद्धांजलि
UPL क्लोजिंग से पहले गरमाया विवाद: मासूम शर्मा के शो के खिलाफ UKD का प्रदर्शन, स्टेडियम के बाहर नारेबाजी से बढ़ा सियासी पारा
हरिद्वार को बड़ी सौगात: अब यहीं तैयार होंगे MBBS डॉक्टर, ESI मेडिकल कॉलेज को मिली मंजूरी; 50 सीटों से होगी शुरुआत
‘एक कचौड़ी, दो समोसा… इन मर्दों का क्या भरोसा’ से ‘नारी अपने आप की’ तक, दिल्ली की सड़कों पर गूंजा Gen Z का गुस्सा; DU-JNU-जामिया की छात्राओं ने उठाए महिला सुरक्षा पर सवाल
सूखती धाराओं से फिर बहने लगी हेवल नदी… उत्तराखंड के IFS धर्म सिंह मीणा को Eco-Warrior Award 2026, वैज्ञानिक मॉडल ने बदली जलस्रोतों की तस्वीर
10 लाख का बिजली बिल नहीं भरा तो कट गई BSNL टावर की बिजली, 15 ग्राम सभाओं में नेटवर्क ठप… फोन हुए ‘शोपीस’, ग्रामीण बोले- आपात स्थिति में कैसे बचेंगे?
‘पलटूराम’ से ‘वोट चोरी’ तक… हरिद्वार में हरीश रावत के तीखे तेवर, ‘टाइगर इज बैक’ पोस्टर के साथ निकली धन्यवाद संवाद यात्रा
दिवाली पर पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा रुख! पूरी तरह बैन नहीं, लेकिन 24 घंटे पटाखे चलाने की भी नहीं मिलेगी छूट; तय समय पर ही इस्तेमाल के संकेत
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?