देहरादून। उत्तराखंड को यूं ही देवभूमि नहीं कहा जाता। हिमालय की गोद में बसे इस पावन प्रदेश की पहचान केवल प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की आध्यात्मिक विरासत करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। अब यही देवभूमि तेजी से विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। चारधाम यात्रा के ऐतिहासिक रिकॉर्ड के साथ-साथ प्रदेश के अन्य प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व बढ़ोतरी इस बात का प्रमाण है कि उत्तराखंड धार्मिक पर्यटन का सबसे बड़ा केंद्र बनता जा रहा है।
राज्य सरकार द्वारा धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने, तीर्थस्थलों का आधुनिक विकास, बेहतर सड़क नेटवर्क, परिवहन सुविधाओं का विस्तार और मंदिर परिसरों में यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित किए जाने का सकारात्मक प्रभाव अब साफ दिखाई दे रहा है। यही कारण है कि देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंच रहे हैं। इसका सीधा लाभ स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन उद्योग, होटल व्यवसाय, परिवहन और छोटे व्यापारियों को भी मिल रहा है।
चारधाम यात्रा ने बनाया नया इतिहास
उत्तराखंड की पहचान चारधाम यात्रा से है और इस वर्ष चारधाम यात्रा ने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। यात्रा शुरू होने के मात्र 105 दिनों के भीतर 45 लाख 84 हजार 375 श्रद्धालु भगवान बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के दर्शन कर चुके हैं। यह संख्या पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक है और लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर यात्रा प्रबंधन, ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था, सुरक्षित मार्ग, हेलीकॉप्टर सेवाओं का विस्तार और प्रशासनिक तैयारियों ने यात्रियों का विश्वास और अधिक मजबूत किया है।
जागेश्वर धाम में ढाई गुना बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या
अल्मोड़ा जिले में स्थित प्राचीन जागेश्वर धाम इस समय श्रद्धालुओं की पहली पसंद बनता जा रहा है। उत्तराखंड पर्यटन विभाग के अनुसार जनवरी से जून 2026 तक यहां 1 लाख 74 हजार 119 श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या केवल 67 हजार 875 थी। यानी एक वर्ष में यहां श्रद्धालुओं की संख्या लगभग ढाई गुना बढ़ गई।
देवदार के घने जंगलों के बीच स्थित भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर समूह अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से पहचान बना रहा है।
त्रियुगीनारायण मंदिर बना आस्था का नया केंद्र
रुद्रप्रयाग जिले में स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर, जहां पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, वहां भी श्रद्धालुओं की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
जनवरी से जून 2026 तक यहां 3 लाख 40 हजार 385 श्रद्धालु पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या केवल 1 लाख 36 हजार 120 थी। विवाह के इच्छुक युवा, नवविवाहित दंपति और देशभर से आने वाले श्रद्धालु इस मंदिर को विशेष महत्व दे रहे हैं।
पूर्णागिरि धाम में भी उमड़ा भक्तों का सैलाब
चंपावत जिले में स्थित मां पूर्णागिरि धाम में इस वर्ष जून तक 20 लाख 91 हजार 788 श्रद्धालु पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 14 लाख 35 हजार 290 थी। यह वृद्धि दर्शाती है कि सीमांत क्षेत्रों में भी धार्मिक पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है।
मां पूर्णागिरि के दर्शन के लिए उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और नेपाल से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
धारी देवी मंदिर में दोगुनी हुई आस्था
श्रीनगर (गढ़वाल) स्थित प्रसिद्ध धारी देवी मंदिर में भी श्रद्धालुओं का उत्साह लगातार बढ़ रहा है। इस वर्ष जून तक यहां 5 लाख 42 हजार 626 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 2 लाख 83 हजार 275 था। अलकनंदा नदी के तट पर स्थित यह शक्तिपीठ अब धार्मिक पर्यटन का प्रमुख आकर्षण बन चुका है।
कैंची धाम ने फिर तोड़े सभी रिकॉर्ड
नैनीताल जिले में स्थित बाबा नीम करौली महाराज के कैंची धाम में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या ने नया इतिहास रच दिया है। जनवरी से जून 2026 तक यहां 24 लाख 34 हजार 507 श्रद्धालु पहुंचे हैं। इनमें अकेले जून महीने में ही 8 लाख 66 हजार श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए।
देश-विदेश में बाबा नीम करौली महाराज की बढ़ती लोकप्रियता के कारण अमेरिका, यूरोप सहित कई देशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं।
यमुनोत्री धाम में बना नया रिकॉर्ड
उत्तरकाशी जिले में स्थित यमुनोत्री धाम की यात्रा कठिन मानी जाती है, लेकिन इसके बावजूद इस वर्ष यहां श्रद्धालुओं ने नया रिकॉर्ड बना दिया है।
दो अगस्त तक 6 लाख 54 हजार 958 श्रद्धालु मां यमुना के दर्शन कर चुके हैं, जो धाम के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। पिछले वर्षों की तुलना में यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है, जो उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।
बदरीनाथ धाम में भी रिकॉर्ड तोड़ यात्रा
बदरीनाथ धाम की यात्रा ने भी इस वर्ष ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यात्रा के पहले 100 दिनों में 15 लाख 52 हजार 21 श्रद्धालु भगवान बदरीविशाल के दर्शन कर चुके हैं, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 12 लाख 40 हजार 408 थी।
चारधाम यात्रा में बदरीनाथ धाम का विशेष महत्व होने के कारण यहां देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
आदि कैलाश की बढ़ती लोकप्रियता
पिथौरागढ़ जिले में स्थित आदि कैलाश धाम अब धार्मिक पर्यटन का नया आकर्षण बनकर उभरा है। इस वर्ष केवल दो महीनों में ही 52 हजार 441 श्रद्धालु यहां पहुंच चुके हैं। वर्ष 2022 से पहले जहां यहां आने वाले यात्रियों की संख्या दो हजार से भी कम थी, वहीं अब यह संख्या कई गुना बढ़ चुकी है।
2023 में 10,025, वर्ष 2024 में 29,352 और 2025 में 36,526 श्रद्धालु आदि कैलाश पहुंचे थे। इस वर्ष यात्रा शुरू होने के मात्र दो महीनों में ही पिछले सभी रिकॉर्ड टूट गए। हालांकि मानसून के कारण फिलहाल यात्रा अस्थायी रूप से स्थगित है।
धार्मिक पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या केवल मंदिरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक असर पूरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। होटल, होमस्टे, टैक्सी सेवा, स्थानीय बाजार, हस्तशिल्प, धार्मिक सामग्री की दुकानें, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और युवाओं को स्वरोजगार से जुड़ने का मौका मिल रहा है।
राज्य सरकार मानसखंड मंदिरमाला मिशन, केदारखंड विकास योजना, सड़क चौड़ीकरण, पार्किंग, रोपवे परियोजनाओं, डिजिटल सुविधाओं और आधुनिक यात्री सुविधाओं पर तेजी से कार्य कर रही है। इन प्रयासों का लाभ अब जमीन पर दिखाई देने लगा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में विकसित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। प्राचीन मंदिरों का संरक्षण, धार्मिक विरासत का संवर्धन और श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना इसी दिशा में उठाए जा रहे महत्वपूर्ण कदम हैं।
आस्था, पर्यटन और विकास का नया संगम
उत्तराखंड आज केवल चारधाम यात्रा तक सीमित नहीं रह गया है। जागेश्वर, त्रियुगीनारायण, पूर्णागिरि, धारी देवी, कैंची धाम, कार्तिक स्वामी, सुरकंडा देवी और आदि कैलाश जैसे तीर्थस्थल भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बना रहे हैं। श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड संख्या यह संकेत दे रही है कि आने वाले वर्षों में उत्तराखंड धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में विश्व मानचित्र पर और अधिक मजबूत स्थान बनाएगा। देवभूमि की यह आध्यात्मिक यात्रा अब केवल आस्था तक सीमित नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संरक्षण, पर्यटन विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक समृद्धि की नई कहानी भी लिख रही है।
