
देहरादून, 7 अप्रैल 2026। विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर देहरादून स्थित संजय ऑर्थोपीडिक, स्पाइन और मैटरनिटी सेंटर में एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें स्वास्थ्य, सड़क सुरक्षा और जन-जागरूकता जैसे अहम विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम में विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लेते हुए स्वस्थ और सुरक्षित समाज के निर्माण के लिए ठोस पहल करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री श्री सुबोध उनियाल द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए लगातार प्रयासरत है, खासकर दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने घोषणा की कि विशेषज्ञ डॉक्टरों को पहाड़ी क्षेत्रों में छह-छह महीने के रोटेशन पर तैनात किया जाएगा, जिससे वहां के लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। साथ ही, डॉक्टरों के परिवारों के लिए देहरादून और हल्द्वानी में आवासीय सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि वे बिना किसी चिंता के अपनी सेवाएं दे सकें।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित पद्मश्री डॉ. बी. के. एस. संजय, जो एम्स गुवाहाटी के अध्यक्ष भी हैं, ने सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते मामलों पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि भारत में हर वर्ष लगभग 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें 1.5 लाख से अधिक लोगों की जान चली जाती है। उन्होंने कहा कि यह केवल आंकड़े नहीं, बल्कि हर संख्या के पीछे एक परिवार की पीड़ा छिपी होती है। डॉ. संजय ने सुझाव दिया कि सड़क सुरक्षा को एक राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। इसके लिए स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रम में सड़क सुरक्षा को शामिल करना आवश्यक है, ताकि युवाओं में बचपन से ही जिम्मेदारी और जागरूकता विकसित हो सके। उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि एम्स जैसे संस्थानों को “रोड सेफ्टी नॉलेज सेंटर” के रूप में विकसित किया जाए।
कार्यक्रम में सांसद श्री नरेश बंसल ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि सड़क दुर्घटनाओं का मुख्य कारण नियमों का पालन न करना है। उन्होंने कहा कि हेलमेट और सीट बेल्ट जैसे साधारण उपायों को नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “केवल एक स्वस्थ और सुरक्षित पीढ़ी ही विकसित भारत के सपने को साकार कर सकती है।”
पद्मश्री साहित्यकार कन्हैया लाल पोखरियाल ने कार्यक्रम में स्वच्छता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज के लिए साफ-सफाई अत्यंत आवश्यक है और हर नागरिक को अपने आसपास स्वच्छ वातावरण बनाए रखने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
ऑर्थोपीडिक सर्जन डॉ. एस. एन. सिंह ने स्वास्थ्य के तीन महत्वपूर्ण पहलुओं—शारीरिक, मानसिक और सामाजिक संतुलन—पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में युवा वर्ग तेजी से नशे की ओर आकर्षित हो रहा है, जो समाज के लिए एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूर रहें।
डॉ. गौरव संजय ने ‘वन हेल्थ’ की अवधारणा को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि मानव, पशु और पर्यावरण का स्वास्थ्य एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा हुआ है। यदि पर्यावरण प्रदूषित होगा, तो इसका सीधा असर मानव और पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ेगा। उन्होंने स्वच्छ हवा, सुरक्षित पेयजल, पौष्टिक भोजन और संतुलित आहार के महत्व पर बल देते हुए कहा कि समग्र स्वास्थ्य के लिए इन सभी तत्वों का संतुलन जरूरी है।
कार्यक्रम के अध्यक्ष पद्मश्री कल्याण सिंहरावत ने अपने संबोधन में कहा कि सड़क सुरक्षा केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे यातायात नियमों का पालन करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
कार्यक्रम का सफल संचालन और समन्वय श्री योगेश अग्रवाल द्वारा किया गया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, जिसमें सभी उपस्थित लोगों ने एक सुरक्षित, स्वस्थ और जागरूक समाज के निर्माण का संकल्प लिया।
यह कार्यक्रम न केवल स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ाने का माध्यम बना, बल्कि सड़क सुरक्षा और ‘वन हेल्थ’ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सामूहिक सोच और प्रयास की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन विषयों को जन-आंदोलन का रूप दिया जाए, तो आने वाले समय में एक स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त भारत का निर्माण संभव है।



