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दिवाली के बाद दिल्ली की वायु हुई जहरीली: एनसीआर से पहाड़ों तक छाई धुंध

The Hill India News
Last updated: October 21, 2025 2:24 am
The Hill India News
Published: October 21, 2025
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नई दिल्ली, 21 अक्टूबर: रोशनी के त्योहार दिवाली के बाद देश की राजधानी दिल्ली-एनसीआर एक बार फिर दमघोंटू धुंध की गिरफ्त में है। सोमवार की रात जमकर हुई आतिशबाज़ी के बाद मंगलवार की सुबह दिल्ली की हवा में जहर घुल गया। कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) खतरनाक 500 के पार पहुंच गया है, जिससे लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया है।

Contents
सुप्रीम कोर्ट की अनुमति और बढ़ता खतराधुएं की चादर में लिपटी राजधानीएनसीआर की हालत भी बेकाबूपहाड़ों तक पहुंचा प्रदूषण का असरसरकारी एजेंसियों की सतर्कता और चेतावनीहर साल वही कहानी — समाधान कब?जनता के लिए चेतावनी और सलाह

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, सुबह के समय दिल्ली का औसत AQI 470 दर्ज किया गया, जो वायु गुणवत्ता की सबसे खराब श्रेणी — “गंभीर (Severe)” — में आता है। दिल्ली के आनंद विहार, वजीरपुर, अशोक विहार और द्वारका जैसे इलाकों में हवा का प्रदूषण स्तर 400 से 450 के बीच दर्ज किया गया, जबकि कई जगहों पर यह मशीन की माप सीमा से भी ऊपर चला गया।


सुप्रीम कोर्ट की अनुमति और बढ़ता खतरा

इस साल दिवाली से पहले सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में सीमित पटाखे चलाने की अनुमति दी थी। प्रशासन ने उम्मीद जताई थी कि लोग “ग्रीन क्रैकर्स” का इस्तेमाल करेंगे, लेकिन ग्राउंड रियलिटी अलग रही। रातभर आसमान पटाखों की गूंज और धुएं से भर गया।
अब इसका सीधा असर दिल्ली की हवा पर दिख रहा है — न केवल दृश्यता घटी है, बल्कि अस्पतालों में सांस की समस्या और एलर्जी के मामले भी तेजी से बढ़ने लगे हैं।

लोक नायक अस्पताल के डॉक्टर अमित चौधरी बताते हैं —

“दिवाली के अगले दिन मरीजों की संख्या अचानक बढ़ जाती है। बुजुर्ग, बच्चे और अस्थमा से पीड़ित लोग सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं। प्रदूषण के कण फेफड़ों की झिल्ली को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे ऑक्सीजन का स्तर गिरता है।”


धुएं की चादर में लिपटी राजधानी

मंगलवार की सुबह दिल्ली के ऊपर गाढ़ा स्मॉग (धुएं और कोहरे का मिश्रण) छाया रहा। दृश्यता 300 मीटर तक सीमित हो गई, जिससे यातायात पर भी असर पड़ा। आईटीओ, लोधी रोड, चांदनी चौक और जहांगीरपुरी जैसे प्रमुख इलाकों में प्रदूषण का स्तर “बहुत खराब” से “गंभीर” श्रेणी में दर्ज किया गया।

दोपहर तक दिल्ली के 38 मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 31 स्टेशन ने हवा को “बहुत खराब” श्रेणी में बताया, जबकि तीन स्टेशन — आनंद विहार, द्वारका और वजीरपुर — ने ‘गंभीर’ स्थिति दर्ज की।

दिल्ली निवासी सुमन गुप्ता, जो आनंद विहार में रहती हैं, बताती हैं —

“सुबह आंखों में जलन और गले में खराश के साथ नींद खुली। घर से बाहर निकलते ही ऐसा लगा जैसे कोई धुएं का बादल सिर पर है। यह हर साल की कहानी बन चुकी है।”


एनसीआर की हालत भी बेकाबू

दिल्ली से सटे नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद की हवा भी लगभग समान रूप से प्रदूषित है।
नोएडा में सुबह 8 बजे AQI 365, जबकि गुरुग्राम में AQI 342 दर्ज किया गया।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, दिवाली की रात और उसके अगले 24 घंटों में PM 2.5 कणों का स्तर 20 गुना तक बढ़ा।


पहाड़ों तक पहुंचा प्रदूषण का असर

चौंकाने वाली बात यह है कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों की हवा भी इस बार साफ नहीं बची।
देहरादून में AQI 218 और नैनीताल में 164 दर्ज किया गया — जो सामान्य दिनों में 50 से कम रहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मैदानी इलाकों से उठे धुएं और मौसम की स्थिर हवाओं के कारण यह प्रदूषण पहाड़ों तक पहुंचा है।

पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. रीना सक्सेना कहती हैं —

“पश्चिमी विक्षोभ की अनुपस्थिति और हवा की रफ्तार बेहद कम होने से प्रदूषण नीचे जम गया है। इससे न केवल दिल्ली-एनसीआर, बल्कि आसपास के पहाड़ी क्षेत्र भी प्रभावित हो रहे हैं।”


सरकारी एजेंसियों की सतर्कता और चेतावनी

दिल्ली सरकार ने मंगलवार को ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का चौथा चरण लागू कर दिया है, जिसमें निर्माण कार्यों पर रोक, ट्रकों की एंट्री पर प्रतिबंध और स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाओं की सिफारिश शामिल है।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा —

“हमने हालात पर निगरानी बढ़ा दी है। लोगों से अपील है कि निजी वाहन कम से कम चलाएं और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें।”

उधर, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले दो दिनों में हवा की स्थिति ‘गंभीर प्लस’ श्रेणी में जा सकती है, क्योंकि हवा की दिशा में बदलाव की संभावना नहीं है।


हर साल वही कहानी — समाधान कब?

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कोई नया मुद्दा नहीं है। हर साल दिवाली के बाद हवा की सेहत बिगड़ती है, परंतु स्थायी समाधान अब तक नहीं निकला। विशेषज्ञों के मुताबिक, समस्या केवल पटाखों की नहीं — वाहनों का धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्यों की धूल और पराली जलाना भी इसके बड़े कारण हैं।

पर्यावरण कार्यकर्ता सुनिता नारायण के शब्दों में —

“दिल्ली की समस्या मौसमी नहीं, संरचनात्मक है। अगर ऊर्जा नीति, परिवहन व्यवस्था और कचरा प्रबंधन में सुधार नहीं हुआ तो हर साल यही हाल रहेगा।”


जनता के लिए चेतावनी और सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों को एन-95 मास्क पहनने, सुबह की वॉक से बचने और एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। विशेष रूप से बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं प्रदूषण से सर्वाधिक प्रभावित होती हैं, इसलिए सावधानी जरूरी है।

दिवाली की चमक अब धुएं की चादर में लिपटी दिल्ली के लिए चुनौती बन गई है। त्योहार की रात की खुशियां अब सुबह की खांसी और धुंधले आसमान में बदल गई हैं। प्रदूषण की यह समस्या केवल सरकार या अदालतों के आदेशों से खत्म नहीं होगी — जब तक जनता खुद जिम्मेदारी नहीं लेती, तब तक हर साल दिवाली के बाद दिल्ली इसी दमघोंटू धुंध में कैद होती रहेगी।

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