
देहरादून: राजधानी देहरादून की लाइफलाइन माने जाने वाले शिमला बायपास रोड पर धूल, गड्ढों और जाम से जूझती जनता के लिए बड़ी राहत की खबर है। जिलाधिकारी सविन बंसल के कड़े तेवरों और ‘एक्शन मोड’ के बाद विभागीय सुस्ती टूटी है और क्षतिग्रस्त मार्ग पर सड़क सुधारीकरण का कार्य युद्धस्तर पर प्रारंभ कर दिया गया है। जिला प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि जनमानस की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाली किसी भी कार्यदायी संस्था को बख्शा नहीं जाएगा।
शिकायतों का तत्काल संज्ञान: मौके पर पहुंचे मजिस्ट्रेट
पिछले कई दिनों से शिमला बायपास मार्ग पर की गई खुदाई के कारण आमजन को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा था। स्थानीय नागरिकों और राहगीरों द्वारा लगातार धूल के गुबार, जानलेवा गड्ढों और घंटों लंबे लगने वाले जाम की शिकायतें जिला प्रशासन तक पहुँच रही थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने तत्काल संज्ञान लिया और संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल कुमार को स्थलीय निरीक्षण के लिए मौके पर भेजा।
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) द्वारा बिजली की लाइनों के लिए सड़क की खुदाई की गई थी। खुदाई के बाद नियमानुसार मार्ग को पूर्ववत स्थिति में लाने (रेस्टोरेशन) के बजाय उसे वैसे ही छोड़ दिया गया, जिससे सड़क की सतह पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
‘रोड रेस्टोरेशन’ में लापरवाही पर विधिक एक्शन की चेतावनी
जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग (PWD) और निर्माण खंड को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनहित को प्राथमिकता देते हुए बिना किसी देरी के सड़क पुनर्स्थापन (Road Restoration) का कार्य शुरू किया जाए। उनके आदेश का असर यह हुआ कि कुछ ही घंटों के भीतर मौके पर मशीनें और मजदूर तैनात हो गए और मरम्मत का कार्य शुरू हो गया।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने विभागों को सख्त चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि:
“जनता की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि किसी भी विभाग या संस्था ने सड़क खोदकर उसे मानक के अनुरूप समय पर ठीक नहीं किया, तो उनके खिलाफ कठोर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अब केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम दिखना चाहिए।”
समस्त खुदाई अनुमतियां निरस्त: अब बिना परमिशन नहीं चलेगा बुलडोजर
देहरादून जिला प्रशासन ने सड़कों की बदहाली को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए पूर्व में दी गई सड़क खुदाई की समस्त अनुमतियों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। प्रशासन का मानना है कि निर्माण कार्य के नाम पर सड़कों को खोदकर महीनों तक छोड़ देने की प्रवृत्ति पर लगाम लगाना जरूरी है।
अब यदि कोई भी विभाग या निजी संस्था बिना नई अनुमति और ठोस रेस्टोरेशन प्लान के सड़क खुदाई करती पाई जाती है, तो उनके विरुद्ध एफआईआर (FIR) सहित अन्य कानूनी धाराओं में केस दर्ज किया जाएगा। जिला प्रशासन अब सार्वजनिक मार्गों की स्थिति पर ड्रोन और सीसीटीवी के माध्यम से भी सतत निगरानी रख रहा है।
धूल और जाम से मिलेगी मुक्ति
शिमला बायपास मार्ग पर निर्माण कार्य शुरू होने से क्षेत्र के व्यापारियों और स्थानीय निवासियों ने राहत की सांस ली है। इस मार्ग पर उड़ने वाली धूल के कारण न केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो रही थीं, बल्कि दृश्यता कम होने से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बना हुआ था। जिलाधिकारी के निर्देशानुसार, रेस्टोरेशन कार्य को निर्धारित मानकों (Bituminous works) के अनुरूप पूरा किया जा रहा है ताकि सड़क दोबारा जल्दी न टूटे।
जवाबदेही तय: सुस्ती पर गिरेगी गाज
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि भविष्य में किसी भी खुदाई के पश्चात ‘टाइमलाइन’ का पालन अनिवार्य होगा। निर्माण खंड के अधिकारियों को स्वयं मौके पर उपस्थित रहकर गुणवत्ता की जांच करने को कहा गया है। प्रशासन की इस सख्ती से अन्य विभागों जैसे पेयजल निगम और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से जुड़ी कार्यदायी संस्थाओं में भी हड़कंप मचा हुआ है।



