
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी के नगर निकाय प्रशासन ने शासन और निगम की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से एक कड़ा कदम उठाया है। देहरादून नगर निगम ने अपने विभिन्न विभागों में तैनात आउटसोर्स कर्मचारियों की समीक्षा के बाद 56 कर्मियों को सेवा से मुक्त करने की तैयारी पूरी कर ली है। यह निर्णय निगम के वित्तीय प्रबंधन को सुधारने और उन कर्मचारियों की छंटनी करने के लिए लिया गया है जो या तो अनावश्यक रूप से वेतन ले रहे थे या अपनी सेवाएं निगम के बजाय अन्य स्थानों पर दे रहे थे।
कार्य मूल्यांकन और अनियमितताओं पर प्रहार
नगर निगम प्रशासन द्वारा हाल ही में की गई विस्तृत समीक्षा में चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। वर्तमान में निगम के अंतर्गत कुल 363 आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें 140 सफाई कर्मचारी हैं, जबकि शेष डाटा एंट्री ऑपरेटर और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी हैं।
जांच में पाया गया कि कई कर्मचारी नगर निगम के पेरोल पर होने के बावजूद निजी आवासों और अन्य सरकारी कार्यालयों में सेवाएं दे रहे थे। नगर आयुक्त नमामि बंसल के नेतृत्व में हुई इस समीक्षा का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जनता के टैक्स का पैसा केवल जनहित के कार्यों में ही व्यय हो।
कहां-कहां से हटाए जा रहे हैं कर्मचारी? (विस्तृत सूची)
प्रशासन द्वारा तैयार की गई सूची के अनुसार, उन कर्मचारियों पर गाज गिरी है जो रसूखदारों के आवासों या अन्य विभागों में संबद्ध थे। विवरण इस प्रकार है:
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निजी आवास और निदेशालय: शासन के एक बड़े अफसर और पूर्व नगर आयुक्त के आवास पर तैनात कर्मचारियों को हटाया जाएगा। साथ ही, शहरी विकास निदेशालय में सेवाएं दे रहे 7 कर्मचारियों की भी छुट्टी होगी।
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विभागवार कटौती: * लोक निर्माण अनुभाग: 12 कर्मचारी
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भूमि अनुभाग: 08 कर्मचारी
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जोनल कार्यालय: 05 कर्मचारी
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टैक्स और वर्कशॉप अनुभाग: 4-4 कर्मचारी
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ईंधन स्टोर: 03 कर्मचारी
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विधि, स्वास्थ्य और रिकॉर्ड अनुभाग: 2-2 कर्मचारी
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राजनीतिक दखल: एक राजनीतिक दल के कार्यालय में तैनात कर्मचारी को भी हटाने की सूची में शामिल किया गया है।
वित्तीय भार और आउटसोर्सिंग का गणित
नगर निगम देहरादून वर्तमान में आरके एसोसिएट्स नामक अनुबंधित फर्म के माध्यम से इन कर्मचारियों की सेवाएं ले रहा है। इन कर्मचारियों को पदानुसार 12,000 रुपये से लेकर 20,000 रुपये तक मासिक वेतन दिया जाता है। आंकड़ों के अनुसार, निगम हर महीने लगभग 800 (कुल श्रेणी) कर्मचारियों के वेतन पर 85 लाख रुपये का भारी-भरकम बजट खर्च करता है। इस छंटनी से निगम को न केवल वित्तीय राहत मिलेगी, बल्कि कार्यक्षमता में भी सुधार होगा।
पिछली विफलताओं से लिया सबक
यह पहली बार नहीं है जब निगम ने कर्मचारियों को हटाने का प्रयास किया हो। करीब डेढ़ साल पहले भी 90 आउटसोर्स कर्मचारियों को हटाने की योजना बनी थी, लेकिन उस समय भारी राजनीतिक दबाव के चलते प्रशासन को अपने कदम पीछे खींचने पड़े थे। हालांकि, इस बार नगर आयुक्त ने स्पष्ट कर दिया है कि प्राथमिकता केवल निगम की आवश्यकता और कार्य कुशलता है।
नई भर्ती और पार्कों के रखरखाव पर ध्यान
नगर आयुक्त नमामि बंसल ने इस प्रशासनिक निर्णय को ‘संसाधन पुनर्आवंटन’ (Resource Reallocation) का नाम दिया है। उनके अनुसार:
“पिछले एक वर्ष में शहर में कई नए पार्कों का निर्माण किया गया है, जिनके उचित रखरखाव के लिए हमें अतिरिक्त मैनपावर की आवश्यकता है। हम उन अनुभागों से कर्मचारी हटा रहे हैं जहां उनकी जरूरत नहीं है, ताकि उन्हें पार्कों और अन्य आवश्यक जनसेवाओं में तैनात किया जा सके। आउटसोर्स फर्म को नई जरूरत के हिसाब से भर्ती के निर्देश भी दिए गए हैं।”
रिक्त पदों की चुनौती बरकरार
एक तरफ जहां अनावश्यक कर्मचारियों को हटाया जा रहा है, वहीं निगम के मुख्य ढांचों में अधिकारियों की भारी कमी है। लोक निर्माण अनुभाग में अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता के पद खाली पड़े हैं। भूमि अनुभाग में पटवारियों की कमी है, तो स्वास्थ्य विभाग में पर्याप्त सफाई इंस्पेक्टर नहीं हैं। कर अनुभाग (Tax Section) में भी टैक्स इंस्पेक्टरों की कमी के कारण राजस्व वसूली प्रभावित हो रही है।
पारदर्शिता की ओर बढ़ता कदम
देहरादून नगर निगम का यह फैसला अन्य निकायों के लिए एक नजीर बन सकता है। “काम नहीं तो वेतन नहीं” और “सही काम के लिए सही व्यक्ति” के सिद्धांत पर चलते हुए प्रशासन ने यह साफ कर दिया है कि सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह प्रक्रिया बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के पूरी हो पाती है या नहीं।



