
देहरादून, 29 नवंबर 2025 | देशभर में ऋण बीमा की अनियमितताओं, बैंकिंग दबाव और वसूली एजेंसियों द्वारा उत्पीड़न के बढ़ते मामलों के बीच देहरादून जिला प्रशासन की एक बड़ी कार्रवाई सुर्खियों में है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने एचडीएफसी एरगो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड पर बड़ा दंडात्मक एक्शन लेते हुए ₹8,11,709 की रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) जारी की है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि कंपनी को 5 दिन के भीतर बीमित ऋण की माफी सुनिश्चित करनी होगी, अन्यथा प्रशासन सम्पत्ति कुर्क कर नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर देगा।
मामला एक विधवा सुप्रिया नौटियाल और उनकी 9 वर्षीय मासूम बेटी से जुड़ा है, जिनके पति की मृत्यु के बाद भी बीमा के बावजूद उन पर कर्ज़ चुकाने का दबाव बनाया जा रहा था। यह कार्रवाई अब उन सभी संस्थानों के लिए चेतावनी मानी जा रही है, जो बीमा प्रावधानों के बावजूद उपभोक्ताओं को प्रताड़ित करते हैं।
पति की मौत के बाद भी वसूली का दबाव—विधवा सुप्रिया की दहला देने वाली गुहार
फरियादिनी सुप्रिया नौटियाल, पत्नी स्व. प्रदीप रतूड़ी, 15 नवंबर 2025 को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचीं। वहां उनके आंसुओं और पीड़ा ने प्रशासन को झकझोर दिया।
सुप्रिया ने बताया कि—
- उनके पति प्रदीप रतूड़ी ने वाहन खरीदने के लिए HDFC ERGO GIC Ltd. से ₹8,11,709 का वाहन ऋण लिया था।
- कंपनी ने बताया कि आईआरडीए के दिशा-निर्देशों के तहत ऋण बीमा अनिवार्य है, और उनके पति का बीमा पॉलिसी क्रमांक—
- CI 24-14680
- सर्व सुरक्षा प्लस क्लेम नं.: RR-CI 24-14680891
के तहत किया गया।
- लेकिन बीमा दस्तावेज कभी उन्हें भेजे ही नहीं गए।
- पति की अकाल मृत्यु के बाद बैंक ने सुप्रिया पर कर्ज चुकाने का दबाव बढ़ा दिया।
- वसूली एजेंटों से फोन पर धमकियाँ दी गईं कि “लोन नहीं चुकाया तो वाहन उठा लिया जाएगा।”
एक अकेली, पीड़ित माँ, और 9 साल की बच्ची के सामने ऐसी स्थिति किसी भी परिवार को तोड़ देने वाली है।
बीमा के बावजूद उत्पीड़न – प्रशासन ने माना गंभीर लापरवाही
जांच में पाया गया कि—
- ऋण पर बीमा सक्रिय था।
- बीमा प्रीमियम समय पर काटा गया।
- लेकिन कंपनी ने क्लेम प्रक्रिया लागू नहीं की और न ही दस्तावेज उपलब्ध कराए।
- इसके बावजूद वसूली जारी रखी गई, जो न केवल नियमों के खिलाफ बल्कि उपभोक्ता अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।
जिलाधिकारी ने मामले को गंभीर “इंश्योरेंस फ्रॉड” माना और त्वरित कार्रवाई का आदेश दिया।
**डीएम का सख्त आदेश:
“पांच दिन में ऋण माफी करो, नहीं तो कुर्की-नीलामी होगी”**
जिलाधिकारी ने HDFC ERGO के खिलाफ ₹8.11 लाख की आरसी जारी करते हुए स्पष्ट कहा कि—
“बीमित ऋण पर वसूली करना सीधा उत्पीड़न है। पीड़ित परिवार को राहत देना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि कंपनी पांच दिन में ऋण माफ नहीं करती तो वसूली राजस्व बकाया की तरह की जाएगी और आवश्यक होने पर संपत्ति कुर्क कर नीलामी की जाएगी।”
यह आदेश तहसीलदार सदर को भेजा गया है, जिसे राजस्व वसूली प्रक्रिया की तरह लागू किया जाएगा।
बैंकों और बीमा कंपनियों में हड़कंप – कई संस्थान DM के रडार पर
यह पहला मामला नहीं है। जिलाधिकारी ने पुष्टि की है कि—
- “कई बैंक और बीमा कंपनियाँ पहले से DM ऑफिस के रडार पर हैं।”
- ऋण बीमा के बावजूद वसूली करने वाली संस्थाओं पर शून्य सहनशीलता नीति अपनाई जा रही है।
- कुछ मामलों में प्रशासन पहले ही कुर्की, शाखा सीलिंग, और दंडात्मक कार्रवाई कर चुका है।
राष्ट्रीय स्तर पर यह घटना यह संकेत देती है कि आने वाले समय में भारत के विभिन्न जिलों में ऐसी शिकायतें उठ सकती हैं और प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो सकती है।
देशभर में बढ़ रही बीमा धोखाधड़ी और वसूली आतंक की शिकायतें
राष्ट्रीय स्तर पर बीते दो वर्षों में—
- ऋण बीमा सक्रिय होने के बावजूद वसूली,
- बीमा दस्तावेज न देना,
- क्लेम अस्वीकृत करना,
- विधवा, वरिष्ठ नागरिकों और छोटे उपभोक्ताओं को धमकियाँ देना,
जैसी शिकायतों में तेज़ी आई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि “डिजिटलीकरण के बाद बीमा की बिक्री तो बढ़ी है, पर पारदर्शिता का स्तर उलटा गिर गया है।”
सुप्रिया और उनकी 9 साल की बेटी को मिली बड़ी राहत; समाज में संदेश – अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
जिलाधिकारी की इस कार्रवाई के बाद सुप्रिया नौटियाल को राहत मिली है। अब उनके कंधों से वह भारी बोझ हटेगा जिसे बीमा कंपनी ने गलत तरीके से थोप रखा था।
यह फैसला सामाजिक, प्रशासनिक और मानवीय स्तर पर एक मजबूत संदेश भी देता है कि—
- नियमों की अनदेखी करने पर बड़ी से बड़ी कंपनियाँ भी कार्रवाई से नहीं बचेंगी,
- और आम जनता, विशेषकर विधवा, गरीब, असहाय और छोटे उपभोक्ता, अकेले नहीं हैं।
आगे क्या?
एचडीएफसी एरगो को अब—
- 5 दिन के भीतर सुप्रिया के पति का पूरा ऋण बीमा के तहत समाप्त करना होगा।
- प्रशासन को विस्तृत रिपोर्ट भेजनी होगी।
- अन्य पीड़ितों की शिकायतों पर भी जवाब देना होगा।
यदि कंपनी कार्रवाई नहीं करती तो प्रशासन सीधा—
- बैंक खातों की कुर्की,
- शाखा सीलिंग,
- संपत्ति की नीलामी
जैसी प्रक्रियाएँ शुरू कर देगा।
निष्कर्ष
देहरादून प्रशासन की यह कार्रवाई राष्ट्रीय स्तर पर एक मिसाल बन सकती है। ऋण बीमा धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों और बैंकों की मनमानी पर लगाम लगाने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम है।
एक विधवा माँ और उसकी मासूम बच्ची के लिए यह सिर्फ राहत नहीं, बल्कि न्याय की जीत है।और उन countless उपभोक्ताओं के लिए संदेश है कि—“अन्याय के खिलाफ आवाज उठाओ, प्रशासन आपके साथ है।”



