
देहरादून, 30 जनवरी 2026: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून को ‘ड्रग फ्री’ बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने निर्णायक युद्ध छेड़ दिया है। जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में शुक्रवार को ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित ‘एन्कॉर्ड’ (NCORD) की जनपद स्तरीय बैठक में नशे के सौदागरों और अवैध केंद्रों के खिलाफ बड़े फैसलों पर मुहर लगी। डीएम ने स्पष्ट कर दिया है कि जिले में केवल वही केंद्र चलेंगे जो मानकों पर खरे उतरेंगे; कागजों में चल रहे फर्जी नशामुक्ति केंद्रों के दिन अब लद चुके हैं।
रंग ला रही है सरकारी पहल: रायवाला केंद्र से मुख्यधारा में लौटे 7 व्यक्ति
जिला प्रशासन के प्रयासों का सकारात्मक असर धरातल पर दिखने लगा है। रायवाला स्थित ओल्ड एज होम परिसर में संचालित जनपद के प्रथम राजकीय नशा मुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य केंद्र ने सफलता की नई इबारत लिखी है। वर्तमान में यह केंद्र अपनी पूरी क्षमता के साथ संचालित है, जहाँ ड्रग एडिक्ट्स का वैज्ञानिक पद्धति और प्रोफेशनल काउंसलिंग के जरिए उपचार किया जा रहा है।
अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि इस केंद्र से अब तक 7 व्यक्ति पूरी तरह नशामुक्त होकर समाज की मुख्यधारा में लौट चुके हैं। डीएम ने निर्देश दिए कि ठीक होकर बाहर निकलने वाले व्यक्तियों की ‘फॉलो-अप काउंसलिंग’ निरंतर जारी रखी जाए, ताकि वे दोबारा इस दलदल में न फंसें।
एम्स ऋषिकेश के साथ एमओयू: गंभीर मरीजों को मिलेगा उच्चस्तरीय उपचार
नशे की गंभीर लत से जूझ रहे व्यक्तियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए एम्स ऋषिकेश के साथ एमओयू (MoU) किया है। इसके तहत एम्स में 7 दिनों के लिए 10 बेड विशेष रूप से ‘इंटेंसिव थेरेपी’ हेतु आरक्षित किए गए हैं। यह व्यवस्था उन मरीजों के लिए जीवनदान साबित होगी जिन्हें तत्काल और गहन डॉक्टरी निगरानी की आवश्यकता होती है।
फर्जी केंद्रों पर ‘डिजिटल स्ट्राइक’ और सीलिंग की तैयारी
बैठक के दौरान जिलाधिकारी सविन बंसल का कड़ा रुख उन केंद्रों पर दिखा जो बिना पंजीकरण या मानकों के विरुद्ध संचालित हो रहे हैं। डीएम ने ड्रग इंस्पेक्टर और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि:
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जनपद के समस्त नशामुक्ति केंद्रों की सघन छापेमारी की जाए।
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मानकों का उल्लंघन करने वाले केंद्रों का पंजीकरण तुरंत रद्द कर उन्हें सील किया जाए।
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‘कागजों’ पर चल रहे केंद्रों की रिपोर्ट शासन को भेजकर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
स्कूलों में ‘एंटी ड्रग कमेटियां’: छात्र खुद करेंगे नशे की निगरानी
भावी पीढ़ी को सुरक्षित करने के लिए जिला प्रशासन ने जिले के प्रत्येक स्कूल और कॉलेज में छात्र-छात्राओं की भागीदारी वाली एंटी ड्रग कमेटियां सक्रिय कर दी हैं। ये कमेटियां सीधे उप जिलाधिकारी (SDM) और पुलिस क्षेत्राधिकारी के संपर्क में रहेंगी।
नशे के खिलाफ नई घेराबंदी:
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रैंडम ड्रग टेस्टिंग: उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की नियमित रैंडम ड्रग टेस्टिंग की जाएगी।
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सीसीटीवी अनिवार्य: समस्त शिक्षण संस्थानों, होटलों, कैफे, पीजी और यहाँ तक कि मेडिकल स्टोर्स पर भी सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
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प्रारंभिक शिक्षा: नर्सरी और छोटी कक्षाओं के बच्चों को कहानियों और काउंसलिंग के माध्यम से नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
पुलिस की ‘ड्राइव’ और मानस हेल्पलाइन 1933 का प्रचार
पुलिस क्षेत्राधिकारी ने बैठक में बताया कि अब केवल चालान काटना ही उद्देश्य नहीं है। सड़क पर बिना हेलमेट, ओवर-स्पीड या ट्रिपल राइडिंग करते पकड़े जाने वाले युवाओं की मौके पर ही ‘ड्रग टेस्टिंग’ भी की जा रही है।
डीएम ने केंद्रीयकृत मानस हेल्पलाइन नंबर 1933 और जिला प्रशासन के एंटी-ड्रग नंबर 9625777399 का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने समाज कल्याण अधिकारी और मुख्य शिक्षा अधिकारी को आदेश दिया कि इन नंबरों को सार्वजनिक स्थलों और स्कूलों के नोटिस बोर्ड पर अनिवार्य रूप से चस्पा किया जाए।
सप्लाई चेन तोड़ने के लिए 10 साल के डेटा का विश्लेषण
मादक पदार्थों की डिमांड और सप्लाई चेन को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए डीएम ने एएनटीएफ (ANTF), एसटीएफ, एनसीबी और औषधि नियंत्रक एजेंसियों को मिलकर काम करने को कहा है। उन्होंने पिछले 10 वर्षों के नार्कोटिक्स नेटवर्क का विश्लेषण कर मुख्य सप्लायरों और उनके नेटवर्क ‘लिंकेज’ को चिन्हित कर उन पर प्रभावी प्रहार करने के निर्देश दिए।
एक सामूहिक जिम्मेदारी
जिलाधिकारी सविन बंसल ने बैठक के अंत में भावुक अपील करते हुए कहा कि नशामुक्त देहरादून का लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसमें अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के हर वर्ग को ‘वॉचडॉग’ की भूमिका निभानी होगी। प्रशासन की सख्ती और समाज की संवेदनशीलता मिलकर ही युवाओं के भविष्य को सुरक्षित कर सकती है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में एसडीएम सदर हरिगिरि, सीओ अंकित कंडारी, सीएमओ डॉ. मनोज कुमार और अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि ऋषिकेश और विकासनगर के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े।



