
देहरादून, 18 फरवरी 2026: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर ‘निजी स्वार्थ’ का खेल खेलने वालों के खिलाफ जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। जिलाधिकारी सविन बंसल के सख्त रुख के बाद सीएचसी रायपुर (CHC Raipur) परिसर में संचालित प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र और उसके ठीक बगल में स्थित निजी मेडिकल स्टोर ‘मै० रावत मेडिकोज’ दोनों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं।
प्रशासन की इस कार्रवाई से जिले के दवा माफियाओं में हड़कंप मच गया है। जांच में सामने आया कि एक ही व्यक्ति विशेष द्वारा सरकारी योजना को पंगु बनाकर मरीजों को महंगी दवाइयां खरीदने के लिए विवश किया जा रहा था।
जनता दर्शन से शुरू हुई जांच की आंच
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब गत 04 दिसंबर 2025 को जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में आयोजित ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम में एक गंभीर शिकायत प्राप्त हुई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) रायपुर स्थित जन औषधि केंद्र पर दवाइयां जानबूझकर उपलब्ध नहीं कराई जातीं, ताकि मरीजों को पास ही स्थित निजी स्टोर से महंगी दवाइयां खरीदने पर मजबूर किया जा सके।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल कुमार और वरिष्ठ औषधि निरीक्षक की एक संयुक्त टीम गठित कर गुप्त और स्थलीय जांच के आदेश दिए थे।
हितों का टकराव: जन औषधि को बनाया ‘शोपीस’
संयुक्त मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में पाया गया कि जन औषधि केंद्र के संचालक बलवीर सिंह रावत द्वारा न केवल अस्पताल परिसर के भीतर सरकारी केंद्र चलाया जा रहा था, बल्कि उससे मात्र 25 मीटर की दूरी पर ‘मै० रावत मेडिकोज’ नाम से अपना निजी मेडिकल स्टोर भी संचालित किया जा रहा था।
यह सीधे तौर पर ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) का मामला था। संचालक ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत जन औषधि केंद्र को निष्क्रिय कर दिया था। सरकारी केंद्र पर सस्ती जेनेरिक दवाओं का स्टॉक खत्म रखा जाता था, जिससे बेबस जनमानस को निजी स्टोर से एमआरपी पर महंगी दवाएं लेने के लिए विवश होना पड़ता था।
तकनीकी धोखाधड़ी और फर्जी घोषणाएं
जांच टीम ने जब तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं को खंगाला, तो अनियमितताओं का अंबार मिला:
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सॉफ्टवेयर का उल्लंघन: दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए PMBI के आधिकारिक सॉफ्टवेयर का वर्षों से उपयोग नहीं किया गया। सारा कामकाज ‘मैनुअल’ बिलिंग के जरिए किया जा रहा था ताकि स्टॉक की पारदर्शिता को छुपाया जा सके।
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व्हाट्सएप से मांग: दवाओं की आधिकारिक मांग पोर्टल के बजाय अनौपचारिक रूप से व्हाट्सएप के माध्यम से की जा रही थी, जो सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन है।
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झूठे दस्तावेज: लाइसेंस नवीनीकरण के लिए एक ही रेफ्रिजरेटर के बिल का उपयोग दोनों दुकानों के लिए किया गया। साथ ही, एसी (Air Conditioner) की क्रियाशीलता के संबंध में गलत घोषणाएं की गईं।
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समाप्त अनुबंध: केंद्र के संचालन हेतु किरायानामा अनुबंध की अवधि समाप्त हो चुकी थी, लेकिन संचालक ने अद्यतन दस्तावेज अपलोड नहीं किए थे।
प्रशासन का कड़ा संदेश: “किसी को बख्शा नहीं जाएगा”
वरिष्ठ औषधि निरीक्षक की संस्तुति पर जिला प्रशासन ने दोनों स्टोर के औषधि विक्रय लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं। जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट किया है कि देहरादून जिला प्रशासन जनहित में सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
“सरकारी योजनाओं का लाभ गरीब मरीजों तक पहुँचाना हमारी प्राथमिकता है। यदि कोई संचालक निजी लाभ के लिए सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करेगा और मरीजों को लूटने का प्रयास करेगा, तो उसके खिलाफ इसी तरह की कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।” — सविन बंसल, जिलाधिकारी देहरादून
दवा माफियाओं पर डिजिटल और ऑन-ग्राउंड स्ट्राइक
यह कार्रवाई केवल एक केंद्र तक सीमित नहीं है। जिला प्रशासन अब जिले के अन्य सरकारी अस्पतालों में चल रहे जन औषधि केंद्रों की भी जांच करवाने की तैयारी में है। विशेष रूप से उन केंद्रों की सूची तैयार की जा रही है जिनके संचालकों के पास निजी मेडिकल स्टोर भी हैं।
कार्रवाई के मुख्य बिंदु:
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सीएचसी रायपुर जन औषधि केंद्र का लाइसेंस रद्द।
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मै० रावत मेडिकोज का लाइसेंस निरस्त।
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स्टॉक पंजिका और इन्वेंट्री में भारी विसंगतियां पाई गईं।
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भविष्य में सख्त निगरानी के लिए नई गाइडलाइंस जारी।
देहरादून जिला सूचना अधिकारी के माध्यम से जारी इस रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि राजधानी में स्वास्थ्य क्षेत्र में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। बलवीर सिंह रावत पर हुई यह कार्रवाई अन्य संचालकों के लिए एक कड़ी चेतावनी है। जनता ने इस निर्णय का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि अब सीएचसी रायपुर में दवाइयों की उपलब्धता पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित होगी।



