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देहरादून में पार्षद के 5 वर्षीय बेटे पर कुत्ते छोड़ने का आरोप, छह अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सार्वजनिक स्थानों पर पालतू कुत्तों को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। ताज़ा मामला थाना रायपुर क्षेत्र के खुदानेवाला सहस्त्रधारा रोड का है, जहां एक पार्षद के पांच वर्षीय बेटे पर कथित तौर पर कुत्ते छोड़ने और विरोध करने पर पार्षद व उनकी पत्नी के साथ गाली-गलौज व मारपीट करने का गंभीर आरोप सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में चार अज्ञात महिलाओं और दो अज्ञात पुरुषों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मामला 19 जनवरी की शाम का बताया जा रहा है। खुदानेवाला सहस्त्रधारा रोड से पार्षद संजीत कुमार बंसल ने थाना रायपुर में दी गई शिकायत में बताया कि उनकी पत्नी उस दिन शाम के समय अपने पांच साल के बेटे को टहलाने के लिए घर से बाहर निकली थीं। जब वे माता वाला पार्क के पास पहुंचीं, तो वहां पहले से मौजूद चार महिलाएं और दो पुरुष अपने दो पालतू कुत्तों को घुमा रहे थे।

आरोप है कि जैसे ही बच्चा पार्क के पास पहुंचा, कुत्तों ने उस पर जोर-जोर से भौंकना शुरू कर दिया। इससे बच्चा डर गया। पार्षद की पत्नी ने इस पर आपत्ति जताते हुए सार्वजनिक स्थान पर बिना नियंत्रण के कुत्ते घुमाने का विरोध किया। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते उग्र हो गई।

हाथापाई और मारपीट के आरोप

शिकायत में बताया गया है कि बहस के दौरान आरोपियों ने पार्षद की पत्नी के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी और मामला हाथापाई तक पहुंच गया। पार्षद की पत्नी का आरोप है कि इसी दौरान आरोपियों ने जानबूझकर बच्चे की ओर कुत्ते छोड़ दिए। हालांकि गनीमत रही कि बच्चे को कोई शारीरिक नुकसान नहीं हुआ। शोर-शराबा सुनकर आसपास के ग्रामीण और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और बीच-बचाव कर किसी तरह स्थिति को शांत कराया।

घटना की सूचना मिलने पर पार्षद संजीत कुमार बंसल भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने आरोपियों से सार्वजनिक स्थान पर कुत्ते घुमाने और उनकी पत्नी व बच्चे के साथ अभद्रता करने का कारण पूछा। आरोप है कि इसके बाद आरोपियों ने पार्षद के साथ भी बदसलूकी की और मारपीट शुरू कर दी।

पुलिस जांच में क्या सामने आया

थाना रायपुर प्रभारी गिरीश नेगी ने बताया कि पार्षद की शिकायत के आधार पर मामले की जांच की गई। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि कुत्ते के काटने की कोई पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन चार महिलाओं और दो पुरुषों द्वारा पार्षद और उनकी पत्नी के साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई थी।

उन्होंने बताया कि इस आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। साथ ही प्रत्यक्षदर्शियों से भी पूछताछ की जा रही है।

नगर निगम के नियमों के बावजूद बढ़ रहे मामले

देहरादून नगर निगम द्वारा पालतू कुत्तों को लेकर नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए समय-समय पर सख्ती बरती जा रही है। निगम की ओर से बिना पट्टा (लीश) और बिना सुरक्षा उपायों के कुत्ते घुमाने पर चालान की कार्रवाई भी की जा रही है। इसके बावजूद शहर में इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे आम लोगों में भय और नाराजगी दोनों बढ़ रही है।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

यह पहला मामला नहीं है। कुछ दिन पहले पटेल नगर क्षेत्र में एक अधिवक्ता ने अपने घर के बाहर कुत्ता घुमा रहे लोगों का विरोध किया था, जिस पर आरोपियों ने उसके साथ मारपीट करते हुए कुत्ता छोड़ दिया था। वहीं राजपुर रोड पर एक टेंपो चालक पर भी पालतू कुत्ता छोड़ने की घटना सामने आ चुकी है। इन घटनाओं ने शहर में पालतू जानवरों को लेकर नियमों और नागरिक जिम्मेदारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सार्वजनिक सुरक्षा बनाम लापरवाही

विशेषज्ञों का मानना है कि पालतू जानवरों को लेकर लापरवाही न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन रही है, बल्कि बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर रही है। सार्वजनिक स्थानों पर पालतू कुत्तों को नियंत्रित रखना मालिकों की जिम्मेदारी है, लेकिन नियमों की अनदेखी लगातार विवाद और हिंसक घटनाओं को जन्म दे रही है।

फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी हुई है। आरोपियों की पहचान के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि शहरों में पालतू जानवरों और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

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