
देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत के लिए सजधज कर तैयार हो रही है। आगामी 14 अप्रैल 2026 को राजधानी देहरादून में प्रस्तावित प्रधानमंत्री के भव्य कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को गढ़ी कैंट स्थित जसवंत ग्राउंड पहुंचकर आयोजन की तैयारियों का धरातलीय निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री का आगमन राज्य के लिए गौरव का विषय है, इसलिए व्यवस्थाओं में किसी भी स्तर पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी।
ग्राउंड जीरो पर पहुंचे मुख्यमंत्री: एक-एक व्यवस्था की खुद की समीक्षा
सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अचानक जसवंत ग्राउंड पहुंचे, जहां उन्होंने घंटों रहकर व्यवस्थाओं का गहन अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल के प्रवेश और निकास द्वारों से लेकर मंच की ऊंचाई, दर्शक दीर्घा की क्षमता और वीआईपी मूवमेंट के रूट मैप को बारीकी से समझा।
उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से कहा कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में भारी जनसैलाब उमड़ने की संभावना है, लिहाजा आम जनता की सुविधा और सुरक्षा के बीच एक बेहतर समन्वय होना अनिवार्य है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आयोजन स्थल पर धूप और गर्मी को देखते हुए पर्याप्त पेयजल और छाया की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
सुरक्षा का अभेद्य चक्र: विभिन्न एजेंसियों को समन्वय के निर्देश
प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल ब्रीफिंग की। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था में लगी विभिन्न एजेंसियों (एसपीजी, स्थानीय पुलिस और खुफिया विभाग) के बीच समन्वित कार्यप्रणाली अपनाने पर जोर दिया।
“सुरक्षा प्रबंधन में कोई भी ढील स्वीकार्य नहीं होगी। हर एजेंसी को एक टीम की तरह काम करना होगा। इसके साथ ही हमें यह भी सुनिश्चित करना है कि सुरक्षा के सख्त इंतजामों के बीच आम जनता को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।” — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी आपात स्थिति (Emergency) से निपटने के लिए आयोजन स्थल के समीप मेडिकल टीम और फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ ‘स्टैंडबाय’ मोड पर रहेंगी।
ट्रैफिक और पार्किंग: शहरवासियों को न हो असुविधा
राजधानी देहरादून की सबसे बड़ी चुनौती ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर रहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देहरादून दौरा को देखते हुए मुख्यमंत्री ने पुलिस प्रशासन को एक ‘ठोस कार्ययोजना’ बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गढ़ी कैंट और उसके आसपास के क्षेत्रों के लिए डायवर्जन प्लान इस तरह बनाया जाए कि स्थानीय निवासियों और दफ्तर जाने वाले लोगों को न्यूनतम असुविधा हो। पार्किंग के लिए बड़े मैदानों को चिन्हित कर वहां सुचारू व्यवस्था बनाने के आदेश भी दिए गए।
स्वच्छता और सौंदर्यीकरण: गरिमामय होगा आयोजन
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम की गरिमा के अनुरूप शहर और कार्यक्रम स्थल के सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने नगर निगम और संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि गढ़ी कैंट जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों की सफाई और मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर पूरा किया जाए। दीवारों पर उत्तराखंड की संस्कृति को दर्शाती पेंटिंग्स और डिवाइडर्स पर फूलों की सजावट करने के निर्देश दिए गए, ताकि प्रधानमंत्री का स्वागत देवभूमि की सांस्कृतिक विरासत के साथ किया जा सके।
समयसीमा के भीतर गुणवत्ता का संकल्प
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से समझौता न करने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पेयजल आपूर्ति, विद्युत व्यवस्था (Back-up Power) और स्वच्छता से जुड़े सभी इंतजाम निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण कर लिए जाएं। मुख्यमंत्री ने जसवंत ग्राउंड के मंच और दर्शक दीर्घा के लेआउट को देखते हुए निर्देश दिए कि बैठने की व्यवस्था इस तरह हो कि हर कोने से प्रधानमंत्री को स्पष्ट रूप से देखा और सुना जा सके।
प्रशासनिक अमला रहा मौजूद
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री के साथ शासन और प्रशासन के आला अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें:
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गढ़वाल आयुक्त: विनय शंकर पाण्डेय
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आईजी: राजीव स्वरूप
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जिलाधिकारी: सविन बंसल
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एसएसपी: प्रमेन्द्र डोभाल
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अपर सचिव: बंशीधर तिवारी
इन सभी अधिकारियों को मुख्यमंत्री ने क्षेत्रवार जिम्मेदारियां सौंपी हैं और प्रतिदिन की प्रगति रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को भेजने के निर्देश दिए हैं।
उत्तराखंड के लिए महत्वपूर्ण अवसर
प्रधानमंत्री मोदी का उत्तराखंड से गहरा लगाव किसी से छिपा नहीं है। 14 अप्रैल का यह दौरा न केवल राजनीतिक दृष्टि से बल्कि राज्य की विकास योजनाओं की घोषणाओं के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री धामी की इस सक्रियता ने यह संदेश दे दिया है कि सरकार इस आयोजन को भव्य और त्रुटिहीन बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। अब देखना यह है कि प्रशासनिक मशीनरी मुख्यमंत्री की इस ‘डेडलाइन’ पर कितनी खरी उतरती है।



