
नई दिल्ली, 28 नवंबर। बंगाल की खाड़ी में विकसित हुआ भीषण चक्रवात ‘दित्वा (Ditwah Cyclone)’ तेज़ी से समुद्री क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है और इसका प्रभाव अब पड़ोसी देश श्रीलंका से भारत के दक्षिणी राज्यों तक फैलता दिख रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले 48 घंटों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए तमिलनाडु और पुडुचेरी में भारी से बहुत भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है।
इस चक्रवाती तूफान की रफ्तार और दिशा पर लगातार नज़र रखी जा रही है, जबकि तटीय राज्यों में प्रशासन हाई-अलर्ट पर है।
श्रीलंका में भारी तबाही—बुधवार शाम से मूसलाधार बारिश और तेज़ हवाएं
चक्रवात दित्वा फिलहाल श्रीलंका के तटीय हिस्सों पर केंद्रित है, जहां बुधवार से तेज़ बारिश, आंधी और समुद्री उफान के कारण कई इलाकों में जलभराव हो चुका है।
स्थानीय आपदा प्रबंधन एजेंसियों के अनुसार—
- कई घरों को नुकसान
- बिजली आपूर्ति बाधित
- समुद्री तटों पर ऊंची लहरें
- कई इलाकों में परिवहन प्रभावित
चक्रवात के असर से श्रीलंका के दक्षिण और दक्षिण-पश्चिमी तटों पर सबसे ज्यादा नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। राहत दल कई स्थानों पर तैनात कर दिए गए हैं।
IMD का बड़ा अपडेट: 29-30 नवंबर सबसे अधिक प्रभाव वाले दिन
भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा ने गुरुवार सुबह चक्रवात की प्रगति पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया—
“चक्रवात ‘दित्वा’ अभी श्रीलंका के तटीय क्षेत्र पर केंद्र है। यह कल सुबह तक श्रीलंका से निकलकर बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में पहुंच जाएगा। इसका सबसे बड़ा प्रभाव 29 और 30 नवंबर को देखने को मिलेगा। तमिलनाडु और पुडुचेरी में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है।”
उन्होंने कहा कि अगले 24 घंटों में चक्रवात की गति और संरचना में बदलाव हो सकता है, जिसके आधार पर भारत के तटीय क्षेत्रों के लिए चेतावनियों को और अपडेट किया जाएगा।
कैसा रहेगा ‘दित्वा’ का आगे का मार्ग? – लाइव ट्रैकिंग जानकारी
IMD, NOAA, और JTWC के उपलब्ध मॉडलों के आधार पर चक्रवात दित्वा का संभावित मार्ग इस प्रकार है—
- श्रीलंका के दक्षिण तटीय भागों पर वर्तमान प्रभाव
- 29 नवंबर की सुबह तक—चक्रवात श्रीलंका से निकलकर दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में प्रवेश करेगा
- 29-30 नवंबर—तमिलनाडु, पुडुचेरी और दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश के आस-पास समुद्र खतरनाक स्थिति में रहेगा
- इसके बाद—चक्रवात के कमजोर होकर डीप डिप्रेशन में बदलने की संभावना
हालांकि अभी इसका भारत के तटीय क्षेत्रों पर सीधा लैंडफॉल अनुमानित नहीं है, लेकिन अत्यधिक वर्षा और तेज़ हवाओं का बड़ा असर दिखेगा।
तमिलनाडु और पुडुचेरी में क्या होगा असर?
चक्रवात दित्वा के प्रभाव से दक्षिण भारत के मौसम में बड़ा बदलाव होने वाला है।
IMD ने चार क्षेत्रों के लिए विशेष चेतावनी जारी की है—
1. भारी से बहुत भारी बारिश
- चेन्नई
- कडलूर
- नागपट्टिनम
- तिरुवल्लूर
- वेल्लोर
- कुड्डालोर
- पुडुचेरी और कराईकल क्षेत्र
इन स्थानों पर 24 घंटे में 100 मिमी से अधिक वर्षा दर्ज हो सकती है।
2. तेज़ हवाएं—70 किमी/घंटा तक
तटीय इलाकों में समुद्री हवाओं की गति 50-70 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है,
जो मछली पकड़ने वाली नौकाओं और छोटे जहाजों के लिए अत्यंत खतरनाक मानी जाती है।
3. समुद्र में ऊंची लहरें (High Tide Warning)
बंगाल की खाड़ी का दक्षिणी हिस्सा बहुत अशांत रहेगा।
मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है।
4. शहरों में जलभराव और यातायात ठप होने की स्थिति
चेन्नई, महाबलीपुरम और पांडिचेरी के कई निचले इलाकों में
- जलभराव
- पेड़ गिरने
- बिजली कटौती
जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
राज्य सरकारें सतर्क—NDRF की तैनाती
तमिलनाडु और पुडुचेरी सरकार ने प्रशासन को अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है।
- NDRF की 6 टीमें तैनात
- फायर एंड रेस्क्यू विभाग हाई-रिस्पांस मोड में
- समुद्र तटों पर गश्ती बढ़ाई गई
- स्कूल–कॉलेजों में छुट्टियों पर विचार
चेन्नई निगम ने जलनिकासी पंप पहले से सक्रिय कर दिए हैं।
श्रीलंका से भारत तक—क्यों खतरनाक है चक्रवात ‘दित्वा’?
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि दित्वा चक्रवात की दो प्रमुख विशेषताएं इसे अधिक ख़तरनाक बनाती हैं—
- यह एक दुर्लभ मार्ग वाला तूफान है, जो पहले श्रीलंका को प्रभावित करता है और फिर भारत की ओर मुड़ता है।
- इसका आकार बड़ा है, जिससे दूर-दूर तक भारी वर्षा का क्षेत्र बनता है।
अगले 48 घंटे—सबसे महत्वपूर्ण
मौसम विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत के लिए अगले 48 घंटे बेहद अहम होंगे।
- बारिश
- हवा
- समुद्री उफान
इन तीनों के संयुक्त प्रभाव से तटीय राज्यों को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
लोगों को IMD और राज्य सरकारों के अलर्ट को गंभीरता से लेने की अपील की गई है।
जनता के लिए जरूरी सलाह
- समुद्र तट पर जाने से बचें
- अनावश्यक यात्रा न करें
- मोबाइल में IMD व राज्य अलर्ट सक्रिय रखें
- बिजली के खंभों, पुराने पेड़ों के पास न खड़े हों
- मछुआरे कम से कम 2 दिन समुद्र में न जाएं



