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सख्त तेवर में सीएम धामी: लापरवाही पर ‘जीरो टॉलरेंस’, लैंड फ्रॉड पर बनेगा कठोर कानून और थानों के वर्क कल्चर में होगा सुधार

देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान प्रदेश की प्रशासनिक और सुरक्षा मशीनरी को कड़ा संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था, जनसेवा और प्रशासनिक कार्यशैली में किसी भी प्रकार की शिथिलता अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुलिस और प्रशासन का प्रत्येक विभाग आम जनमानस के प्रति संवेदनशील और परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण के साथ कार्य करे।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे और पर्यटन प्रबंधन पर फोकस

मुख्यमंत्री ने आगामी चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे के खुलने के बाद राज्य में पर्यटकों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि होने वाली है।

  • समयबद्ध तैयारी: सीएम ने होटल, पार्किंग, ट्रैफिक प्लान और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर समयबद्ध तैयारी के निर्देश दिए।

  • कैंची धाम बाईपास: मुख्यमंत्री ने बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि कैंची धाम बाईपास का कार्य जून 2026 तक पूर्ण कर लिया जाएगा, जिससे विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल कैंची धाम आने वाले श्रद्धालुओं को जाम से बड़ी राहत मिलेगी।


पुलिसिंग में सुधार: ‘मानवीय चेहरा’ और त्वरित विवेचना

मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग के ‘वर्क कल्चर’ पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि थानों और चौकियों के स्तर पर आम आदमी के साथ व्यवहार सम्मानजनक होना चाहिए।

  1. संवेदनशीलता: निर्दोष नागरिकों को परेशान करने की शिकायत मिलने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

  2. पेंडेंसी खत्म करना: आपराधिक मामलों की विवेचनाओं को अनावश्यक रूप से लटकाने के बजाय उन्हें शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए।

  3. सघन पेट्रोलिंग: सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए रात्रि गश्त और निरंतर पेट्रोलिंग को और अधिक प्रभावी बनाने को कहा गया।


लैंड फ्रॉड और अवैध अतिक्रमण पर ‘स्ट्राइक’

राज्य में बढ़ रहे भू-माफियाओं के रसूख को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री ने लैंड फ्रॉड (Land Fraud) के खिलाफ कठोर कानून बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भूमि से जुड़े अपराधों में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

अवैध निर्माण पर जवाबदेही: मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि नदी-नालों और सरकारी भूमि पर हो रहे अवैध निर्माणों के लिए स्थानीय एसडीएम (SDM), लेखपाल और पटवारी की जवाबदेही तय की जाए। अतिक्रमण को संरक्षण देने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


नशा मुक्ति: अब बनेगी मासिक रिपोर्ट

‘नशा मुक्त देवभूमि’ के संकल्प को लेकर सीएम धामी ने इसे जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया। अब प्रत्येक जनपद को अपनी मासिक नशा मुक्ति रिपोर्ट सीधे शासन को भेजनी होगी। इस रिपोर्ट की नियमित समीक्षा स्वयं गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक द्वारा की जाएगी।


प्रशासनिक सुधार और डिजिटल गवर्नेंस

राजस्व व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने ‘सब्सिडी योजनाओं’ के वास्तविक लाभ (Outcome) के मूल्यांकन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राजस्व के वैकल्पिक स्रोत बढ़ाने की दिशा में कार्य किया जाए और राजस्व मामलों में देरी को पूरी तरह समाप्त किया जाए।

  • डिजिटल गवर्नेंस: सीएम ने कहा कि इसे केवल औपचारिकता न समझा जाए, बल्कि इसे पूरी पारदर्शिता के साथ धरातल पर लागू किया जाए।

  • 1905 हेल्पलाइन: जनशिकायतों के लिए ‘सीएम हेल्पलाइन 1905’ पर ‘जीरो पेंडेंसी’ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

  • सड़क डामरीकरण: लोक निर्माण विभाग (PWD) को निर्देश दिए गए कि 15 फरवरी तक सड़कों के डामरीकरण का कार्य गुणवत्ता के साथ शुरू कर दिया जाए।


योजनाओं का सैचुरेशन: 6 माह का विशेष अभियान

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को एक नई चुनौती दी है। अगले 6 महीनों के भीतर एक विशेष अभियान चलाकर राज्य के प्रत्येक गांव को शत-प्रतिशत सरकारी योजनाओं से ‘संतृप्त’ (Saturate) किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाएं केवल फाइलों में नहीं, बल्कि धरातल पर दिखनी चाहिए और उनका भौतिक सत्यापन अनिवार्य है।

कारागार और अभियोजन में सुधार

बैठक के दौरान कारागार सुधारों पर भी चर्चा हुई, जहाँ बंदियों के स्किल डेवलपमेंट और मानवाधिकारों के पालन पर जोर दिया गया। वहीं, अभियोजन अधिकारियों के लिए ‘परफॉर्मेंस ऑडिट’ की व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए ताकि कोर्ट में सरकार का पक्ष मजबूती से रखा जा सके।


विकसित उत्तराखंड की ओर कदम

अखिल भारतीय डीजी/आईजी सम्मेलन के निष्कर्षों पर आधारित यह बैठक उत्तराखंड की भविष्य की प्रशासनिक दिशा तय करने वाली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ये निर्देश बताते हैं कि सरकार अब विकास और सुरक्षा के मोर्चे पर किसी भी प्रकार के समझौते के मूड में नहीं है।

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