
देहरादून: उत्तराखंड में आगामी मानसून सीजन और गर्मियों की आहट को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासन के स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है। शुक्रवार को राजधानी देहरादून स्थित सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सिंचाई परियोजनाओं के अंतर्गत रिवर प्रोटेक्शन (नदी सुरक्षा) और डीसिल्टिंग कार्य की प्रगति का बारीकी से जायजा लिया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में निर्देश दिए कि मानसून के दौरान जन-धन की हानि रोकने के लिए सभी सुरक्षात्मक कार्य समय सीमा के भीतर पूरे किए जाएं। इस बैठक में प्रदेश की जल संपदा के संरक्षण और वनों की सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
मानसून की चुनौतियों के लिए ‘अर्ली वॉर्निंग’ और सुरक्षा कार्य
बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां मानसून के दौरान अत्यधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाढ़ की आशंका वाले संवेदनशील क्षेत्रों में रिवर प्रोटेक्शन और नदियों से सिल्ट निकालने (डीसिल्टिंग) का काम प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि:
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मानसून आने से पहले सभी डीसिल्टिंग कार्य पूर्ण कर लिए जाएं ताकि नदियों का जलस्तर बढ़ने पर तटवर्ती इलाकों में खतरा न हो।
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निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए।
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सिंचाई विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो।
जल संरक्षण: 700 से अधिक चेक डैम और ग्राउंड वाटर रिचार्ज पर फोकस
बैठक में सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति साझा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि राज्य में लघु सिंचाई विभाग द्वारा जल संरक्षण और संवर्द्धन के लिए बड़े स्तर पर कार्य किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य न केवल सतही जल को रोकना है, बल्कि भूजल स्तर को सुधारना भी है।
अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के मुख्य अंश:
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चेक डैम निर्माण: प्रदेश भर में अब तक 708 चेक डैम बनाए जा चुके हैं, जो वर्षा जल को रोकने और मृदा अपरदन कम करने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
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रिचार्ज शॉफ्ट: ऊधम सिंह नगर, नैनीताल और हरिद्वार जैसे मैदानी जिलों में कुल 419 रिचार्ज शॉफ्ट स्थापित किए गए हैं।
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भूजल सुधार: इन प्रयासों से सालाना लगभग 108.94 करोड़ लीटर ग्राउंड वाटर रिचार्ज होने का अनुमान है, जो भविष्य में पेयजल संकट को दूर करने में मील का पत्थर साबित होगा।
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जल स्रोतों का पुनरुद्धार: ‘सारा’ और पेयजल विभाग के माध्यम से 14 महत्वपूर्ण जल स्रोतों का उपचार किया जा रहा है, जबकि कैम्पा योजना के तहत 247 जल धाराओं को पुनर्जीवित करने का कार्य गतिमान है।
वनाग्नि रोकथाम: ‘प्री-फायर’ सीजन की तैयारियों पर मंथन
गर्मियों के दस्तक देते ही उत्तराखंड के जंगलों में लगने वाली आग (वनाग्नि) एक बड़ी चुनौती बनकर उभरती है। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में वन विभाग के अधिकारियों को वनाग्नि रोकथाम के लिए अभी से ‘एक्शन मोड’ में रहने को कहा।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि वनाग्नि से निपटने के लिए मानव संसाधन के साथ-साथ आधुनिक उपकरणों की कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने ‘फायर लाइन’ की समय रहते सफाई करने और वन पंचायतों के साथ नियमित संवाद स्थापित करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा, “जंगलों को बचाना केवल विभाग की नहीं, बल्कि जन-भागीदारी की जिम्मेदारी है। जो ग्रामीण या वन पंचायत संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं, उन्हें सरकार प्रोत्साहित करेगी।”
अतिक्रमण पर कड़ा प्रहार: वन भूमि को मुक्त कराने का लक्ष्य
बैठक के दौरान एक और महत्वपूर्ण बिंदु वन भूमि पर अतिक्रमण का रहा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि सरकारी और वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को चिन्हित स्थलों से प्राथमिकता के आधार पर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए। यह कदम न केवल पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है, बल्कि वन्यजीवों के संरक्षण के लिए भी अनिवार्य है।
बैठक में मौजूद रहे शीर्ष अधिकारी
सचिवालय में हुई इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में प्रदेश के प्रशासनिक अमले के दिग्गज मौजूद रहे। इनमें प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगोली, युगल किशोर पंत समेत सिंचाई, लघु सिंचाई और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि सभी परियोजनाओं की मॉनिटरिंग ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से की जा रही है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि सरकार इस बार मानसून और गर्मी की चुनौतियों को लेकर पहले से अधिक गंभीर है। डीसिल्टिंग कार्य और जल संरक्षण योजनाओं के माध्यम से जहाँ एक ओर किसानों और आम जनता को लाभ पहुँचाने की कोशिश है, वहीं वनाग्नि पर नियंत्रण पाकर पर्यावरण को सुरक्षित रखने का संकल्प भी दोहराया गया है। आने वाले महीनों में इन निर्देशों का धरातल पर क्रियान्वयन उत्तराखंड की सुरक्षा और समृद्धि की दिशा तय करेगा।



