
देहरादून: उत्तराखंड की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक सुदृढ़, आधुनिक और पारदर्शी बनाने के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन को धरातल पर उतारने के लिए आवास विभाग ने कमर कस ली है। इसी क्रम में, आवास एवं राज्य संपत्ति सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने सचिवालय परिसर में निर्माणाधीन आधुनिक कार्यालय भवन का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सचिव का सख्त लहजा साफ कर गया कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता और समयसीमा में देरी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण की दिशा में बड़ा कदम
उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद से सचिवालय में स्थान की कमी और आधुनिक सुविधाओं की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। मुख्यमंत्री धामी के विजन के अनुरूप, सचिवालय को ‘स्मार्ट और हाई-टेक’ बनाने की दिशा में यह नई परियोजना मील का पत्थर साबित होने वाली है। आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने पदभार संभालने के बाद से ही लंबित परियोजनाओं को गति देना शुरू कर दिया है। आज के निरीक्षण के दौरान उन्होंने संयुक्त सचिव एसएस रावत और लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता नीरज कुमार त्रिपाठी सहित पूरी तकनीकी टीम के साथ कार्य की बारीकियों को समझा।
परियोजना का विवरण: ₹59.34 करोड़ की लागत और विश्वस्तरीय सुविधाएं
सचिवालय परिसर में विश्वकर्मा भवन के समीप बन रहा यह आधुनिक कार्यालय भवन कोई सामान्य निर्माण नहीं है, बल्कि यह भविष्य की प्रशासनिक जरूरतों का केंद्र होगा।
भवन की तकनीकी विशेषताएं:
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संरचना: यह 6 मंजिला (जी+5 और एक बेसमेंट) भव्य इमारत होगी।
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क्षेत्रफल: 34×74 मीटर के प्लॉट पर निर्मित इस भवन का कुल क्षेत्रफल लगभग 1,04,480 वर्ग फीट है।
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लागत: परियोजना की कुल स्वीकृत लागत ₹5934.71 लाख (लगभग 59.34 करोड़ रुपये) है।
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पार्किंग का समाधान: बेसमेंट में 25 कार और 100 दोपहिया वाहनों के लिए विशेष पार्किंग जोन बनाया गया है, जो सचिवालय की बड़ी समस्या को हल करेगा।
समयसीमा और वर्तमान प्रगति: 24 जनवरी 2027 तक लक्ष्य
सचिवालय के इस प्रोजेक्ट को 26 मार्च 2025 को कैबिनेट की स्वीकृति मिली थी। निर्माण का जिम्मा मैसर्स शिव कुमार अग्रवाल को सौंपा गया है। डॉ. आर. राजेश कुमार ने समीक्षा के दौरान बताया कि वर्तमान में परियोजना की भौतिक प्रगति लगभग 15 प्रतिशत है।
निर्माण की वर्तमान स्थिति:
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फाउंडेशन कार्य: भवन की नींव का काम पूरी तरह संपन्न हो चुका है।
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बेसमेंट: बेसमेंट का सिविल स्ट्रक्चर तैयार है।
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ग्राउंड फ्लोर: वर्तमान में ग्राउंड फ्लोर की छत और पिलर्स का काम युद्धस्तर पर जारी है, जिसे 10 फरवरी 2026 तक पूर्ण करने का कड़ा लक्ष्य रखा गया है।
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अंतिम तिथि: अनुबंध के अनुसार, पूरे प्रोजेक्ट को 24 जनवरी 2027 तक राज्य सरकार को सौंपना अनिवार्य है।
भवन का लेआउट: बैंक से लेकर हाई-टेक मीटिंग हॉल तक
इस आधुनिक कार्यालय भवन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहाँ आने वाले आगंतुकों और कार्यरत अधिकारियों को सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिलें।
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ग्राउंड फ्लोर: यहाँ आम जनता और कर्मचारियों की सुविधा के लिए एसबीआई बैंक और पोस्ट ऑफिस की शाखाएं होंगी। साथ ही एक भव्य प्रवेश लॉबी और वेटिंग एरिया बनाया जा रहा है।
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ऊपरी मंजिलें: प्रथम से पांचवीं मंजिल तक सचिव, अपर सचिव, संयुक्त सचिव और अनुसचिव स्तर के अधिकारियों के लिए ‘साउंड-प्रूफ’ कार्यालय और स्टाफ कक्ष होंगे।
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मीटिंग हॉल: प्रत्येक फ्लोर पर आधुनिक प्रेजेंटेशन सुविधाओं से लैस मीटिंग हॉल और वेटिंग लॉबी का प्रावधान किया गया है।
‘क्वालिटी कंट्रोल’ पर सचिव के सख्त निर्देश
निरीक्षण के दौरान डॉ. आर. राजेश कुमार ने निर्माण सामग्री और फिनिशिंग की गुणवत्ता को लेकर ठेकेदार और अभियंताओं को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री जी का स्पष्ट निर्देश है कि सरकारी भवन केवल ईंट-गारे के ढांचे न हों, बल्कि वे हमारी कार्यक्षमता और गुणवत्ता के प्रतीक होने चाहिए। यदि किसी भी स्तर पर घटिया निर्माण सामग्री की शिकायत मिली, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।”
सचिव ने बिजली विभाग के सहायक अभियंता गोविंद सिंह और सिविल टीम को निर्देश दिए कि विद्युतीकरण और सिविल कार्य के बीच बेहतर समन्वय रखें ताकि बाद में तोड़-फोड़ की नौबत न आए।
भविष्य की कार्यसंस्कृति पर प्रभाव
यह नया भवन न केवल सचिवालय परिसर में भीड़भाड़ को कम करेगा, बल्कि फाइलों के सुचारू संचालन और अधिकारियों के बीच त्वरित संवाद के लिए एक बेहतर वातावरण प्रदान करेगा। आवास सचिव के अनुसार, यह परियोजना उत्तराखंड की ‘ई-गवर्नेंस’ और ‘सरलीकरण-समाधान’ की नीति को और मजबूती प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड एक ‘आदर्श राज्य’ बनने की ओर अग्रसर है। सचिवालय में इस आधुनिक कार्यालय भवन का निर्माण राज्य की प्रशासनिक मशीनरी को नई ऊर्जा देगा। आवास सचिव की सक्रियता और सख्त निगरानी यह सुनिश्चित कर रही है कि जनता का पैसा सही जगह और सही गुणवत्ता के साथ खर्च हो। निश्चित रूप से, 2027 की शुरुआत में जब यह भवन बनकर तैयार होगा, तो यह सचिवालय की नई पहचान बनेगा।



