
देहरादून, 10 फरवरी 2026: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सरकारी भूमि और प्राकृतिक संसाधनों को हड़पने वाले भू-माफियाओं के विरुद्ध जिला प्रशासन ने मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘जीरो टॉलरेंस ऑन एन्क्रोचमेंट’ के निर्देशों का पालन करते हुए, जिलाधिकारी सविन बसंल ने अवैध प्लाटिंग और सरकारी नालों पर कब्जे के खिलाफ कठोर कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इसी क्रम में आज गल्ज्वाड़ी क्षेत्र में प्रशासन का बुलडोजर गरजा, जहां बरसाती नाले को पाटकर बनाई गई पक्की दीवार को जमींदोज कर दिया गया।
गल्ज्वाड़ी में अवैध साम्राज्य पर प्रहार
तहसील देहरादून के अंतर्गत ग्राम गल्ज्वाड़ी में पिछले लंबे समय से अवैध प्लाटिंग और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतें प्रशासन को प्राप्त हो रही थीं। जिलाधिकारी के निर्देशों पर उप जिलाधिकारी (न्याय) कुमकुम जोशी के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम ने पुलिस बल के साथ मौके पर दबिश दी।
निरीक्षण के दौरान टीम ने पाया कि भू-माफियाओं ने दुस्साहस दिखाते हुए प्राकृतिक बरसाती नाले (खसरा संख्या 962क) के प्रवाह को ही बाधित कर दिया था। यहाँ लगभग 08 मीटर लंबी पक्की सुरक्षा दीवार खड़ी कर दी गई थी ताकि नाले की भूमि को भी प्लाटिंग का हिस्सा बनाया जा सके। प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से निर्माण गतिविधियों को रोकते हुए जेसीबी के जरिए इस अवैध दीवार को ध्वस्त कर दिया और नाले की भूमि को मुक्त कराया।
सेवानिवृत्त सिपाही पर भू-धोखाधड़ी के गंभीर आरोप
प्रशासनिक जांच में एक चौंकाने वाला नाम सामने आया है। गढ़ी कैंट और घंघोड़ा क्षेत्र के निवासियों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त एक पूर्व सिपाही, जितेन्द्र मलिक (निवासी मुजफ्फरनगर, वर्तमान निवासी कांवली, देहरादून), अपने परिजनों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर भूमि की खरीद-फरोख्त और अतिक्रमण में लिप्त है।
जांच के मुख्य बिंदु:
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77 बीघा अवैध प्लाटिंग: आरोपी द्वारा ग्राम गल्ज्वाड़ी में लगभग 77 बीघा भूमि में बिना अनुमति अवैध प्लाटिंग करने का मामला सामने आया है।
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सरकारी भूमि पर कब्जे का प्रयास: ग्राम यदुवाला में 18 बीघा सरकारी भूमि और गल्ज्वाड़ी के मजरे खाबड़वाला में लगभग 80 बीघा जलमग्न (Waterlogged) भूमि पर भी कब्जे की कोशिश के आरोप लगे हैं।
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अभिलेखीय गड़बड़ी: राजस्व निरीक्षण में खसरा संख्या 1164 से 1185 के बीच कई अनियमितताएं पाई गईं, जहां नाले की मूल प्रकृति को बदलने का प्रयास किया गया था।
प्राकृतिक जलस्रोतों से छेड़छाड़ पर सख्त रुख
जिलाधिकारी सविन बसंल ने स्पष्ट किया है कि देहरादून के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बरसाती नालों और नौलों को पाटने से मानसून के दौरान शहर में जलभराव और आपदा जैसी स्थितियां पैदा होती हैं।
“प्राकृतिक जलस्रोतों, नालों और सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या अवैध भू-उपयोग परिवर्तन एक गंभीर अपराध है। गल्ज्वाड़ी की कार्रवाई तो बस शुरुआत है; पूरे जिले में जहां भी अवैध प्लाटिंग और नाले ब्लॉक किए गए हैं, वहां ध्वस्तीकरण की कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।” — सविन बसंल, जिलाधिकारी, देहरादून
वन विभाग की रडार पर ‘साल’ के वृक्षों का मामला
गल्ज्वाड़ी की इस विवादित भूमि पर साल के कीमती वृक्ष भी विद्यमान हैं। हालांकि, मौके पर अभी किसी वृक्ष के कटान के प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिले हैं, लेकिन प्रशासन को आशंका है कि प्लाटिंग के रास्ते में आने वाले पेड़ों को सुखाया जा सकता है। इस संबंध में वन विभाग को अलग से जांच सौंप दी गई है। यदि वृक्षों को नुकसान पहुँचाने का कोई भी प्रमाण मिलता है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ ‘फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट’ के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
प्रशासन की अपील: भूमि खरीदने से पहले करें जांच
जिला प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी लुभावने ऑफर में आकर अवैध प्लाटिंग में निवेश न करें। भू-माफिया सरकारी नालों और ‘जलमग्न’ श्रेणी की भूमि को भी बेच रहे हैं, जिसका भविष्य में ध्वस्तीकरण तय है। किसी भी भूमि सौदे से पहले संबंधित तहसील कार्यालय से खसरा-खतौनी और भूमि की श्रेणी की जांच अवश्य कर लें।
देहरादून में भू-माफिया के खिलाफ यह कार्रवाई उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो रसूख के दम पर सरकारी संपत्तियों पर कुंडली मार कर बैठे हैं। जिला प्रशासन की इस सक्रियता से न केवल सरकारी भूमि बचेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।



