
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र का दूसरा सप्ताह हंगामे की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। शुक्रवार को सत्र का 8वां दिन है, लेकिन गुरुवार को दोनों सदनों में जो दृश्य देखने को मिले, उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की गहरी खाई को एक बार फिर उजागर कर दिया है। राज्यसभा में जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के दौरान विपक्ष ने नारेबाजी के बाद वॉकआउट किया, वहीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने का मौका न मिलने पर सियासी पारा चढ़ा हुआ है।
राज्यसभा: नारों के बीच पारित हुआ धन्यवाद प्रस्ताव
गुरुवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देने के लिए जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खड़े हुए, सदन का माहौल गरमा गया। विपक्षी सांसदों ने मणिपुर हिंसा और अन्य ज्वलंत मुद्दों को लेकर आसन के सामने (वेल में) आकर ज़ोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।
‘जो थक गए, वे चले गए’ – पीएम का कटाक्ष
हंगामे के बीच विपक्ष के वॉकआउट करने पर प्रधानमंत्री ने बेहद हमलावर रुख अपनाया। उन्होंने विपक्ष की अनुपस्थिति में तंज कसते हुए कहा, “मैदान वही छोड़ते हैं जो थक जाते हैं। विपक्षी दलों को देश की जनता को जवाब देना होगा कि उन्होंने देश की साख को उस दौर में क्यों पहुँचाया था, जब दुनिया का कोई देश हमसे डील नहीं करना चाहता था।”
प्रधानमंत्री ने राज्यसभा सभापति को संबोधित करते हुए विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं पर भी चुटकी ली। उन्होंने मल्लिकार्जुन खरगे का नाम लिए बिना कहा कि उनकी उम्र का सम्मान करते हुए उन्हें बैठकर नारे लगाने की अनुमति दी जा सकती है, जबकि पीछे खड़े युवाओं को अपनी ऊर्जा दिखानी चाहिए।
लोकसभा: राहुल गांधी के बिना पारित हुआ प्रस्ताव
निचले सदन यानी लोकसभा में भी स्थिति सामान्य नहीं रही। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने का पर्याप्त अवसर न मिलने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस और सहयोगी दलों ने भारी विरोध दर्ज कराया। विपक्ष की अनुपस्थिति और भारी शोर-शराबे के बीच ही राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।
विपक्ष ने इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सदन में जनता के असल मुद्दों को उठाने से विपक्ष को रोका जा रहा है और तानाशाही रवैया अपनाया जा रहा है।
बजट सत्र Day 8: आज क्या होगा खास? (शुक्रवार का एजेंडा)
आज शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों में कार्यवाही काफी व्यस्त रहने वाली है। मुख्य फोकस आम बजट 2026-27 पर होने वाली सामान्य चर्चा पर रहेगा।
1. प्रश्नकाल और मंत्रालयों की जवाबदेही
सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही प्रश्नकाल होगा। इसमें रक्षा, विदेश, स्वास्थ्य और कानून मंत्रालयों से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल पूछे जाएंगे। विपक्षी सांसद सरकार को चीन सीमा विवाद और हालिया स्वास्थ्य नीतियों पर घेरने की तैयारी में हैं।
2. महत्वपूर्ण दस्तावेजों का प्रस्तुतीकरण
आज कई वरिष्ठ मंत्री सदन के पटल पर मंत्रालयों की रिपोर्ट और दस्तावेज रखेंगे। इसमें विदेश मंत्रालय, रसायन-उर्वरक और पोत-परिवहन मंत्रालयों के वार्षिक प्रतिवेदन शामिल होंगे।
3. मंत्रियों के विशेष बयान
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महिला एवं बाल विकास: मंत्री अन्नपूर्णा देवी महिला सुरक्षा और बाल विकास से जुड़ी संसदीय समिति की सिफारिशों पर सरकार का रुख स्पष्ट करेंगी।
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स्वास्थ्य क्षेत्र: मंत्री अनुप्रिया पटेल ‘पीएम टीबी मुक्त भारत अभियान’ की अब तक की प्रगति और 2026 के लक्ष्यों पर विस्तृत बयान देंगी।
4. प्राइवेट मेंबर्स बिल (निजी विधेयक)
चूंकि आज शुक्रवार है, इसलिए दोपहर बाद का समय निजी सदस्यों के कामकाज के लिए आरक्षित है। कई सांसद समाज सुधार और क्षेत्रीय विकास से जुड़े अपने व्यक्तिगत बिल पेश करेंगे।
आम बजट 2026-27: चर्चा में छिड़ेगा वाकयुद्ध
आज का सबसे बड़ा आकर्षण आम बजट 2026-27 पर होने वाली चर्चा है। वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए बजट के प्रावधानों, टैक्स स्लैब में बदलाव और बुनियादी ढांचे पर खर्च को लेकर आज सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की उम्मीद है। विपक्ष इसे ‘अमीर समर्थक बजट’ बता रहा है, जबकि सरकार इसे ‘विकसित भारत’ की नींव करार दे रही है।
सदन में गतिरोध का असर
संसद में जारी यह गतिरोध केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं है, बल्कि इससे महत्वपूर्ण विधायी कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान जिस तरह से वॉकआउट हुआ, उससे स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में बजट पर चर्चा और भी हंगामेदार होगी।
जनता की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आज सदन में सुचारू रूप से चर्चा हो पाएगी या फिर शुक्रवार का दिन भी केवल नारों और स्थगन की भेंट चढ़ जाएगा।



