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इथियोपिया के हेली गुब्बी ज्वालामुखी की राख भारत की ओर बढ़ी, एयरलाइंस अलर्ट; इंडिगो और एयर इंडिया का बयान

The Hill India News
Last updated: November 25, 2025 2:09 am
The Hill India News
Published: November 25, 2025
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नई दिल्ली: इथियोपिया में स्थित हेली गुब्बी ज्वालामुखी (Hale Gubbi Volcano) के फटने के बाद उठे भारी मात्रा में राख के बादल अब भारत की ओर बढ़ रहे हैं, जिसके बाद भारतीय विमानन कंपनियों ने उच्च स्तर की सतर्कता अपना ली है। पश्चिमी भारत के हवाई क्षेत्र पर संभावित प्रभाव को देखते हुए इंडिगो, एयर इंडिया और अकासा एयर समेत सभी प्रमुख एयरलाइंस ने यात्रियों को आश्वस्त किया है कि उड़ानों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी और सभी परिचालन अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप किए जाएंगे।

Contents
इंडिगो ने यात्रियों को आश्वस्त किया – “आपकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता”एयर इंडिया ने भी जारी किया बयान, कहा – फिलहाल उड़ानों पर बड़ा असर नहींक्यों बढ़ जाती है ज्वालामुखीय राख से खतरे की आशंका?भारतीय विमानन नियामक भी सक्रिय, DGCA ने जारी किए निर्देशअकासा एयर और अन्य विमान कंपनियों ने भी बढ़ाई सतर्कतायात्रियों से क्या अपील की गई?विशेषज्ञों की राय – “स्थिति चिंताजनक नहीं, लेकिन सतर्कता जरूरी”फिलहाल चिंता की जरूरत नहीं, एयरलाइंस और एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट

ज्वालामुखी विस्फोट के बाद राख के विशाल गुबार के पूर्वोत्तर दिशा में बढ़ने की आशंका व्यक्त की गई है, जिसके कारण अरब सागर और गुजरात, महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों के ऊपर के हवाई क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं। उड्डयन विशेषज्ञों के अनुसार, ज्वालामुखीय राख विमान इंजनों, संचार उपकरणों और दृश्यता पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है, इसलिए हवाई यातायात नियंत्रण इकाइयाँ (ATC) भी लगातार स्थिति की निगरानी कर रही हैं।


इंडिगो ने यात्रियों को आश्वस्त किया – “आपकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता”

सबसे पहले बयान जारी करते हुए इंडिगो एयरलाइंस ने कहा कि कंपनी अंतरराष्ट्रीय उड्डयन संगठनों और मौसम एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में है। एयरलाइन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा:

“इथियोपिया में हेली गुब्बी ज्वालामुखी के फटने से उठे राख के बादल पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों की ओर बढ़ रहे हैं। हमें समझ है कि ऐसी खबर चिंता का कारण बन सकती है, लेकिन आपकी सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। हमारी टीमें स्थिति पर सतत नजर बनाए हुए हैं।”

इंडिगो ने यह भी बताया कि वह सभी आवश्यक सावधानियां ले रही है, जिनमें मौसम और राख की दिशा के आधार पर उड़ान मार्गों की समीक्षा, फ्लाइट प्लानिंग, इंजन सेफ्टी प्रोटोकॉल और कॉकपिट क्रू को विशेष निर्देश शामिल हैं।

एयरलाइन ने कहा:

“हम पूरी तरह तैयार हैं ताकि उड़ानें सुरक्षित और विश्वसनीय रहें। देशभर के एयरपोर्ट्स पर हमारी टीमें चौबीसों घंटे आपकी मदद के लिए मौजूद हैं। किसी भी बदलाव या असुविधा से पहले हम यात्रियों को अपडेट करते रहेंगे।”


एयर इंडिया ने भी जारी किया बयान, कहा – फिलहाल उड़ानों पर बड़ा असर नहीं

राष्ट्रीय विमानन कंपनी एयर इंडिया ने भी स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ज्वालामुखीय राख के कारण पश्चिमी भारत के कुछ हवाई क्षेत्रों में हल्की धुंध या कालिख जैसे चिन्ह देखे जा रहे हैं, लेकिन अभी तक एयर इंडिया के परिचालन पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा है।

एयरलाइन ने बयान में कहा:

“हम स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं और अपने सभी पायलटों एवं चालक दल के साथ निरंतर संपर्क में हैं। फिलहाल हमारी उड़ानों पर कोई बड़ा असर नहीं हुआ है और परिचालन सामान्य रूप से जारी है।”

इसके साथ ही एयर इंडिया ने यात्रियों को भरोसा दिलाया कि आवश्यक होने पर फ्लाइट रूट्स को बदला जा सकता है ताकि उड़ान सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।


क्यों बढ़ जाती है ज्वालामुखीय राख से खतरे की आशंका?

ज्वालामुखी से उठने वाली राख सामान्य धूल नहीं होती, बल्कि इसमें सिलिका, ज्वालामुखीय कांच और कठोर पत्थर जैसे महीन कण होते हैं। उड्डयन विशेषज्ञों के मुताबिक, ये कण:

  • विमान इंजनों के अंदर पिघल सकते हैं और टरबाइन को जाम कर सकते हैं
  • विंडस्क्रीन और सेंसरों की पारदर्शिता को कम कर सकते हैं
  • GPS और रेडियो संचार प्रणाली में हस्तक्षेप कर सकते हैं
  • विमान के धातु ढांचे को नुकसान पहुंचा सकते हैं

इसी कारण अंतरराष्ट्रीय उड्डयन सुरक्षा एजेंसियां राख के फैलाव की दिशा, घनत्व और ऊंचाई की लगातार मॉनिटरिंग करती हैं। पिछले वर्षों में इंडोनेशिया, आईसलैंड और हवाई द्वीपों के ज्वालामुखियों से उठी राख के बाद कई देशों को अपने हवाई क्षेत्र बंद करने पड़े थे।


भारतीय विमानन नियामक भी सक्रिय, DGCA ने जारी किए निर्देश

डीजीसीए (DGCA) ने सभी एयरलाइंस से कहा है कि वे:

  • अपने रूट्स के मौसम और राख अलर्ट को हर घंटे चेक करें
  • आसमान में राख की मौजूदगी को देखते हुए ऑल्टरनेट मार्ग तैयार रखें
  • लो-विजिबिलिटी ऑपरेशंस के लिए विमान और पायलटों को तैयार रखें
  • एयरपोर्ट्स पर यात्रियों को समय रहते सूचना दें

एक वरिष्ठ DGCA अधिकारी ने बताया कि राख के बादल फिलहाल ऊंचाई पर यात्रा कर रहे हैं और भारत की वायु सीमा तक पहुंचने में अभी कुछ समय है, लेकिन तैयारी पूरी रखी जा रही है।


अकासा एयर और अन्य विमान कंपनियों ने भी बढ़ाई सतर्कता

अकासा एयर ने अपनी फ्लाइट डिस्पैच टीम को अलर्ट मोड पर रखा है। कंपनी यात्रियों को ईमेल और SMS के माध्यम से अपडेट भेज रही है।
गो फर्स्ट (बैंकरप्सी रिजोल्यूशन प्रक्रिया में) और विस्तारा ने भी कहा है कि वे ATC और मौसम एजेंसियों से लगातार संपर्क में हैं।

महाराष्ट्र और गुजरात के कई एयरपोर्ट—जैसे मुंबई, नवी मुंबई, पुणे, नागपुर, सूरत और अहमदाबाद—ने भी ATC अलर्ट लेवल बढ़ा दिया है ताकि किसी भी अचानक बदलाव की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सके।


यात्रियों से क्या अपील की गई?

एयरलाइंस ने यात्रियों से कहा है कि:

  • वे यात्रा से पहले SMS/ईमेल अलर्ट देखें
  • फ्लाइट स्टेटस चेक करते रहें
  • यदि किसी फ्लाइट का समय बदला जाता है तो कंपनी द्वारा जारी संदेशों पर भरोसा करें
  • आवश्यकता हो तो ग्राहक सहायता केंद्र से संपर्क करें

एयरलाइंस ने यह भी कहा है कि अभी स्थिति नियंत्रण में है और अनावश्यक घबराहट की जरूरत नहीं है।


विशेषज्ञों की राय – “स्थिति चिंताजनक नहीं, लेकिन सतर्कता जरूरी”

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और वायुमंडलीय वैज्ञानिकों ने कहा है कि राख का भारत की जमीन पर असर पड़ने की संभावना कम है, लेकिन ऊपरी वायु-परतों में इसका प्रभाव उड़ानों पर पड़ सकता है।

आईआईटी दिल्ली के पर्यावरण विशेषज्ञ प्रो. अरविंद मिश्रा ने बताया: “ऊपरी हवा की दिशा के कारण राख पूर्वोत्तर की ओर बढ़ रही है, लेकिन भारत पहुंचने तक इसका घनत्व काफी कम हो सकता है। उड़ानों को लेकर जरूर सतर्क रहना आवश्यक है।”


फिलहाल चिंता की जरूरत नहीं, एयरलाइंस और एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट

इंडिगो, एयर इंडिया और अन्य विमान कंपनियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी उड़ानें निर्धारित मानकों के अनुसार संचालित होंगी। DGCA, ATC और अंतरराष्ट्रीय उड्डयन संस्थाएं लगातार स्थिति की निगरानी कर रही हैं।

फिलहाल भारत में किसी बड़ी उड़ान संचालन बाधा की आशंका नहीं है, लेकिन यदि राख की दिशा या घनत्व में बदलाव होता है, तो एयरलाइंस वैकल्पिक उड़ान मार्ग अपनाकर स्थिति को संभालेंगी।

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