अल्मोड़ा/सल्ट | उत्तराखंड के पहाड़ी रास्तों पर बेलगाम रफ्तार और थकान का घातक मिश्रण एक बार फिर बड़े हादसे का सबब बना है। अल्मोड़ा जनपद के सल्ट क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना सामने आई है, जहां दिल्ली से अपने पैतृक गांव जा रहे एक परिवार की कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पहाड़ी से जा टकराई और पलट गई। इस भीषण हादसे में कार सवार दो महिलाएं गंभीर रूप से घायल हुई हैं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद उच्च केंद्र (हायर सेंटर) रेफर किया गया है।
तड़के दिल्ली से भरी थी उड़ान, घर पहुँचने से पहले ही हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली निवासी दरबान सिंह रावत अपनी पत्नी निर्मल रावत और भाभी माधुरी रावत के साथ गुरुवार तड़के करीब 4 बजे अपनी स्विफ्ट डिजायर कार (संख्या- DL 12 CT 6489) से अल्मोड़ा के लिए निकले थे। वे सल्ट ब्लॉक स्थित अपने पैतृक गांव ‘पैसिया-गढ़कोट’ जा रहे थे। लंबा सफर तय करने के बाद दोपहर बाद उनकी कार शशिखाल बाजार के समीप ‘बासुआ बैंड’ पर पहुँची ही थी कि अचानक चालक का नियंत्रण वाहन से खो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार की रफ्तार सामान्य थी, लेकिन मोड़ पर अचानक वाहन सीधे पहाड़ी से टकरा गया और जोरदार आवाज के साथ बीच सड़क पर पलट गया। कार के पलटते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई। गनीमत रही कि उस समय सामने से कोई अन्य वाहन नहीं आ रहा था, अन्यथा हादसा और भी भयावह हो सकता था।
स्थानीय निवासियों ने निभाया ‘देवदूत’ का धर्म
हादसे के तुरंत बाद शशिखाल बाजार के स्थानीय व्यापारी और ग्रामीण मदद के लिए दौड़ पड़े। कार के भीतर फंसे घायलों की स्थिति देख ग्रामीणों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी और खुद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद कार के दरवाजे खोलकर घायलों को बाहर निकाला गया।
इस अल्मोड़ा सड़क हादसा में निर्मल रावत और माधुरी देवी को गंभीर चोटें आई हैं, जबकि चालक दरबान सिंह रावत को मामूली चोटें लगी हैं। घायलों को तत्काल एंबुलेंस के जरिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) देवालय पहुँचाया गया। अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि महिलाओं की स्थिति नाजुक है, जिसके चलते उन्हें प्राथमिक उपचार देकर बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है।
पुलिस जांच: ‘नींद की झपकी’ बनी दुर्घटना का मुख्य कारण
मामले की सूचना मिलते ही सल्ट थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुँची और क्षतिग्रस्त वाहन को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। पुलिस की शुरुआती पूछताछ और चालक के बयान के अनुसार, हादसे का मुख्य कारण चालक को नींद की झपकी आना बताया जा रहा है। दिल्ली से लगातार ड्राइविंग करने के कारण थकान हावी हो गई थी, जिसके चलते बासुआ बैंड के पास चालक की आंख लग गई और गाड़ी सीधे पहाड़ी से टकरा गई।
पुलिस अधिकारी का बयान: “दिल्ली से आ रहे परिवार का वाहन शशिखाल के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ है। घायलों को अस्पताल पहुँचा दिया गया है। प्रथम दृष्टया थकान और नींद की झपकी हादसे की वजह लग रही है। हम मामले की विस्तृत जांच कर रहे हैं।”
पहाड़ों पर सफर: थकान बन रही है जान की दुश्मन
उत्तराखंड में हाल के दिनों में सड़क दुर्घटनाओं के ग्राफ में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। विशेषकर मैदानी इलाकों (दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम) से पहाड़ों की ओर आने वाले यात्री अक्सर रात भर ड्राइविंग करते हैं, जिससे दिन चढ़ते ही थकान और नींद का जोखिम बढ़ जाता है।
हाल ही में नैनीताल के प्रसिद्ध ‘प्रिया बैंड’ के पास भी एक ऐसा ही सड़क हादसा देखने को मिला था, जहां दो टैंपो ट्रैवलर पलट गए थे। उस हादसे में भी कई यात्री घायल हुए थे। पहाड़ी रास्तों की बनावट और तीखे मोड़ मैदानी इलाकों की तुलना में अधिक एकाग्रता की मांग करते हैं, लेकिन लंबी दूरी तय करने वाले चालक अक्सर इस चेतावनी को नजरअंदाज कर देते हैं।
यात्रियों के लिए सुरक्षा सुझाव
प्रशासन और यातायात पुलिस लगातार अपील कर रही है कि लंबी दूरी की यात्रा के दौरान पर्याप्त विश्राम लें। विशेषज्ञों के अनुसार:
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विश्राम अनिवार्य: हर 3-4 घंटे की ड्राइविंग के बाद 20 मिनट का ब्रेक लें।
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रात की यात्रा से बचें: यदि संभव हो, तो पहाड़ी रास्तों पर रात या तड़के के बजाय दिन के उजाले में सफर करें।
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स्थानीय चालक को प्राथमिकता: यदि आपको पहाड़ी ड्राइविंग का अनुभव नहीं है, तो स्थानीय टैक्सी या अनुभवी चालक की सेवाएं लें।
शशिखाल का यह हादसा उन हजारों प्रवासियों के लिए एक चेतावनी है जो छुट्टियों या त्योहारों पर अपने पैतृक गांव लौटते हैं। पुलिस फिलहाल परिजनों से संपर्क कर रही है और दुर्घटनाग्रस्त वाहन को सड़क से हटाकर यातायात सुचारू कर दिया गया है।



