
रामनगर: नैनीताल जिले के रामनगर में ‘अवैध अतिक्रमण’ के खिलाफ प्रशासन का डंडा एक बार फिर चला है। नगर पालिका प्रशासन ने शहर की सूरत बिगाड़ रहे अवैध कब्जों और पक्के निर्माणों के खिलाफ व्यापक अभियान छेड़ दिया है। सोमवार को पालिका की टीम जब जेसीबी मशीनों के साथ सड़कों पर उतरी, तो अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया। हालांकि, मोहल्ला खताड़ी क्षेत्र में कार्रवाई के दौरान उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब कांग्रेस के दिग्गज नेता और नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (EO) आमने-सामने आ गए।
सीएम हेल्पलाइन की शिकायत पर एक्शन मोड में प्रशासन
नगर पालिका की इस बड़ी कार्रवाई की पटकथा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के बाद लिखी गई। शहर के मुख्य मार्गों और नालियों पर बढ़ते कब्जों के कारण जनता को हो रही परेशानी का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी और एसडीएम रामनगर ने सख्त निर्देश जारी किए थे।
रामनगर अवैध अतिक्रमण अभियान के तहत पालिका की टीम ने सबसे पहले उन क्षेत्रों को निशाना बनाया जहाँ नालियों और सड़कों के ऊपर पक्के निर्माण कर लिए गए थे। जेसीबी की मदद से नाले के ऊपर बने अवैध स्लैब, दीवारों और सीढ़ियों को जमींदोज कर दिया गया। एक व्यस्त चौराहे पर सड़क की भूमि दबाकर लगाए गए लोहे के शटर और टीन शेड को भी बलपूर्वक हटा दिया गया।
खताड़ी में हाई-वोल्टेज ड्रामा: ईओ और पुष्कर दुर्गापाल के बीच तीखी नोकझोंक
अभियान जब मोहल्ला खताड़ी क्षेत्र में पहुँचा, तो माहौल राजनीतिक हो गया। जब पालिका की टीम कुछ पुराने खोखों को हटाने की तैयारी कर रही थी, तब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व दर्जा राज्य मंत्री पुष्कर दुर्गापाल मौके पर पहुँच गए। उन्होंने कार्रवाई का विरोध करते हुए इसे गरीब दुकानदारों के खिलाफ उत्पीड़न बताया।
देखते ही देखते नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी आलोक उनियाल और पुष्कर दुर्गापाल के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। जहाँ एक ओर ईओ नियमों और सरकारी आदेशों का हवाला दे रहे थे, वहीं दूसरी ओर कांग्रेसी नेता इसे मनमानी कार्रवाई करार दे रहे थे। विवाद इतना बढ़ गया कि सुरक्षा के लिहाज से पुलिस बल को भी हस्तक्षेप करना पड़ा। भारी विरोध को देखते हुए प्रशासन को फिलहाल उन खोखों को बिना हटाए ही वापस लौटना पड़ा, जिससे टीम की कार्रवाई में कुछ समय के लिए बाधा उत्पन्न हुई।
3 दिन का अल्टीमेटम: चाबियाँ ज़ब्त, अब डीएम लेंगे फैसला
विवाद के बाद फिलहाल एक बीच का रास्ता निकाला गया है। जिन खोखा स्वामियों के खिलाफ कार्रवाई रुकी है, उनके मालिकों ने जिलाधिकारी को अपनी समस्या बताते हुए एक प्रार्थना पत्र सौंपा है। पालिका प्रशासन ने नरमी बरतते हुए उन्हें 3 दिन का समय दिया है, लेकिन सुरक्षा के तौर पर संबंधित खोखों की चाबियाँ अपने कब्जे में ले ली हैं।
“अतिक्रमण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खताड़ी क्षेत्र में कार्रवाई सीएम हेल्पलाइन की शिकायत के आधार पर की गई है। हमने सामान जब्त किया है और जो निर्माण आज नहीं टूटे हैं, उन पर निर्धारित समय सीमा के बाद कानून सम्मत कार्रवाई की जाएगी।” – आलोक उनियाल, ईओ, नगर पालिका परिषद रामनगर
जब्त हुआ सामान, व्यापारियों में दहशत
अभियान के दौरान पालिका टीम ने केवल निर्माण ही नहीं तोड़े, बल्कि सड़कों पर अवैध रूप से रखे गए काउंटर, बोर्ड और अन्य व्यावसायिक सामान को भी जब्त कर लिया है। पालिका की इस कार्रवाई से उन व्यापारियों में भी डर का माहौल है जिन्होंने फुटपाथों और नालियों को अपनी दुकान का हिस्सा बना लिया था।
नगर पालिका का कहना है कि यह अभियान केवल एक दिन के लिए नहीं है। शहर के सौंदर्यीकरण और यातायात को सुगम बनाने के लिए चिन्हित किए गए अन्य इलाकों में भी जल्द ही जेसीबी गरजेगी।
गर्माया राजनीतिक माहौल
रामनगर की इस कार्रवाई ने शहर की राजनीति में उबाल ला दिया है। कांग्रेस जहाँ इसे बदले की भावना और गरीबों के रोजगार पर चोट बता रही है, वहीं सत्तापक्ष और पालिका प्रशासन इसे शहर के विकास के लिए अनिवार्य कदम मान रहे हैं। स्थानीय निवासियों का एक वर्ग इस कार्रवाई का समर्थन कर रहा है, जिनका मानना है कि नालियों पर अतिक्रमण के कारण ही बरसात में शहर जलमग्न हो जाता है।
रामनगर अवैध अतिक्रमण अभियान ने यह साफ कर दिया है कि प्रशासन अब सुस्त पड़ने वाला नहीं है। अब सबकी निगाहें तीन दिन बाद होने वाली अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या प्रशासन अपने सख्त रुख पर कायम रहेगा या राजनीतिक दबाव में यह अभियान ठंडा पड़ जाएगा? यह आने वाला वक्त ही बताएगा। फिलहाल, शहर की सड़कों पर पसरा सन्नाटा और टूटे हुए मलबे अवैध कब्जे की दास्तां बयां कर रहे हैं।



