
देहरादून। देश की सांस्कृतिक विरासत और संतों के सम्मान की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पंजाब के आदमपुर हवाई अड्डे का नाम बदलकर संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज के नाम पर समर्पित किए जाने के फैसले का देश भर में स्वागत हो रहा है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस निर्णय को सामाजिक समरसता की दिशा में एक ‘युगांतरकारी कदम’ करार दिया है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि गुरु रविदास जी की जयंती के पावन अवसर पर लिया गया यह निर्णय प्रधानमंत्री मोदी की उस दूरदर्शी सोच का परिचायक है, जो महापुरुषों के विचारों को आधुनिक भारत की पहचान से जोड़ना चाहती है।
संत रविदास के विचारों को सच्ची श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि आदमपुर हवाई अड्डे का नामकरण संत रविदास जी के नाम पर करना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि उनके महान विचारों, सामाजिक चेतना और मानवता के प्रति उनके असीम समर्पण को राष्ट्र की एक सच्ची श्रद्धांजलि है।
मुख्यमंत्री ने कहा: “संत रविदास जी ने मध्यकाल में उस समय समानता और करुणा का संदेश दिया जब समाज कुरीतियों से जूझ रहा था। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने सदियों पहले थे। हवाई अड्डे को उनके नाम से जोड़ना नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से परिचित कराने का एक सशक्त माध्यम बनेगा।”
‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’: धामी ने किया आदर्शों का स्मरण
मुख्यमंत्री ने संत रविदास जी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने भेदभाव, ऊँच-नीच और असमानता के विरुद्ध आध्यात्मिक आवाज़ उठाकर एक समतामूलक समाज की परिकल्पना प्रस्तुत की थी। धामी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज केंद्र सरकार उसी ‘अंत्योदय’ और ‘सबका साथ-सबका विकास’ के मंत्र पर काम कर रही है, जिसका मूल आधार संत रविदास जी की शिक्षाओं में मिलता है।
धामी ने आगे कहा कि संत रविदास का संदेश सरल था—सेवा और प्रेम। आज जब भारत एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है, तो ऐसे समय में अपनी जड़ों और अपने संतों के प्रति यह सम्मान राष्ट्रीय गौरव को और अधिक मजबूती प्रदान करता है।
महापुरुषों के सम्मान की नई परंपरा
पुष्कर सिंह धामी ने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में देश के गुमनाम नायकों और महान संतों को उचित सम्मान देने की एक नई परिपाटी शुरू हुई है। चाहे वह भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाना हो या अब आदमपुर हवाई अड्डे का नामकरण, यह दिखाता है कि वर्तमान सरकार भारत की आध्यात्मिक और सामाजिक विरासत को अक्षुण्ण रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
सामाजिक और सांस्कृतिक एकता पर प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि आदमपुर हवाई अड्डे (जो जालंधर क्षेत्र के पास स्थित है और दोआबा क्षेत्र का प्रमुख केंद्र है) का नाम संत रविदास जी के नाम पर रखने से एक बहुत बड़े जनसमुदाय की भावनाओं को सम्मान मिला है। मुख्यमंत्री धामी ने विश्वास जताया कि:
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सामाजिक एकता: यह निर्णय विभिन्न वर्गों के बीच सद्भाव और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देगा।
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सांस्कृतिक चेतना: युवाओं में अपने महापुरुषों के प्रति गर्व की अनुभूति होगी।
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पर्यटन और पहचान: इस हवाई अड्डे के माध्यम से अब दुनिया भर से आने वाले यात्री भारत की ‘संत परंपरा’ से सीधे जुड़ सकेंगे।
प्रधानमंत्री का व्यक्त किया आभार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड की सवा करोड़ जनता की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक कदम सामाजिक न्याय की अवधारणा को धरातल पर उतारने जैसा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड, जो स्वयं एक ‘देवभूमि’ है और जहाँ संतों का विशेष स्थान है, वहाँ के लोग इस निर्णय से अत्यंत हर्षित हैं।
समरस भारत की ओर बढ़ते कदम
आदमपुर हवाई अड्डे का यह नया नामकरण भारतीय लोकतंत्र की उस परिपक्वता को दर्शाता है, जहाँ आधुनिक बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का नामकरण उन आध्यात्मिक महापुरुषों के नाम पर किया जा रहा है, जिन्होंने समाज को जोड़ने का काम किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह बयान स्पष्ट करता है कि राज्य और केंद्र सरकारें मिलकर एक ऐसे ‘श्रेष्ठ भारत’ का निर्माण कर रही हैं, जहाँ विकास भी होगा और अपनी संस्कृति का सम्मान भी।



