16 दिन से जारी छात्र आंदोलन ने लिया बड़ा मोड़, पहली बैरिकेडिंग पार कर नई विधानसभा की ओर बढ़े प्रदर्शनकारी; पारदर्शी भर्ती परीक्षा और रोजगार व्यवस्था की मांग, कई जगह छात्रों को रोकने का दावा
रांची: झारखंड की राजधानी रांची में सोमवार, 10 अगस्त को छात्रों के आंदोलन ने बड़ा रूप ले लिया। पिछले 16 दिनों से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों ने आज विधानसभा घेराव का ऐलान किया था। तय कार्यक्रम के तहत बड़ी संख्या में छात्र राजधानी की सड़कों पर उतर आए और हाथों में पोस्टर-बैनर लेकर नई विधानसभा की ओर कूच कर दिया। प्रदर्शनकारियों की संख्या लगातार बढ़ती गई और कई स्थानों पर सड़कें छात्रों के हुजूम से भर गईं। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने राजधानी के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
छात्रों का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल किसी एक परीक्षा या एक भर्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था, निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया और युवाओं के रोजगार के अधिकार से जुड़ा मुद्दा है। प्रदर्शनकारी लगातार मांग कर रहे हैं कि सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए और अगर कहीं अनियमितता के आरोप सामने आते हैं तो उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं, प्रशासन की ओर से छात्रों को विधानसभा के आसपास पहुंचने से रोकने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, संवेदनशील स्थानों और विधानसभा की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई है। जिला सीमाओं और प्रमुख मार्गों पर बसों तथा निजी वाहनों की जांच किए जाने की भी बात सामने आई है। प्रशासन का प्रयास है कि राजधानी में अचानक बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के प्रवेश से कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित न हो।
सड़कों पर उमड़ा छात्रों का हुजूम, विधानसभा की ओर बढ़ा मार्च
सोमवार सुबह से ही रांची में छात्रों की हलचल तेज हो गई थी। राज्य के अलग-अलग जिलों से छात्र ट्रेन, बस और निजी वाहनों के जरिए रांची पहुंचने लगे। आंदोलन में शामिल छात्रों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।
मार्च के दौरान कई छात्र हाथों में पोस्टर और बैनर लिए नजर आए। प्रदर्शनकारियों के बीच सरकार से अपनी मांगों को स्वीकार करने की अपील की जा रही थी। जैसे-जैसे छात्र विधानसभा की ओर बढ़े, प्रशासन की ओर से लगाए गए सुरक्षा घेरों और बैरिकेडिंग के कारण कई जगहों पर स्थिति तनावपूर्ण भी दिखाई दी।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि कई स्थानों पर छात्रों को रोकने और कुछ को हिरासत में लेने की कार्रवाई की गई। हालांकि, पुलिस का कहना है कि छात्रों को आंदोलन करने से रोका नहीं गया है और सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकना है।
छात्रों ने कुछ स्थानों पर सड़क पर बैठकर भी विरोध जताया। उनका कहना है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण है और वे सरकार से केवल अपनी मांगों पर स्पष्ट जवाब चाहते हैं।
पहली बैरिकेडिंग पार कर आगे बढ़े प्रदर्शनकारी
विधानसभा की ओर बढ़ रहे छात्रों ने कई स्थानों पर पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेडिंग का सामना किया। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, उन्होंने पहली बैरिकेडिंग पार कर नई विधानसभा की ओर आगे बढ़ना शुरू कर दिया। इसके बाद सुरक्षा बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मोर्चा संभाला।
विधानसभा के आसपास प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी कर दी है। संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ आने-जाने वाले रास्तों पर निगरानी बढ़ाई गई है।
प्रशासन की कोशिश है कि प्रदर्शनकारी विधानसभा परिसर के बेहद करीब न पहुंचें और स्थिति नियंत्रण से बाहर न हो। वहीं, छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
एंबुलेंस में पहुंचे देवेंद्र महतो, आंदोलन को मिला नया समर्थन
छात्र आंदोलन से जुड़े देवेंद्र महतो भी इस मार्च में शामिल हुए। बताया जा रहा है कि वह पिछले कुछ समय से भूख हड़ताल पर हैं और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के बावजूद एंबुलेंस के जरिए विधानसभा मार्च में पहुंचे।
उनकी मौजूदगी ने आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच उत्साह बढ़ाया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आंदोलनकारियों की मांगों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और सरकार को छात्रों के साथ बातचीत कर समाधान निकालना चाहिए।
छात्रों का कहना है कि लंबे समय से चल रहे आंदोलन के बावजूद यदि उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होता है तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जा सकता है।
क्या हैं छात्रों की मुख्य मांगें?
रांची में चल रहा छात्र आंदोलन मुख्य रूप से सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर है। प्रदर्शनकारी आरोप लगा रहे हैं कि कई परीक्षाओं को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं और युवाओं में परीक्षा व्यवस्था को लेकर भरोसे का संकट पैदा हुआ है।
एक छात्र ने बातचीत के दौरान कहा कि सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए और छात्रों की समस्याओं पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिसमें किसी भी अभ्यर्थी को यह आशंका न रहे कि पैसे, सिफारिश या किसी अन्य माध्यम से उसे नुकसान या किसी दूसरे को अनुचित फायदा मिल सकता है।
छात्रों की प्रमुख मांगों में भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच और युवाओं के लिए रोजगार के बेहतर अवसर शामिल हैं।
कहां से शुरू हुआ विधानसभा मार्च?
छात्र पिछले 16 दिनों से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे हैं। स्टेडियम से झारखंड विधानसभा की दूरी करीब 12 किलोमीटर बताई जा रही है। हालांकि, सभी प्रदर्शनकारियों को एक स्थान पर एकत्र करने के लिए जगन्नाथपुर थाना के पास स्थित मैदान को मार्च के लिए निर्धारित किया गया था।
छात्रों के कार्यक्रम के अनुसार सुबह करीब 11 बजे तक बड़ी संख्या में छात्र यहां एकत्र होने वाले थे। इसके बाद सभी छात्र एकजुट होकर विधानसभा की ओर कूच करने वाले थे। विधानसभा से करीब दो किलोमीटर पहले बड़ी संख्या में छात्रों के जमा होने की योजना थी।
प्रशासन ने इसी संभावित भीड़ को देखते हुए रास्तों पर पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी थी।
मार्च को लेकर प्रशासन की तैयारी
- प्रमुख चौक-चौराहों पर बैरिकेडिंग की गई।
- संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
- विधानसभा के आसपास सुरक्षा घेरा मजबूत किया गया।
- शहर में आने वाले प्रमुख मार्गों पर निगरानी बढ़ाई गई।
- जिला सीमाओं और प्रमुख रास्तों पर वाहनों की जांच की गई।
- प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों को अलर्ट रखा।
16 दिन से जारी है छात्रों का आंदोलन
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का आंदोलन सोमवार को 17वें दिन में प्रवेश कर गया। छात्रों और सरकार के बीच बातचीत के दौर भी हुए, लेकिन प्रदर्शनकारियों के मुताबिक सभी मांगों पर सहमति नहीं बन सकी। इसी वजह से आंदोलन लगातार जारी है।
छात्रों का कहना है कि बातचीत तभी सार्थक होगी जब सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय ले। वहीं, प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।
10 अगस्त का दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि छात्रों ने इसी दिन विधानसभा घेराव का कार्यक्रम घोषित किया था। बड़ी संख्या में छात्रों के रांची पहुंचने के कारण प्रशासन के सामने भीड़ को नियंत्रित करने और प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की चुनौती है।
JPSC से जुड़े कथित मामले में जांच को लेकर भी उठ रहे सवाल
छात्र आंदोलन के बीच झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और JPSC से जुड़े मामलों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे आरोपों की जांच के संदर्भ में वित्तीय लेन-देन और कथित मनी ट्रेल जैसे पहलुओं पर भी चर्चा हो रही है।
जांच के दायरे में यह देखा जा सकता है कि यदि परीक्षा में कथित तौर पर पैसे का इस्तेमाल हुआ तो पैसा किससे लिया गया, किसके पास पहुंचा और उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया। बैंक खातों, UPI लेन-देन और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों की जांच से कथित लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की जा सकती है।
इसके अलावा परीक्षा से पहले और बाद में हुए असामान्य वित्तीय लेन-देन, कथित बिचौलियों से जुड़े खातों और संपत्तियों की भी जांच का पहलू महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, किसी भी व्यक्ति या संस्था पर आरोप को जांच पूरी होने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक, ओएमआर या एडमिट कार्ड में हेरफेर और किसी अभ्यर्थी को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोपों में भी वित्तीय लेन-देन की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
सीएम आवास के बाहर बीजेपी का भी प्रदर्शन
छात्रों के विधानसभा मार्च के बीच झारखंड की राजनीति भी गरमा गई। बीजेपी नेताओं ने सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं ने राज्य में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग उठाई।
बीजेपी की राज्य इकाई के प्रमुख आदित्य साहू और विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में पार्टी कार्यकर्ता और नेता पोस्टर-प्लेकार्ड लेकर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग की।
रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बीजेपी के कई नेताओं को हिरासत में लिया। वहीं, बीजेपी की ओर से यह आरोप लगाया गया कि कुछ नेताओं को सुबह से ही नजरबंद किया गया था। इसको लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होने की संभावना है।
छात्र आंदोलन और सियासत आमने-सामने
रांची में सोमवार को एक तरफ छात्र अपने रोजगार और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को लेकर विधानसभा की ओर बढ़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ विपक्ष भी इसी मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने में जुटा है। ऐसे में छात्र आंदोलन अब केवल शैक्षणिक और रोजगार से जुड़े मुद्दे तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि इसका राजनीतिक असर भी नजर आने लगा है।
हालांकि छात्रों की ओर से लगातार यही कहा जा रहा है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था के लिए है।
फिलहाल रांची की सड़कों पर छात्रों की भीड़, पुलिस की भारी तैनाती और जगह-जगह बैरिकेडिंग के बीच स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर विधानसभा तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा घेरे को मजबूत किए हुए है।
रांची का यह छात्र आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। 16 दिनों से जारी प्रदर्शन के बाद 10 अगस्त का विधानसभा मार्च छात्रों की एकजुटता और सरकार के लिए उनकी मांगों की गंभीरता का बड़ा प्रदर्शन बन गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या ठोस कदम उठाती है और क्या बातचीत के जरिए इस लंबे आंदोलन का समाधान निकाला जा सकेगा।
