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भारतीय, फ्रांसीसी-जर्मन रक्षा कंपनियों ने सेना को ‘कटाना’ हथियार प्रणाली की आपूर्ति के लिए रणनीतिक समझौता किया

— साझेदारी से मेक इन इंडिया को बल, रक्षा उत्पादन में बढ़ेगी स्वदेशी क्षमता

नई दिल्ली: भारत की एक प्रमुख रक्षा और एयरोस्पेस कंपनी ने भारतीय सेना की आधुनिक जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से फ्रांस और जर्मनी के संयुक्त रक्षा समूह के साथ एक महत्वपूर्ण रणनीतिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह साझेदारी न केवल भारतीय सेना को युद्ध के बदलते स्वरूप के अनुकूल अत्याधुनिक हथियार प्रणाली प्रदान करेगी, बल्कि भारत में स्वदेशी रक्षा उत्पादन को भी गति देगी। इस करार की घोषणा सोमवार को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के माध्यम से की गई।

विज्ञप्ति के अनुसार, दोनों पक्ष भारतीय सेना के लिए उन्नत श्रेणी की “कटाना हथियार प्रणाली” की पेशकश, उत्पादन और उपरांत-सेवा सहायता प्रदान करने पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित करेंगे। यह प्रणाली आधुनिक युद्धक्षेत्र की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विकसित की गई है और इसमें उच्च मारक क्षमता, हल्के वजन की संरचना, बेहतर लक्ष्य-सटीकता तथा कठिन परिस्थितियों में भी उच्च विश्वसनीयता जैसी खूबियां सम्मिलित हैं।

रक्षा क्षेत्र में भारत का बढ़ता वैश्विक सहयोग

भारत पिछले एक दशक में वैश्विक रक्षा साझेदारियों का केंद्र बनकर उभरा है। फ्रांस और जर्मनी जैसे रक्षा-तकनीक के अग्रणी देश भारतीय बाजार और भारत की रणनीतिक स्थिति को अत्यधिक महत्व देते हैं। ऐसे में यह समझौता भारत की बढ़ती सैन्य आवश्यकताओं व इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलते सुरक्षा समीकरणों के संदर्भ में और भी अहम माना जा रहा है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, कटाना प्रणाली का भारतीय सेना में संभावित इस्तेमाल मध्य-स्तरीय से लेकर उच्च-स्तरीय युद्ध अभियानों में किया जा सकता है। इसके डिजाइन में प्रयुक्त तकनीक इसे कई प्रकार के मिशनों—चाहे वह आतंकवाद विरोधी कार्रवाई हो, सीमा सुरक्षा हो या उन्नत पैदल सेना अभियानों—में प्रभावी बनाती है।

मेक इन इंडिया को मिलेगा प्रोत्साहन

सरकार द्वारा शुरू की गई ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ नीति के तहत रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को विशेष महत्व दिया गया है। इस समझौते में भी दोनों कंपनियों ने हथियार प्रणाली का स्थानीय स्तर पर उत्पादन करने और भारतीय उद्योगों व MSME सेक्टर को निर्माण शृंखला में शामिल करने की प्रतिबद्धता जताई है।
इसके माध्यम से देश में न केवल रोजगार बढ़ेगा, बल्कि भारतीय उद्योगों को उन्नत रक्षा तकनीक के साथ काम करने का मौका भी मिलेगा, जो दीर्घकालिक रूप से स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करेगा।

केंद्रीय रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “इस तरह की साझेदारियां हमें रक्षा तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने में मदद करती हैं। भारत का लक्ष्य आने वाले वर्षों में न केवल अपनी रक्षा जरूरतों की पूर्ति करना है, बल्कि वैश्विक स्तर पर रक्षा निर्यात में भी अग्रणी देशों में शामिल होना है।”

कटाना हथियार प्रणाली: क्या है विशेष

हालांकि कंपनियों ने प्रणाली की कई तकनीकी विशेषताओं का खुलासा गोपनीयता के कारण नहीं किया है, लेकिन विज्ञप्ति में इसे ऐसी हथियार प्रणाली बताया गया है जो आधुनिक युद्धक्षेत्र की मांग—कम वजन, बेहतर नियंत्रण, बहु-स्तरीय सुरक्षा प्रोटोकॉल और उच्च गुणवत्ता वाले सामग्रियों के साथ डिजाइन—को पूरा करती है।

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि कटाना प्रणाली का भारतीय प्लेटफॉर्म्स के साथ एकीकरण काफी सहज हो सकता है, क्योंकि इसे मॉड्यूलर डिजाइन पर विकसित किया गया है। इससे सेना को इसे विभिन्न टुकड़ियों व अभियानों में तेजी से तैनात करने में मदद मिलेगी।

कंपनियों की प्रतिक्रिया

भारतीय रक्षा कंपनी के चेयरमैन ने इस समझौते को “भारत की रक्षा क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण निवेश” बताया। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी न केवल उन्नत हथियार प्रणाली की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी, बल्कि तकनीकी सहयोग और अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में भी दीर्घकालिक लाभ प्रदान करेगी।

फ्रांसीसी-जर्मन रक्षा समूह के प्रवक्ता ने कहा, “भारत वैश्विक सुरक्षा ढांचे में एक अहम भागीदार है। कटाना प्रणाली को भारतीय वातावरण और परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप अनुकूलित किया जा रहा है, ताकि यह भारतीय सेना की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरी उतर सके।”

रक्षा उत्पादन का भविष्य और भारत की भूमिका

भारतीय रक्षा क्षेत्र में पिछले वर्षों में कई बड़े समझौते हुए हैं—चाहे वह लड़ाकू विमान, टोही ड्रोन, मिसाइल प्रणाली, वेपनरी या उन्नत इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम हों। इस साझेदारी को उसी श्रृंखला में एक नया और मजबूत कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत में रक्षा उत्पादन का दायरा और विस्तृत होगा। कई विदेशी कंपनियां पहले ही संयुक्त उपक्रम (JVs) या उत्पादन इकाइयाँ स्थापित कर चुकी हैं। इन्हीं प्रयासों के कारण आज भारत दुनिया के शीर्ष 25 रक्षा निर्यातक देशों में शामिल हो गया है और अगले दशक में इस सूची में शीर्ष 10 में आने का लक्ष्य रखता है।

भारतीय सेना की आधुनिकीकरण योजना को गति

भारतीय सेना लंबे समय से पैदल सेना और विशेष बलों के लिए आधुनिक हथियार प्रणालियों की खरीद और अपग्रेडेशन पर जोर दे रही है। कटाना प्रणाली का प्रस्ताव उसी व्यापक आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें नई राइफलें, नाइट-फाइटिंग उपकरण, प्रिसिजन स्ट्राइक वेपन, टैक्टिकल कमांड सिस्टम और हल्के लेकिन अधिक क्षमता वाले हथियार शामिल हैं।

रक्षा सूत्रों का कहना है कि भारतीय सेना अगले दो वर्षों में कई श्रेणियों के हथियारों की व्यापक खरीद करेगी, जिसमें घरेलू कंपनियों और विदेशी साझेदारियों को प्राथमिकता मिलेगी।

भारतीय और फ्रांसीसी-जर्मन रक्षा कंपनियों के बीच कटाना हथियार प्रणाली की आपूर्ति के लिए हुआ यह समझौता न सिर्फ एक व्यावसायिक साझेदारी है, बल्कि भारत की रक्षा रणनीति—आधुनिकीकरण, स्वदेशीकरण और वैश्विक सहयोग—के तीन प्रमुख स्तंभों को एक साथ आगे बढ़ाने वाली पहल भी है। यदि यह परियोजना सफलतापूर्वक लागू होती है, तो यह भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता को एक नए स्तर पर पहुंचा सकती है और भारतीय सेना को अधिक सक्षम, आधुनिक व तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाएगी।

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