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आंध्र प्रदेश में मार्कापुरम के पास बस और ट्रक की भिड़ंत के बाद लगी भीषण आग, 12 यात्री जिंदा जले; 20 गंभीर रूप से घायल

अमरावती/मार्कापुरम (ब्यूरो): आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले से गुरुवार तड़के एक हृदय विदारक घटना सामने आई है। मार्कापुरम के रेयावरम क्षेत्र में एक निजी ट्रेवल्स बस और तेज रफ्तार टिपर लॉरी (ट्रक) के बीच हुई आमने-सामने की भीषण टक्कर ने 12 परिवारों की खुशियां छीन लीं। टक्कर इतनी जोरदार थी कि देखते ही देखते बस आग के गोले में तब्दील हो गई, जिससे गहरी नींद में सो रहे यात्रियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 12 लोगों की जलकर मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 20 अन्य यात्री गंभीर रूप से झुलस गए हैं।

यह हादसा सुबह करीब 5:45 बजे हुआ, जब उजाला होने ही वाला था और बस अपनी मंजिल के करीब थी। इस घटना ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुरक्षा और भारी वाहनों की अनियंत्रित रफ्तार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हादसे का मंजर: चीख-पुकार और धूं-धूं कर जलती बस

जानकारी के अनुसार, यह निजी ट्रेवल्स बस तेलंगाना के जगित्याल/निर्मल क्षेत्र से यात्रियों को लेकर आंध्र प्रदेश के कालिगिरी/नेल्लोर की ओर जा रही थी। जब बस मार्कापुरम के पास रेयावरम पहुंची, तभी विपरीत दिशा से आ रहे एक तेज रफ्तार टिपर लॉरी ने बस को जोरदार टक्कर मार दी। चश्मदीदों के मुताबिक, टक्कर होते ही बस के डीजल टैंक में धमाका हुआ और आग की लपटों ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया।

हादसे के समय बस में लगभग 40 से अधिक यात्री सवार थे। आग इतनी तेजी से फैली कि अंदर फंसे यात्रियों को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला। बस के भीतर से उठती चीख-पुकार ने आसपास के ग्रामीणों को झकझोर दिया, लेकिन आग की भीषणता के कारण कोई भी तुरंत पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। आंध्र प्रदेश बस हादसा मार्कापुरम के इस भयावह दृश्य ने पूरे इलाके में मातम पसरा दिया है।

20 यात्रियों ने खिड़की तोड़कर बचाई जान, कई अब भी गंभीर

मौत के इस तांडव के बीच लगभग 20 यात्रियों ने अदम्य साहस दिखाते हुए बस की खिड़कियां तोड़कर बाहर छलांग लगा दी और अपनी जान बचाने में सफल रहे। हालांकि, इनमें से अधिकांश यात्री गंभीर रूप से झुलस गए हैं या चोटिल हैं। स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग की टीमें सूचना मिलने के कुछ ही समय बाद मौके पर पहुंच गईं और आग पर काबू पाने की कोशिश की।

घायलों को तत्काल एंबुलेंस के जरिए नजदीकी सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि 5-6 यात्रियों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए बड़े चिकित्सा केंद्रों में रेफर किया जा सकता है। पुलिस प्रशासन अब मृतकों की शिनाख्त करने की कोशिश कर रहा है, जो कि शवों के अत्यधिक जल जाने के कारण एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने जताया गहरा शोक

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस भीषण दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (SP) से फोन पर बात कर घटना की पूरी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि घायलों को ‘बेस्ट’ मेडिकल केयर मुहैया कराई जाए और इसमें किसी भी तरह की कोताही न बरती जाए।

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) द्वारा जारी बयान में कहा गया, “मार्कापुरम के पास हुआ यह हादसा अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। हमारी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं। प्रशासन को आदेश दिया गया है कि वे पीड़ितों की हर संभव मदद करें और हादसे के कारणों की गहन जांच कर रिपोर्ट सौंपें।” मुख्यमंत्री ने यह भी आशंका जताई है कि गंभीर रूप से घायलों की स्थिति को देखते हुए मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता है।

जांच के घेरे में ‘ओवरस्पीडिंग’ और ‘लॉजिस्टिक सुरक्षा’

शुरुआती जांच में पुलिस का मानना है कि हादसा टिपर लॉरी की तेज रफ्तार और संभवतः चालक की झपकी के कारण हुआ हो सकता है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे बस और ट्रक दोनों के फिटनेस सर्टिफिकेट, परमिट और चालकों के रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं। आंध्र प्रदेश बस हादसा मार्कापुरम ने एक बार फिर रात के समय चलने वाली निजी बसों के लिए कड़े नियम बनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि रेयावरम के इस स्ट्रेच पर अक्सर भारी वाहन अनियंत्रित गति से चलते हैं, जिससे पहले भी छोटी-मोटी दुर्घटनाएं होती रही हैं। पुलिस ने टिपर लॉरी के चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और फॉरेंसिक टीम साक्ष्य जुटाने में लगी है।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

जैसे ही हादसे की खबर तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के संबंधित जिलों में पहुंची, यात्रियों के परिजनों में हड़कंप मच गया। अस्पताल के बाहर अपनों की तलाश में जुटे लोगों की आंखों में आंसू और चेहरे पर दहशत साफ देखी जा सकती है। प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि पीड़ितों के परिवारों को सही जानकारी मिल सके।


मार्कापुरम की यह घटना सड़क सुरक्षा के दावों की पोल खोलती है। जब तक सड़कों पर भारी वाहनों की रफ्तार और चालकों की कार्य-अवधि पर लगाम नहीं कसी जाएगी, तब तक ऐसे ‘चलते-फिरते श्मशान’ मासूमों की जान लेते रहेंगे।

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