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पुणे : शिवाजी महाराज के स्वराज की यात्रा अटक से लेकर कटक तक और गुजरात से लेकर बंगाल तक पहुंची जिसने समग्र भारत को स्वतंत्रता की चेतना देने का काम किया -अमित शाह

The Hill India News
Last updated: February 21, 2023 5:15 pm
The Hill India News
Published: February 19, 2023
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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आज महाराष्ट्र के पुणे में शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित थीम पार्क ‘शिव सृष्टि’ के प्रथम चरण का लोकार्पण किया। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री एकनाथ शिंदे व उपमुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

अमित शाह ने छत्रपति शिवाजी महाराज को उनके देश, धर्म, स्वराज और स्वभाषा के लिए दिए गये योगदान के लिए प्रणाम किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज शिव जयंती के दिन शिव सृष्टि के प्रथम चरण का लोकार्पण होने के बाद कल से यह जनता के लिए खुल जाएगा। यह दिन विश्व भर में शिवाजी के जीवन से संदेश व प्रेरणा लेने वाले लोगों के लिए ऐतिहासिक है। श्री शाह ने कहा कि ‘शिव शाहिर’ बाबासाहब पुरंदरे जी ने शिवचरित्र को शब्दबद्ध करने के लिए देशभर में घूम-घूम कर अपना जीवन समर्पित किया जिससे शिवाजी महाराज की शौर्यगाथाएँ जन जन तक पहुँची। उनके इसी प्रयास से आज देश में शिवाजी महाराज को जानने वालों की संख्या इतनी अधिक है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए बाबासाहेब से विनती कर गुजरात के हर जिले में जाणता राजा के कार्यक्रम को आयोजित करवाया। वहां के युवा इस कार्यक्रम को देखकर शिवाजी महाराज के अनन्य भक्त बनकर बाहर निकलते थे। श्री शाह ने बाबासाहेब के सपने को साकार करने के लिए उनके इस ईश्वरीय काम को आगे बढ़ाने के लिए ट्रस्टियों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि शिवाजी का जीवन एक ऐसा संदेश है जो आज भी कश्मीर से कन्याकुमारी और द्वारका से कलकत्ता के गंगा सागर तक सभी लोगों को प्रेरित करता है। बाबासाहेब ने दुनिया भर से शिवाजी महाराज के जीवन व उनके कृतित्व के अधिकृत दस्तावेजों को एकत्रित कर उनका संकलन कर शिव चरित्र के इतिहास को नई पीढ़ी के लिए तैयार करने का काम किया तभी तो बाबासाहेब पुरन्दरे का नाम परिवर्तित कर शिवशाहीर बाबासाहेब पुरंदरे रखा गया। श्री शाह ने कहा कि बाबासाहेब ने अपने जीवन में गोवा, दादरा और नगर हवेली व दमन और दीव के मुक्ति संग्राम में जुड़कर एक यशस्वी योगदान दिया।

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अमित शाह ने कहा कि मित्रों आज यहां शिव सृष्टि के चार चरणों में से पहला चरण समाप्त हुआ है।  शाह ने विश्वास जताया कि 438 करोड़ रुपये का यह प्रॉजेक्ट निश्चित रूप से तय किए गए टाइम टेबल में समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में 60 करोड़ रुपये की लागत से शिवाजी महाराज के जीवन की अनेक घटनाओं को संजोने का प्रयास किया गया है। यहां 3D में शिवकालीन दुर्गों का सफर, शिवाजी के राज्याभिषेक और उनके आगरा से मुगलों की चुंगल से निकलने जैसे कई प्रमुख प्रसंगों को संजोया गया है। यहां आने वाली देश की युवा पीढ़ी शिवाजी महाराज के जीवन को भलीभांति जानकर उनके स्वधर्म,स्वभाषा के लिए जीने व स्वराज के लिए हमेशा बलिदान देने की तत्परता दिखाने के विचारों को प्राप्त करेगी। श्री शाह ने कहा कि सन् 1967 में अप्रैल माह से सतारा की राजमाता सुमित्रा राजे भोंसले व श्रीमंत छत्रपति प्रताप सिंह महाराज के मार्गदर्शन में बाबासाहेब द्वारा सतारा में प्रतिष्ठान की स्थापना की गयी और तब से पूरे देश भर में बाबासाहेब ने 12 हजार से ज्यादा शिव व्याख्यान किए, 1200 से ज्यादा जाणता राजा महानाट्य किए जिसे आज यहां लगाकर पूरे भारत को शिवाजी के विचारों का संदेश देने का काम किया गया है।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि अंबे गांव में निर्माणाधीन शिव सृष्टि निश्चित रूप से पूरे एशिया खंड का सर्वाधिक भव्य ऐतिहासिक थीम पार्क बनने वाला है क्योंकि  ऐतिहासिक थीम पार्क का यह कॉन्सेप्ट एशिया में शायद ही कहीं है। यहां बहुत बारीकी से ऐतिहासिक तथ्यों की सत्यता का सत्यापन कर इन्हें संजोया गया है जो कि बहुत सराहनीय कार्य है। शिव सृष्टि के निर्माण में तकनीक और इतिहास दोनों का अद्भुत मिलन देखने को मिलता है। यहां होलोग्राफी प्रोजेक्ट मैपिंग, मिनिएचर्स मोशन, सिम्युलेशन, 3D और 4D तकनीक और लाइट एंड साउंड तकनीक का अद्भुत सम्मिश्रण कर इतिहास को जीवित करने का प्रयास किया गया है जो कि निश्चित रूप से शिवाजी महाराज के जीवन के संदेश को ना केवल महाराष्ट्र बल्कि देश भर की युवा पीढ़ी तक पहुंचाएगा। यह स्थान दुनिया भर के इतिहासविदों के लिए बहुत महत्वपूर्ण स्थान बनेगा।

अमित शाह ने कहा कि शिवाजी महाराज का जीवन सत्ता की लालसा से प्रेरित ना होकर  100 सालों से अधिक समय तक किए गए अत्याचारों के सामने विद्रोह व संघर्ष करने, स्वधर्म के प्रति निष्ठा के साथ संघर्ष करने, स्वभाषा को महिमा मंडित करने तथा स्वराज को स्थापित करने की लालसा से प्रेरित था। उन्होंने कहा कि स्वराज स्थापित कर शिवाजी महाराज ने पूरी दुनिया को संदेश दिया कि हिंदुस्तान पर कोई अत्याचार नहीं कर सकता,यहां की जनता को कोई अपमानित नहीं कर सकता है। शिवाजी महाराज का ये संदेश सन् 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में भी दिखाई दिया।  शिवाजी महाराज ने स्वराज की एक छोटी सी लड़ाई से शुरुआत कर 50 साल की आयु में राज्याभिषेक कर एक बहुत बड़े साम्राज्य के छत्रपति बनने का सफर तय किया। सन् 1680 के बाद भी शिवाजी के विचारों की यह यात्रा रुकी नहीं। उनके बाद भी कई छत्रपति व पेशवा बने और उन्होंने वर्ष 1818 तक इस परंपरा को आगे बढ़ाया।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि शिवाजी महाराज के स्वराज की यात्रा अटक से लेकर कटक तक और गुजरात से लेकर बंगाल तक पहुंची जिसने समग्र भारत को  स्वतंत्रता की चेतना देने का काम किया। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज द्वारा शुरु किया गया स्वराज के लिए संघर्ष आज भी जारी है। स्वराज,स्वधर्म और स्वभाषा के लिए उनका आग्रह उनके द्वारा किए गये हर कार्य में झलकता था। उन्होंने पंचांग शुद्धि करवाई, स्वभाषा में शासकीय शब्दकोष, सप्तकोटेश्वर मंदिर के पुनः निर्माण के साथ-साथ उन्होंने कई मंदिरों के बड़े-बड़े द्वार बनाए। इस प्रकार ढ़ेर सारे मंदिरों के पुनर्निर्माण की यात्रा शुरू हुई। श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी भी शिवाजी महाराज की परंपरा पर चल देश के सांस्कृतिक व आध्यात्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार कर रहें हैं।

अमित शाह ने कहा कि शिवाजी महाराज के स्वराज का उद्देश्य बहुत स्पष्ट था। भारतीय शासन व्यवस्था में पहली बार अष्टप्रधान मंडल की कल्पना व शासन के सूत्रों को लिपिबद्ध करने का कार्य शिवाजी महाराज ने किया। शिवाजी महाराज ने कई युद्धों में अद्भुत साहस का परिचय दिया। शायद ही किसी स्वराज के योद्धा ने फ्रंट फूट पर जाकर स्वराज की लड़ाई लड़ी होगी। श्री शाह ने कहा कि शिवाजी महाराज आगरा में मुगल दरबार में शांति का आग्रह लेकर गये थे परन्तु औरंगजेब द्वारा हिंद स्वराज का अपमान किए जाने पर उन्होंने कड़ा विरोध किया और जेल चले गए जहां से मुगलों की आंखों में धूल झोंक कर सफलतापूर्वक निकल भी गये ।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि शिव मुद्रा का अंतिम राज्य वाक्य है – ‘यह मुद्रा लोक कल्याण के लिए काम में आने वाली मुद्रा है’ जो कि यह इंगित करता है कि राज्य का उद्देश्य लोक कल्याण का है,उपभोग का नहीं। शिवाजी महाराज ने अपने कार्यों से दुनिया के सभी शासकों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया कि उपभोग शून्य स्वामी कैसा होता है,राज्य के धन का अपने लिए कदापि उपयोग ना करने वाला स्वामी कैसा होता है। श्री शाह ने कहा कि शिवाजी महाराज ने जन कल्याण के लिए अनेक योजनाएं लागू कर देश में ग्राम आधारित अर्थनीति की भी नींव डाली। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज के समय अंग्रेजों का आगमन हो चुका था।अंग्रेजों से पश्चिमी तटों की सुरक्षा के लिए  शिवाजी ने नौसेना की स्थापना की । शिवाजी महाराज ने स्वराज के लिए लड़ने वाले लोगों की एक बड़ी फ़ौज बनाई जिसने मुगल राज को टक्कर दी और सन् 1771 में महाराज जी सिंधिया के नेतृत्व में दिल्ली पर कब्जा किया और अटक से कटक तक अपना साम्राज्य बनाया।

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अमित शाह ने कहा कि आज शिव जयंती के मौके पर यहां एक भव्य शिव सृष्टि के निर्माण के पहले चरण का समापन हुआ है। उन्होंने कहा कि शिव सृष्टि के चारों चरणों के पूर्ण होने पर शिवाजी की गाथा को बड़े गौरव के साथ समग्र विश्व के सामने रखा जाएगा। शिवाजी के विचारों को मानने वाले कई लोग इस शिव सृष्टि के साथ जुड़ेंगे और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत को परम वैभव पर पहुंचाएंगे तथा प्रधानमंत्री मोदी  के आजादी की शताब्दी मनाए जाने के समय भारत को विश्व में प्रत्येक क्षेत्र में सर्वप्रथम बनाने के लक्ष्य को अवश्य ही पूरा करेंगे।

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