अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को लगे झटके का असर दुनियाभर के बाजारों पर दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10 फीसदी की गिरावट और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल आया। सेंसेक्स 1,609 अंक की छलांग लगाकर खुला, जबकि निफ्टी में भी करीब 2 फीसदी तक की तेजी दर्ज की गई। बैंकिंग, ऑटो, रियल्टी और आईटी समेत लगभग सभी सेक्टर के शेयर हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए।
नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत बेहद शानदार रही। अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बाद वैश्विक बाजारों में बने सकारात्मक माहौल का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को चुनाव में लगे झटके, कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट और विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी ने घरेलू बाजार को नई मजबूती दी। बाजार खुलते ही निवेशकों के चेहरे खिल उठे और सेंसेक्स ने 1,600 अंकों से अधिक की छलांग लगा दी। वहीं निफ्टी भी जोरदार तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत करने में सफल रहा।
शेयर बाजार में आई इस तेजी को निवेशकों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। पिछले कुछ समय से वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ था। लेकिन अमेरिकी चुनाव के नतीजों के बाद निवेशकों का रुख अचानक सकारात्मक दिखाई दिया। इसका सीधा असर भारतीय बाजार की शुरुआती कारोबारी गतिविधियों में नजर आया।
खुलते ही सेंसेक्स में 1,609 अंकों की छलांग, निफ्टी भी रॉकेट बना
गुरुवार को शेयर बाजार खुलते ही खरीदारी का जबरदस्त माहौल देखने को मिला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1,609.54 अंक यानी 2.08 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,910.94 के स्तर पर खुला। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 भी 417.45 अंक यानी 1.74 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,378.05 के स्तर पर पहुंच गया।
बाजार की शुरुआत से ही लगभग सभी प्रमुख कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 29 कंपनियों के शेयर हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। इससे साफ संकेत मिला कि बाजार में केवल कुछ चुनिंदा शेयरों में ही नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर खरीदारी का रुझान बना हुआ है।
इंडिगो, बजाज फाइनेंस और एशियन पेंट्स जैसे प्रमुख शेयरों में 4 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। वित्तीय कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों की विशेष दिलचस्पी दिखाई दी। बाजार में आई इस तेजी ने उन निवेशकों को भी राहत दी, जो पिछले कारोबारी सत्रों में बाजार की कमजोरी को लेकर चिंतित थे।
बैंकिंग और रियल्टी सेक्टर में सबसे ज्यादा उत्साह
शेयर बाजार की इस तेजी में बैंकिंग और रियल्टी सेक्टर ने अहम भूमिका निभाई। शुरुआती कारोबार के दौरान निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 2 प्रतिशत से अधिक की बढ़त देखने को मिली। वहीं निफ्टी रियल्टी इंडेक्स भी करीब 1.86 प्रतिशत चढ़ गया।
इसके अलावा निफ्टी सीमेंट, ऑटो, आईटी, ऑयल एंड गैस और सरकारी बैंकों के सूचकांकों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इन सेक्टरों में करीब 1.82 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। एफएमसीजी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मेटल, मीडिया और केमिकल्स सेक्टर के शेयर भी 1 से 1.5 प्रतिशत तक मजबूत हुए।
खास बात यह रही कि बाजार के लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में तेजी का माहौल बना हुआ था। आमतौर पर जब बाजार में किसी एक सेक्टर के शेयरों में तेजी आती है, तो उसका असर सीमित रह सकता है, लेकिन इस बार बैंकिंग से लेकर आईटी और ऑटो तक में खरीदारी देखने को मिली। इससे बाजार की व्यापक मजबूती का संकेत मिला।
ट्रंप की पार्टी को झटका, वैश्विक बाजारों में बढ़ा भरोसा
भारतीय शेयर बाजार में आई तेजी के पीछे अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों को भी एक प्रमुख वजह माना जा रहा है। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को लगे राजनीतिक झटके के बाद वैश्विक निवेशकों ने बाजार की परिस्थितियों का नए सिरे से आकलन किया।
अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत से राजनीतिक समीकरणों में बदलाव आया है। चुनाव परिणामों के बाद बाजार में पहले से बनी कुछ राजनीतिक अनिश्चितताओं को लेकर राहत दिखाई दी। हालांकि, अमेरिका में आगे सरकार और संसद के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है।
निवेशकों के लिए अमेरिकी राजनीति इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वहां होने वाले नीतिगत फैसलों का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों पर पड़ता है। ब्याज दरों, सरकारी खर्च, व्यापार नीतियों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े फैसले वैश्विक निवेश के रुख को प्रभावित कर सकते हैं।
इसी वजह से अमेरिकी चुनाव के नतीजों के बाद दुनियाभर के बाजारों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली और भारतीय शेयर बाजार को भी इसका फायदा मिला।
कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10 फीसदी की भारी गिरावट
शेयर बाजार में तेजी की एक बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट भी रही। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 10 प्रतिशत टूटकर 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे बंद हुई।
भारत जैसे देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ता है। इसके साथ ही पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों, महंगाई और कंपनियों की उत्पादन लागत पर भी दबाव पड़ सकता है।
इसके उलट कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से आयात बिल में राहत मिलने की संभावना रहती है। इससे चालू खाते के घाटे और महंगाई के दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। तेल पर निर्भर उद्योगों और परिवहन क्षेत्र की कंपनियों के लिए भी यह सकारात्मक संकेत माना जाता है।
ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव की चिंताओं में कमी और अमेरिकी डॉलर में कमजोरी को भी कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के पीछे अहम कारण माना जा रहा है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक निवेशकों को जोखिम वाली संपत्तियों यानी शेयर बाजारों की ओर आकर्षित करने में मदद की।
विदेशी निवेशकों ने बाजार में लगाए 7,284 करोड़ रुपये
भारतीय शेयर बाजार में तेजी के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीदारी भी चर्चा में रही। विदेशी निवेशकों ने लगातार चौथे कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध खरीदारी की। बुधवार को उन्होंने करीब 7,284 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
बताया जा रहा है कि अक्टूबर 2025 के बाद किसी एक कारोबारी दिन में विदेशी निवेशकों की यह सबसे बड़ी शुद्ध खरीदारी रही। विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी को भारतीय बाजार के प्रति बढ़ते भरोसे के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, दूसरी तरफ घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने लगातार चौथे कारोबारी दिन शुद्ध बिकवाली की। बुधवार को घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब 3,712 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
इस तरह विदेशी निवेशकों की भारी खरीदारी ने बाजार को समर्थन दिया, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की बिकवाली के बावजूद बाजार में तेजी का रुख बना रहा। शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निवेशकों की नजर इसलिए भी रहती है, क्योंकि उनकी बड़ी खरीदारी या बिकवाली से बाजार की दिशा प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों ने दी सावधानी बरतने की सलाह, मुनाफावसूली का भी खतरा
शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी के बीच बाजार विशेषज्ञों ने निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार की मौजूदा स्थिति तकनीकी रूप से मजबूत दिखाई दे रही है, लेकिन अचानक आई तेजी के बाद कुछ निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं।
तकनीकी संकेतकों के मुताबिक, निफ्टी करीब 23,904 के स्तर पर मौजूद अपने 200 दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) से ऊपर बना हुआ है। इसे बाजार की मजबूती का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।
इसके अलावा बाजार की गति को मापने वाला रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) बढ़कर 68.55 पर पहुंच गया है। यह बाजार में मजबूत खरीदारी और तेजी के रुझान को दर्शाता है। हालांकि, RSI के इस स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशकों को अल्पकालिक मुनाफावसूली की संभावना पर भी नजर रखनी चाहिए।
विशेषज्ञों के मुताबिक, निफ्टी के लिए 24,000 से 24,200 के बीच का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन हो सकता है। यानी बाजार में गिरावट आने की स्थिति में इन स्तरों पर खरीदारी का समर्थन मिलने की संभावना है। वहीं ऊपर की ओर 24,500 से 24,700 के बीच बाजार को बिकवाली के दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी चुनाव के नतीजों से पैदा हुआ शुरुआती उत्साह आगे भी बाजार को प्रभावित कर सकता है, लेकिन अमेरिका में राजनीतिक टकराव की स्थिति और वहां लिए जाने वाले नीतिगत फैसलों पर भी निवेशकों को नजर रखनी होगी।
अमेरिकी शेयर बाजारों में भी दिखी जोरदार तेजी
भारतीय बाजार में तेजी से पहले अमेरिकी शेयर बाजारों में भी शानदार उछाल देखने को मिला था। अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बाद वहां के प्रमुख शेयर सूचकांकों में खरीदारी का माहौल रहा।
डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज में 3 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। बताया गया कि अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद चार दशक से अधिक समय में यह उसका सबसे मजबूत प्रदर्शन रहा। वहीं एसएंडपी 500 और नैस्डैक कंपोजिट में भी 1.4 प्रतिशत से अधिक की बढ़त देखने को मिली।
इसके साथ ही अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड में भी गिरावट दर्ज की गई। 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड घटकर करीब 4.89 प्रतिशत पर आ गई। बॉन्ड यील्ड में गिरावट से भी शेयर बाजार जैसी जोखिम वाली संपत्तियों को समर्थन मिला।
अमेरिकी बाजारों में आई इस तेजी का सकारात्मक असर एशियाई बाजारों के माध्यम से भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला।
क्या आगे भी जारी रहेगी शेयर बाजार की तेजी?
गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में आई तेजी ने निवेशकों के बीच उत्साह जरूर बढ़ाया है, लेकिन बाजार की आगे की दिशा कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करेगी। कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, अमेरिकी राजनीतिक घटनाक्रम और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती हैं।
अगर विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार को आगे भी समर्थन मिल सकता है। हालांकि, इतनी बड़ी तेजी के बाद कुछ निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली की संभावना भी बनी रहेगी।
फिलहाल अमेरिकी चुनाव के नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भारतीय शेयर बाजार को मजबूत शुरुआत दी है। सेंसेक्स की 1,609 अंकों की छलांग और निफ्टी की जोरदार बढ़त ने बाजार में रौनक लौटा दी है। लेकिन निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल बाजार की तेजी देखकर जल्दबाजी में फैसले न लें, बल्कि विशेषज्ञों की सलाह और अपने जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखकर ही निवेश करें।
