करोड़ों फैंस की आंखों के सामने बदली इन क्रिकेट सितारों की जिंदगी, किसी ने सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की तो किसी ने आर्थिक तंगी के बीच मांगी मदद
नई दिल्ली: क्रिकेट का मैदान जब किसी खिलाड़ी को पहचान देता है तो दुनिया उसे सिर आंखों पर बैठाती है। रिकॉर्ड बनते हैं, नाम अखबारों की सुर्खियों में छपता है, स्टेडियम तालियों से गूंजते हैं और स्टार क्रिकेटरों की जिंदगी किसी सपने जैसी दिखाई देती है। लेकिन खेल से संन्यास लेने के बाद हर खिलाड़ी की कहानी एक जैसी नहीं रहती। किसी को कोचिंग, कमेंट्री और कारोबार में नया रास्ता मिल जाता है तो कुछ खिलाड़ियों को जिंदगी की दूसरी पारी में बेहद कठिन आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
इन दिनों पूर्व भारतीय क्रिकेटर विनोद कांबली का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वीडियो में कांबली ठाणे के एक बुजुर्ग देखभाल केंद्र से नजर आ रहे हैं और फैंस उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जता रहे हैं। 25 सितंबर 2026 को सामने आए वीडियो में कांबली ने केंद्र की सुविधाओं और वहां मिल रहे प्यार के बारे में बात की।
कभी भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रतिभाशाली बल्लेबाजों में गिने जाने वाले कांबली की मौजूदा तस्वीर ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्रिकेट की चमक-दमक खत्म होने के बाद खिलाड़ियों की जिंदगी किस तरह बदल सकती है। कांबली की कहानी अकेली नहीं है। क्रिकेट इतिहास में ऐसे कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रहे हैं, जिनकी दूसरी पारी बेहद संघर्षपूर्ण रही।
विनोद कांबली: सचिन के साथ शुरू हुआ सफर, फिर जिंदगी ने लिया कठिन मोड़
विनोद कांबली और सचिन तेंदुलकर की दोस्ती और क्रिकेट की शुरुआती कहानी भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के बीच लंबे समय से मशहूर रही है। स्कूल क्रिकेट में दोनों ने रिकॉर्ड साझेदारी की थी और कांबली ने कम उम्र में ही अपनी बल्लेबाजी से यह संकेत दे दिया था कि वह भारतीय क्रिकेट का बड़ा नाम बनने वाले हैं।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी उन्होंने शानदार शुरुआत की। कांबली ने टेस्ट क्रिकेट में शुरुआती दौर में लगातार बड़े स्कोर बनाए और सिर्फ 14 पारियों में 1,000 टेस्ट रन पूरे करने वाले भारतीय बल्लेबाज बने। उनका टेस्ट करियर औसत 54 से ज्यादा का रहा, हालांकि वह सिर्फ 17 टेस्ट मैच खेल सके। वनडे क्रिकेट में उन्होंने 100 से ज्यादा मुकाबले खेले।
लेकिन उनका अंतरराष्ट्रीय करियर उम्मीद के मुताबिक लंबा नहीं चला। इसके बाद निजी जिंदगी और स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों ने भी उनकी कहानी को मुश्किल बनाया। पिछले कुछ वर्षों में कांबली कई बार स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण चर्चा में रहे हैं। 2024 में भी उनका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्हें चलने में परेशानी होती दिखी थी और पूर्व क्रिकेटरों ने उनके पुनर्वास में मदद की पेशकश की थी।
अब 2026 में ठाणे के देखभाल केंद्र से सामने आए उनके वीडियो ने एक बार फिर क्रिकेट प्रशंसकों को भावुक कर दिया है। हालांकि, कांबली की मौजूदा आर्थिक स्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर किए जा रहे हर दावे को तथ्य मानना उचित नहीं होगा। उनकी अपनी वीडियो संदेश में उन्होंने केंद्र में मिलने वाली सुविधाओं और लोगों के प्यार की बात कही है।
1. जनार्दन नवले: भारत की पहली टेस्ट पारी की पहली गेंद खेलने वाले क्रिकेटर
आज के दौर में किसी क्रिकेटर के अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत करोड़ों रुपये की कमाई और बड़े ब्रांड से हो सकती है, लेकिन भारतीय क्रिकेट के शुरुआती दौर में हालात बिल्कुल अलग थे।
जनार्दन नवले भारतीय टेस्ट इतिहास के बेहद महत्वपूर्ण नाम हैं। उन्होंने 1932 में लॉर्ड्स में भारत की पहली टेस्ट पारी की पहली गेंद का सामना किया था। वह विकेटकीपर-बल्लेबाज थे और भारत के शुरुआती टेस्ट खिलाड़ियों में शामिल रहे।
लेकिन क्रिकेट से संन्यास के बाद उनकी जिंदगी बेहद साधारण हो गई। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के मुताबिक, बाद के जीवन में उन्होंने एक शुगर मिल में सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर काम किया और पुणे में एक छोटे फ्लैट में रहे। 7 सितंबर 1979 को उनका निधन हुआ।
नवले की कहानी यह दिखाती है कि भारतीय क्रिकेट के शुरुआती दौर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मतलब आज जैसी आर्थिक सुरक्षा नहीं था।
2. बैरी पोलॉक: 60 से ज्यादा का टेस्ट औसत रखने वाला दिग्गज
दक्षिण अफ्रीका के बैरी पोलॉक अपने दौर के महान बल्लेबाजों में गिने जाते हैं। टेस्ट क्रिकेट में उनका बल्लेबाजी औसत 60 से ऊपर रहा, जो उन्हें क्रिकेट इतिहास के बेहद प्रभावशाली बल्लेबाजों की श्रेणी में रखता है।
लेकिन दक्षिण अफ्रीका पर लगे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रतिबंधों का असर उनके करियर पर भी पड़ा। उनका अंतरराष्ट्रीय करियर उस समय प्रभावित हुआ जब वह अपने खेल के चरम पर थे।
बाद के जीवन को लेकर आर्थिक परेशानियों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जुड़ी कई रिपोर्टें सामने आती रही हैं। हालांकि, उनके बारे में इंटरनेट पर मौजूद हर दावा समान रूप से प्रमाणित नहीं है। इसलिए उन्हें सीधे तौर पर “कंगाल” कहना सही नहीं होगा। लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि उनका क्रिकेट करियर जिस ऊंचाई पर था, उसके मुकाबले उनकी बाद की जिंदगी उतनी ग्लैमरस नहीं रही।
3. एडम होलियोक: इंग्लैंड के कप्तान से दिवालियापन तक
इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर एडम होलियोक ने मैदान पर अपनी पहचान एक आक्रामक ऑलराउंडर के तौर पर बनाई थी। उन्होंने 1997 में शारजाह कप में इंग्लैंड की कप्तानी करते हुए टीम को जीत दिलाई थी। वह इंग्लैंड के सीमित ओवरों के क्रिकेट के चर्चित खिलाड़ियों में रहे।
क्रिकेट के बाद उन्होंने परिवार के साथ ऑस्ट्रेलिया में प्रॉपर्टी कारोबार में कदम रखा। लेकिन कारोबार को बड़ा झटका लगा। उनकी फैमिली से जुड़ी Hollioake Group नाम की प्रॉपर्टी कंपनी करीब 20 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के कर्ज के साथ ढह गई और 2010 में उसे लिक्विडेशन का सामना करना पड़ा। इसके बाद 2011 में एडम होलियोक को ऑस्ट्रेलिया में दिवालिया घोषित किया गया।
यह कहानी बताती है कि खेल से बाहर कारोबार में उतरना भी हमेशा सफलता की गारंटी नहीं होता। एक समय इंग्लैंड की कप्तानी करने वाले खिलाड़ी को अपनी कारोबारी असफलता और कानूनी प्रक्रिया के कठिन दौर से गुजरना पड़ा।
4. मैथ्यू सिंक्लेयर: टेस्ट डेब्यू में दोहरा शतक, फिर करियर के बाद संघर्ष
न्यूजीलैंड के पूर्व बल्लेबाज मैथ्यू सिंक्लेयर ने अपने टेस्ट डेब्यू में ही वेस्टइंडीज के खिलाफ शानदार दोहरा शतक लगाया था। इस प्रदर्शन के बाद उन्हें न्यूजीलैंड क्रिकेट का बड़ा भविष्य माना गया।
लेकिन अंतरराष्ट्रीय करियर लंबे समय तक नहीं चल सका। क्रिकेट छोड़ने के बाद उनकी जिंदगी को लेकर आर्थिक संघर्ष की खबरें सामने आईं। उनके बारे में प्रकाशित कई रिपोर्टों में यह बताया गया कि क्रिकेट से बाहर आने के बाद उन्हें सामान्य नौकरी और आर्थिक सुरक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ा।
यह कहानी खास इसलिए है क्योंकि एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के लिए खेल छोड़ने के बाद नई पेशेवर पहचान बनाना हमेशा आसान नहीं होता। क्रिकेट में पूरा समय देने वाले खिलाड़ियों के लिए संन्यास के बाद करियर का दूसरा विकल्प तैयार रखना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
5. अरशद खान: भारत के दिग्गज बल्लेबाजों को परेशान करने वाला स्पिनर बना टैक्सी ड्राइवर
पाकिस्तान के पूर्व ऑफ स्पिनर अरशद खान की कहानी शायद इस सूची की सबसे चर्चित कहानियों में से एक है।
करीब 6 फीट 4 इंच लंबे अरशद ने पाकिस्तान के लिए 9 टेस्ट और 58 वनडे खेले। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 80 से ज्यादा विकेट हासिल किए। भारत के खिलाफ भी वह खेल चुके हैं और 2005 के बेंगलुरु टेस्ट में राहुल द्रविड़ और इरफान पठान के विकेट लेने वालों में शामिल थे।
लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से बाहर होने के बाद उनकी जिंदगी ने अलग मोड़ लिया। 2015 में सिडनी में एक क्रिकेट प्रशंसक ने उन्हें टैक्सी चलाते हुए पहचाना। उस समय रिपोर्टों में सामने आया कि पूर्व पाकिस्तानी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर ऑस्ट्रेलिया में कैब चला रहे थे।
एक समय मैदान पर सचिन तेंदुलकर जैसे बल्लेबाजों के खिलाफ गेंदबाजी करने वाले अरशद का टैक्सी चलाना क्रिकेट जगत के लिए चौंकाने वाली तस्वीर थी। हालांकि बाद में वह दोबारा क्रिकेट से जुड़े और कोचिंग की दिशा में आगे बढ़े।
6. पैट्रिक पैटरसन: 150 किमी प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार वाला गेंदबाज, फिर मदद की जरूरत
वेस्टइंडीज के पूर्व तेज गेंदबाज पैट्रिक पैटरसन 1980 और 1990 के दशक में अपनी तेज गेंदबाजी के लिए जाने जाते थे। उन्हें अपने दौर के सबसे तेज गेंदबाजों में गिना जाता था।
क्रिकेट से दूरी बनने के बाद उनकी जिंदगी को लेकर लंबे समय तक चिंता जताई गई। 2021 में जमैका के पत्रकार भारत सुंदरसन ने उनके लिए क्राउडफंडिंग अभियान शुरू किया। Jamaica Observer की रिपोर्ट के मुताबिक, पैटरसन को रोजमर्रा की जरूरतों और किराने के सामान तक के लिए आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
सुंदरसन ने खुद बताया था कि पैटरसन ने उनसे मदद मांगी थी और उस समय उनके पास बैंक खाता तक नहीं था। क्राउडफंडिंग के जरिए क्रिकेट प्रशंसकों से मदद जुटाने की कोशिश की गई और शुरुआती 24 घंटे में करीब 5,000 डॉलर जुटने की जानकारी दी गई थी।
यह कहानी क्रिकेट की चमक के पीछे छिपे उस दौर को सामने लाती है, जब एक समय दुनिया के बल्लेबाज जिस गेंदबाज से डरते थे, वही खिलाड़ी बाद में सामान्य जीवन की जरूरतों के लिए दूसरों की मदद पर निर्भर हो गया।
7. क्रिस केर्न्स: महान ऑलराउंडर, लेकिन जिंदगी की दूसरी पारी में बस स्टॉप साफ करने पड़े
न्यूजीलैंड के क्रिस केर्न्स 1990 और 2000 के दशक के सबसे चर्चित ऑलराउंडरों में रहे। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 200 से ज्यादा विकेट और 3,000 से अधिक रन का आंकड़ा हासिल किया। 2000 की चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में भारत के खिलाफ उनकी नाबाद शतकीय पारी आज भी याद की जाती है।
लेकिन क्रिकेट से संन्यास के बाद उनकी जिंदगी कानूनी और आर्थिक परेशानियों से घिर गई। मैच फिक्सिंग से जुड़े आरोपों के खिलाफ उन्होंने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। बाद में वह आरोपों से बरी हुए और 2012 में लालित मोदी के खिलाफ मानहानि के मुकदमे में भी जीत हासिल की।
इसी कानूनी संघर्ष के दौर में 2014 में रिपोर्ट सामने आई कि केर्न्स ऑकलैंड काउंसिल के लिए ट्रक चलाने और बस शेल्टर साफ करने का काम कर रहे थे। रिपोर्टों के मुताबिक उन्हें करीब 17 डॉलर प्रति घंटे का भुगतान मिलता था।
यह कहानी सिर्फ आर्थिक परेशानी की नहीं थी, बल्कि एक ऐसे खिलाड़ी की थी जिसने कठिन दौर में काम करने से पीछे हटने के बजाय परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए मेहनत का रास्ता चुना।
8. विनोद कांबली की कहानी ने फिर छेड़ी पुरानी बहस
इन सभी कहानियों के बीच विनोद कांबली का नाम एक बार फिर सामने आना क्रिकेट प्रेमियों को भावुक कर रहा है। 2026 में ठाणे के Nidan Centre for Elderly Care से उनका वीडियो सामने आया, जिसमें वह केंद्र की सुविधाओं की तारीफ करते और वहां मिले प्यार के बारे में बताते नजर आए।
कांबली की कहानी इसलिए भी अलग है क्योंकि उनके क्रिकेट करियर की शुरुआत इतनी शानदार थी कि उनसे भारतीय क्रिकेट के भविष्य के बड़े सितारे के रूप में उम्मीद की गई थी। सचिन तेंदुलकर के साथ उनका नाम बचपन से जुड़ा रहा और टेस्ट क्रिकेट में उनके शुरुआती रिकॉर्ड ने उन्हें असाधारण प्रतिभा के रूप में स्थापित किया।
लेकिन क्रिकेट में प्रतिभा के साथ लंबा करियर बनाने के लिए फिटनेस, अनुशासन, निरंतरता और सही फैसलों की भी जरूरत होती है। कांबली का करियर इन सभी पहलुओं पर चर्चा का विषय रहा है। उनके मौजूदा वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर प्रशंसकों ने उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई और उनके लिए शुभकामनाएं दीं।
इन कहानियों से क्या सीख मिलती है?
इन क्रिकेटरों की कहानियां सिर्फ “राजा से रंक” जैसी सनसनीखेज लाइन तक सीमित नहीं हैं। इनके पीछे अलग-अलग परिस्थितियां रही हैं—किसी का करियर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से प्रभावित हुआ, किसी का कारोबार असफल हुआ, किसी को कानूनी लड़ाई में भारी खर्च उठाना पड़ा और किसी को क्रिकेट के बाद आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल सकी।
जनार्दन नवले का दौर ऐसा था जब क्रिकेट में आज जैसी कमाई नहीं थी। एडम होलियोक की कहानी कारोबार में जोखिम का उदाहरण है। अरशद खान की टैक्सी चलाने की कहानी बताती है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर भी करियर खत्म होने के बाद सामान्य रोजगार कर सकता है। पैट्रिक पैटरसन के मामले में क्रिकेट समुदाय ने मिलकर मदद की। क्रिस केर्न्स ने कानूनी खर्चों के बीच मेहनत-मजदूरी करने से परहेज नहीं किया।
और विनोद कांबली की मौजूदा तस्वीर यह याद दिलाती है कि खेल की प्रसिद्धि हमेशा जीवनभर की सुरक्षा की गारंटी नहीं होती।
क्रिकेटर के लिए मैदान पर आखिरी मैच खत्म होना करियर का अंत जरूर हो सकता है, लेकिन जिंदगी का नहीं। सही वित्तीय योजना, शिक्षा, वैकल्पिक कौशल, स्वास्थ्य और मानसिक-सामाजिक सहयोग किसी भी खिलाड़ी की दूसरी पारी को मजबूत बना सकते हैं।
कभी स्टेडियम में हजारों-लाखों दर्शकों की तालियों के बीच खेलने वाले इन खिलाड़ियों की जिंदगी के ये अध्याय क्रिकेट की दुनिया का एक कम दिखाई देने वाला पहलू सामने रखते हैं। मैदान पर रिकॉर्ड बनाने के बाद जीवन में परिस्थितियां बदल सकती हैं, लेकिन संघर्ष के दौर में सम्मान के साथ आगे बढ़ना ही सबसे बड़ी चुनौती होती है।
विनोद कांबली का हालिया वीडियो इसी वजह से केवल एक क्रिकेटर की कहानी नहीं, बल्कि खेल सितारों की जिंदगी की दूसरी पारी पर फिर से चर्चा करने का मौका भी बन गया है।
