देहरादून: मानसून के दौरान भारी बारिश ने देहरादून की सड़कों की हालत को बुरी तरह प्रभावित किया है। लगातार बारिश के कारण कई प्रमुख मार्गों पर गड्ढे बन गए, कई स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत उखड़ गई और कुछ जगहों पर जलभराव के कारण सड़क की स्थिति और खराब हो गई। ऐसे में यातायात को किसी तरह सुचारू रखने के लिए लोक निर्माण विभाग यानी लोनिवि ने कई स्थानों पर गड्ढों में सीमेंट की ईंटें और इंटरलॉकिंग टाइल्स बिछाकर अस्थायी व्यवस्था की है। हालांकि, अब यही व्यवस्था कई वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बनती नजर आ रही है।
शहर के कई हिस्सों में वाहनों को इन असमतल हिस्सों से होकर गुजरना पड़ रहा है। कहीं ईंटें सड़क की सतह से ऊंची हैं तो कहीं वाहनों के लगातार गुजरने के कारण इंटरलॉकिंग टाइल्स खिसक गई हैं। बारिश के पानी के बीच इन स्थानों की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है। नतीजा यह है कि वाहन चालकों को अचानक गति कम करनी पड़ती है, ब्रेक लगाने पड़ते हैं या फिर रास्ता बदलना पड़ता है। इससे न केवल वाहन के टायर, रिम और सस्पेंशन पर असर पड़ सकता है, बल्कि यातायात व्यवस्था पर भी अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
बारिश में बिटुमिनस पैचवर्क टिकना मुश्किल
लोनिवि की ओर से इस अस्थायी व्यवस्था के पीछे मुख्य वजह लगातार बारिश को बताया जा रहा है। सामान्य तौर पर सड़क के गड्ढों को बिटुमिनस सामग्री से भरकर पैचवर्क किया जाता है, लेकिन लगातार बारिश और सड़क पर नमी की स्थिति में ऐसा पैचवर्क लंबे समय तक टिकना मुश्किल होता है।
ऐसे में बड़े गड्ढों को तत्काल भरने और वाहनों की आवाजाही बनाए रखने के लिए इंटरलॉकिंग टाइल्स या सीमेंट की ईंटों का इस्तेमाल किया गया है। विभाग का तर्क है कि यह स्थायी सड़क निर्माण नहीं, बल्कि बारिश के दौरान यातायात को बाधित होने से बचाने के लिए की गई अस्थायी व्यवस्था है।
लेकिन जमीन पर तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे रही है। जिन स्थानों पर टाइल्स और ईंटें पूरी तरह समतल नहीं हैं, वहां वाहन चालकों को लगातार झटके महसूस हो रहे हैं। कुछ स्थानों पर भारी वाहनों की आवाजाही के कारण ईंटों के बीच अंतर भी पैदा हो रहा है। इससे सड़क की सतह और अधिक असमान हो सकती है।
दोपहिया वाहन चालकों के लिए बढ़ी चुनौती
इन सड़कों पर सबसे ज्यादा परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को हो सकती है। कार जैसे चार पहिया वाहनों में चार पहियों के कारण असमतल सतह को संभालना अपेक्षाकृत आसान होता है, लेकिन बाइक और स्कूटर में सड़क की खराब सतह का असर सीधे वाहन के संतुलन पर पड़ता है।
यदि इंटरलॉकिंग टाइल्स के बीच ऊंचाई में अंतर हो या कुछ ईंटें अपनी जगह से खिसकी हुई हों तो दोपहिया वाहन का पहिया अचानक दिशा बदल सकता है। बारिश के दौरान स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है, क्योंकि पानी भरने से चालक को नीचे की सड़क या ईंटों की स्थिति दिखाई नहीं देती।
ऐसे में अचानक ब्रेक लगाने या वाहन को दूसरी दिशा में मोड़ने की जरूरत पड़ सकती है। इससे पीछे से आ रहे वाहन से टक्कर की आशंका बढ़ सकती है। विशेष रूप से व्यस्त मार्गों पर यह स्थिति यातायात के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
टायर, रिम और सस्पेंशन पर पड़ रहा दबाव
सड़क पर लगातार उबड़-खाबड़ हिस्सों से गुजरने का असर सिर्फ चालक के अनुभव तक सीमित नहीं रहता। वाहन के अलग-अलग हिस्सों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
दोपहिया वाहनों में टायर, रिम, फ्रंट फोर्क, सस्पेंशन और हैंडलिंग सिस्टम को बार-बार झटकों का सामना करना पड़ता है। वहीं कार और छोटे व्यावसायिक वाहनों में टायर, शॉक एब्जॉर्बर, सस्पेंशन और अन्य संबंधित हिस्सों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
यदि किसी स्थान पर ईंटों की सतह काफी ऊंची हो और वाहन अपेक्षाकृत तेज गति में वहां से गुजरे, तो वाहन के नीचे का हिस्सा सड़क से टकराने की स्थिति भी बन सकती है। लंबे समय तक खराब सतह पर वाहन चलाने से रखरखाव का खर्च बढ़ने की आशंका भी रहती है।
अचानक लेन बदलने से जाम का खतरा
खराब सड़क की वजह से चालक अक्सर गड्ढों या ऊंची ईंटों से बचने के लिए अचानक लेन बदलते हैं। देहरादून जैसे व्यस्त शहर में यह स्थिति यातायात के लिए अतिरिक्त चुनौती पैदा कर सकती है।
एक तरफ वाहन चालक खराब हिस्से से बचने की कोशिश करता है, वहीं दूसरी तरफ उसी लेन में पीछे या बगल से अन्य वाहन आ रहे होते हैं। अचानक दिशा बदलने पर वाहनों के बीच टकराव का खतरा बढ़ सकता है। यदि सड़क पहले से ही संकरी हो और दोनों ओर यातायात का दबाव अधिक हो, तो छोटी सी बाधा भी जाम की वजह बन सकती है।
बारिश के समय दृश्यता कम होने और सड़क पर पानी जमा होने के कारण स्थिति और जटिल हो जाती है। चालक को यह पता नहीं चलता कि पानी के नीचे गड्ढा कितना गहरा है या इंटरलॉकिंग टाइल्स किस स्थिति में हैं।
देहरादून के कई प्रमुख क्षेत्रों में इस्तेमाल
देहरादून में अस्थायी मरम्मत के लिए इंटरलॉकिंग टाइल्स और सीमेंट की ईंटों का इस्तेमाल कई मार्गों पर किया गया है। इनमें कैनाल रोड, सहस्रधारा रोड, कांवली रोड, किशन नगर, धर्मपुर, नेहरूग्राम, करनपुर और सुभाष रोड जैसे क्षेत्र शामिल बताए गए हैं।
इन मार्गों पर रोजाना बड़ी संख्या में दोपहिया, कार, सार्वजनिक परिवहन और व्यावसायिक वाहन चलते हैं। इसलिए सड़क की स्थिति का सीधा असर शहर की यातायात व्यवस्था पर पड़ता है।
शहर में मानसून के दौरान सड़क की मरम्मत को लेकर पहले से ही चुनौती बनी रहती है। एक तरफ बारिश के कारण नई क्षति होती रहती है और दूसरी तरफ लगातार बारिश के बीच स्थायी निर्माण कार्य करना मुश्किल होता है। इसी कारण विभाग को कई जगह अस्थायी उपायों का सहारा लेना पड़ता है।
लोनिवि का दावा- मानसून बाद होगा स्थायी समाधान
लोक निर्माण विभाग का कहना है कि इंटरलॉकिंग टाइल्स को स्थायी समाधान के तौर पर नहीं लगाया गया है। इनका उद्देश्य फिलहाल गड्ढों को भरकर सड़क को यातायात योग्य बनाए रखना है।
लोनिवि के सचिव पंकज कुमार पांडेय के अनुसार, बारिश के दौरान गड्ढों में मलबा या अन्य सामग्री भरने से वह व्यवस्था ज्यादा टिकाऊ नहीं रहती। लगातार बारिश में बिटुमिनस पैचवर्क भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए कुछ स्थानों पर इंटरलॉकिंग टाइल्स का इस्तेमाल किया गया है।
उनके अनुसार, गड्ढा मुक्त अभियान के दौरान इन इंटरलॉकिंग टाइल्स को हटाकर सड़कों को स्थायी रूप से ठीक किया जाएगा।
यानी विभाग की योजना फिलहाल बारिश के मौसम में सड़क को किसी तरह चालू रखने की है और मौसम सामान्य होने के बाद संबंधित सड़कों का स्थायी उपचार किया जाएगा।
परिवहन विभाग ने बताया उपयोगी, लेकिन रखरखाव जरूरी
सड़कों पर इंटरलॉकिंग टाइल्स के इस्तेमाल को लेकर परिवहन विभाग का रुख भी सामने आया है। परिवहन विभाग के संयुक्त परिवहन आयुक्त राजीव कुमार मेहरा ने इसे सड़क को तत्काल यातायात योग्य बनाए रखने के लिहाज से उपयोगी प्रयोग बताया है। हालांकि, उन्होंने इसके साथ उचित रखरखाव की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।
यानी यदि इंटरलॉकिंग टाइल्स का इस्तेमाल किया जाता है तो उनका सही तरीके से बिछाया जाना, समतल होना और समय-समय पर निरीक्षण किया जाना भी जरूरी है। यदि टाइल्स अपनी जगह से खिसकती हैं या उनके बीच ऊंचाई का अंतर बढ़ता है, तो वही अस्थायी व्यवस्था वाहन चालकों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है।
लगातार हिचकोलों का शरीर पर भी असर
सड़क पर लगातार उछाल और झटकों का असर सिर्फ वाहन पर नहीं बल्कि वाहन में बैठे लोगों के शरीर पर भी पड़ सकता है। खासकर उन लोगों के लिए जो रोजाना लंबे समय तक दोपहिया या चार पहिया वाहन से सफर करते हैं।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के जनरल फिजिशियन डॉ. केसी पंत ने भी वाहनों के लगातार हिचकोलों से होने वाली शारीरिक परेशानियों की ओर ध्यान दिलाया है। लगातार झटकों के कारण शरीर में असहजता, मांसपेशियों में खिंचाव और कमर या गर्दन के आसपास परेशानी जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति पर इसका प्रभाव उसकी उम्र, यात्रा की अवधि, वाहन और उसकी व्यक्तिगत शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है।
दोपहिया वाहन चालकों में लगातार खराब सड़क पर यात्रा करने के दौरान शरीर को संतुलित रखने के लिए अतिरिक्त प्रयास करना पड़ता है। लंबे समय तक ऐसी परिस्थितियों में वाहन चलाने पर थकान भी महसूस हो सकती है, जिससे चालक की एकाग्रता प्रभावित होने की संभावना रहती है।
अस्थायी समाधान कब बनेगा स्थायी राहत?
देहरादून में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि बारिश खत्म होने के बाद इन अस्थायी मरम्मत वाले स्थानों का क्या होगा। यदि इंटरलॉकिंग टाइल्स समय पर हटाकर सड़क की स्थायी मरम्मत कर दी जाती है तो वर्तमान समस्या का समाधान हो सकता है। लेकिन यदि टाइल्स लंबे समय तक इसी स्थिति में पड़ी रहती हैं और उनका रखरखाव नहीं होता, तो यातायात के लिए परेशानी बनी रह सकती है।
लोनिवि की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इन टाइल्स को स्थायी सड़क का विकल्प नहीं माना जा रहा है। विभाग का कहना है कि मानसून के बाद गड्ढा मुक्त अभियान के तहत इन स्थानों को दोबारा उपचारित किया जाएगा।
फिलहाल वाहन चालकों के लिए जरूरी है कि ऐसे हिस्सों से गुजरते समय गति नियंत्रित रखें, अचानक ब्रेक या लेन बदलने से बचें और बारिश के दौरान पानी से ढके हिस्सों में विशेष सावधानी बरतें। वहीं, सड़क एजेंसियों के लिए चुनौती यह है कि अस्थायी मरम्मत को नियमित निगरानी के साथ सुरक्षित रखा जाए और मौसम अनुकूल होते ही स्थायी सड़क उपचार का काम पूरा किया जाए।
कुल मिलाकर देहरादून की सड़कों पर सीमेंट की ईंटें और इंटरलॉकिंग टाइल्स इस समय बारिश के बीच यातायात को बनाए रखने का अस्थायी उपाय हैं, लेकिन इनके सही रखरखाव और समय पर स्थायी मरम्मत के बिना यही व्यवस्था वाहन चालकों और शहर के यातायात के लिए अतिरिक्त परेशानी का कारण बन सकती है।
