प्रयागराज/लखनऊ: उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों के आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक बयान से बड़ी हलचल पैदा हो गई है। प्रयागराज में TGT-PGT भर्ती की पुरानी नियमावली और पुराने मानकों के आधार पर मौका देने की मांग को लेकर लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के लिए सरकार ने राहत का रास्ता तलाशने के संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) को पत्र लिखने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित युवाओं के लिए एक बार राहत देने या ऐसी व्यवस्था तैयार करने की कोशिश होनी चाहिए, जिससे वे निर्धारित समय के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल हो सकें।
मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रयागराज में TGT-PGT अभ्यर्थी शिक्षक भर्ती की नई नियमावली में शामिल पात्रता शर्तों का विरोध कर रहे हैं। अभ्यर्थियों की मांग है कि भर्ती प्रक्रिया में उन्हें उन शर्तों के आधार पर अवसर दिया जाए, जिनके तहत उन्होंने वर्षों तक तैयारी की थी।
NCTE को भेजा जाएगा पत्र, राहत का रास्ता तलाशेगी सरकार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को लखनऊ में नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान प्रयागराज में आंदोलन कर रहे युवाओं का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी से NCTE को पत्र लिखने के लिए कहा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रयागराज में कुछ युवा धरने पर बैठे हैं और उनके लिए एक बार की राहत या कोई ऐसी व्यवस्था तैयार करने की जरूरत है, जिससे वे आगे प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा ले सकें। उन्होंने व्यवस्था में बदलाव की जरूरत पर भी जोर दिया।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि NCTE की ओर से इस संबंध में क्या निर्णय लिया जाएगा और राहत का अंतिम स्वरूप क्या होगा। इसलिए फिलहाल इसे राहत के संकेत और प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश के रूप में देखा जा रहा है, अंतिम निर्णय के रूप में नहीं।
क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं TGT-PGT अभ्यर्थी?
प्रयागराज में प्रतियोगी छात्रों का आंदोलन मुख्य रूप से शिक्षक भर्ती की पात्रता और नियमों में किए गए बदलावों को लेकर है। अभ्यर्थी चाहते हैं कि भर्ती प्रक्रिया पुरानी नियमावली के आधार पर आगे बढ़ाई जाए।
रिपोर्टों के अनुसार, आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में TGT भर्ती में TET की अनिवार्यता से राहत, स्नातक में 50 प्रतिशत अंक की शर्त पर पुनर्विचार और विषय संयोजन से जुड़े प्रावधानों में राहत शामिल है। अभ्यर्थियों का कहना है कि नई पात्रता शर्तों के कारण ऐसे कई उम्मीदवार प्रभावित हो रहे हैं, जिन्होंने पहले से लागू नियमों के आधार पर लंबे समय तक शिक्षक भर्ती की तैयारी की है।
यही वजह है कि प्रदर्शनकारी सरकार से पुरानी व्यवस्था के आधार पर उन्हें कम से कम एक अवसर देने की मांग कर रहे हैं।
20 हजार से ज्यादा पदों पर भर्ती का मुद्दा भी अहम
TGT-PGT भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों के आंदोलन में केवल पात्रता नियम ही मुद्दा नहीं है। भर्ती में पदों की संख्या को लेकर भी मांग उठ रही है।
हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित भर्ती में TGT के 17,740 और PGT के 2,607 पद, यानी कुल 20,347 पद बताए गए हैं।
अभ्यर्थियों का एक वर्ग इन पदों की संख्या बढ़ाने की मांग भी कर रहा है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के बड़ी संख्या में पद खाली हैं, इसलिए भर्ती का दायरा और बढ़ाया जाना चाहिए।
इस मुद्दे पर अभ्यर्थी लगातार सरकार और संबंधित विभाग से बातचीत की मांग करते रहे हैं।
प्रयागराज में लगातार जारी है आंदोलन
TGT-PGT भर्ती के नियमों को लेकर प्रयागराज में आंदोलन सितंबर की शुरुआत से जारी है। प्रदर्शनकारियों ने पुरानी नियमावली के आधार पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और प्रभावित अभ्यर्थियों को अवसर देने की मांग को लेकर धरना शुरू किया था।
बीते दिनों प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा निदेशालय का घेराव भी किया। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ अभ्यर्थी शिक्षा निदेशालय परिसर में रात तक डटे रहे और अपनी मांगों पर समाधान की उम्मीद जताई।
18 सितंबर को भी नई शैक्षिक अर्हताओं के विरोध में छात्रों के आंदोलन के तेज होने की खबर सामने आई थी।
ऐसे में मुख्यमंत्री का ताजा बयान आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या पुरानी नियमावली पूरी तरह लागू होगी?
यह सवाल अब सबसे ज्यादा चर्चा में है। मुख्यमंत्री ने फिलहाल पुरानी नियमावली को पूरी तरह बहाल करने की घोषणा नहीं की है। उनके बयान में प्रभावित युवाओं को एक बार राहत देने अथवा ऐसा सिस्टम तैयार करने की बात कही गई है, जिसके तहत वे एक निश्चित समय के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल हो सकें।
इसका मतलब है कि अब गेंद NCTE और संबंधित शिक्षा विभाग के पाले में है। सरकार की ओर से पत्र भेजे जाने के बाद यह तय होगा कि नियमों में किस स्तर तक और किस तरीके से छूट दी जा सकती है।
अभ्यर्थियों के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनकी मुख्य मांग पुरानी पात्रता और नियमों के आधार पर अवसर पाने की है।
अभ्यर्थियों की नजर अब सरकार के अगले कदम पर
मुख्यमंत्री के बयान के बाद आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की उम्मीदें जरूर बढ़ी हैं, लेकिन अंतिम राहत मिलने से पहले कई प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। सबसे पहले माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से NCTE को पत्र भेजा जाएगा। इसके बाद संबंधित नियमों और पात्रता शर्तों को लेकर निर्णय लिया जा सकता है।
यदि एक बार की छूट या विशेष व्यवस्था को मंजूरी मिलती है, तो नई पात्रता शर्तों से प्रभावित अभ्यर्थियों को शिक्षक भर्ती में भाग लेने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक स्वरूप आधिकारिक निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
एक तरफ अभ्यर्थी पुरानी नियमावली के आधार पर अवसर की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ शिक्षक भर्ती की पात्रता और प्रक्रिया को लागू करने के लिए निर्धारित नियामकीय व्यवस्था भी मौजूद है। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती यह है कि अभ्यर्थियों की मांग और लागू नियमों के बीच ऐसा रास्ता निकाला जाए, जिससे विवाद का समाधान हो सके।
मुख्यमंत्री के बयान से संकेत मिला है कि सरकार इस मामले में एक विशेष अवसर या राहत की व्यवस्था तलाशने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। लेकिन अंतिम फैसला संबंधित नियमों और NCTE की प्रक्रिया के तहत ही सामने आएगा।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल प्रयागराज में प्रदर्शन जारी है और अभ्यर्थियों की नजर सरकार के अगले कदम पर है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से NCTE को पत्र भेजे जाने की उम्मीद है। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि प्रभावित TGT-PGT अभ्यर्थियों के लिए किस तरह की छूट या वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जा सकती है।
यानी अभी राहत की घोषणा का संकेत जरूर मिला है, लेकिन अंतिम राहत का आधिकारिक आदेश आना बाकी है।
प्रयागराज के आंदोलनकारी युवाओं के लिए मुख्यमंत्री का बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली बार सरकार के शीर्ष स्तर से उनकी मांग को लेकर किसी संभावित समाधान की बात सार्वजनिक रूप से सामने आई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि NCTE और शिक्षा विभाग इस प्रस्ताव पर क्या कदम उठाते हैं और क्या लंबे समय से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों को वास्तव में भर्ती प्रक्रिया में एक अतिरिक्त अवसर मिल पाता है।
