नई दिल्ली/मुंबई। दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर रहीं दिशा सालियान की मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से दर्ज की गई FIR में महाराष्ट्र की तत्कालीन सत्ता और पुलिस व्यवस्था से जुड़े कई बड़े नामों का जिक्र सामने आने के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल तेज हो गई है। FIR में पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, उनके बेटे आदित्य ठाकरे, तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख और मुंबई के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह समेत कई लोगों की भूमिका की जांच की मांग का उल्लेख किया गया है।
हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि FIR में किसी व्यक्ति का नाम दर्ज होना उसे स्वतः आरोपी या दोषी नहीं बनाता। FIR में जिन लोगों की भूमिका की जांच की मांग की गई है, उनकी वास्तविक भूमिका जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया में ही स्पष्ट होगी।
दिशा सालियान की मौत से फिर जुड़ा सुशांत राजपूत केस
दिशा सालियान की मौत जून 2020 में मुंबई में हुई थी। वह अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर थीं। दिशा की मौत के कुछ दिनों बाद सुशांत सिंह राजपूत की भी मौत हो गई थी। दोनों घटनाओं के बीच किसी तरह का संबंध होने की अटकलें समय-समय पर सामने आती रही हैं, हालांकि इन दोनों घटनाओं के बीच संबंध को लेकर अलग-अलग जांच और दावे सामने आए हैं।
अब CBI की FIR में सामने आए विवरण ने दिशा सालियान की मौत से जुड़े पुराने सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। FIR में कथित तौर पर मुख्य अपराध, आपराधिक साजिश, आत्महत्या की कहानी तैयार करने, साक्ष्यों को नष्ट करने और मामले को दबाने जैसे गंभीर आरोपों की जांच की मांग की गई है।
उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे का नाम क्यों चर्चा में आया?
FIR में तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे के नाम का उल्लेख किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े लोगों ने मामले को दबाने में भूमिका निभाई हो सकती है और इसकी जांच की जानी चाहिए।
इसके साथ ही FIR में यह भी जांच करने की मांग का उल्लेख है कि क्या सरकारी अधिकारियों या पुलिस अधिकारियों ने मामले से संबंधित दस्तावेज, फाइलें अथवा अन्य सरकारी रिकॉर्ड को दबाया या नष्ट किया। सरकारी रिकॉर्ड में कथित हेरफेर तथा आरोपियों को बचाने के लिए सरकारी संसाधनों, कर्मचारियों या पुलिस मशीनरी के दुरुपयोग जैसे आरोपों की भी जांच की मांग की गई है।
यहां यह दोहराना जरूरी है कि ये FIR में लगाए गए आरोप/जांच की मांग हैं, अदालत द्वारा साबित किए गए तथ्य नहीं।
परमबीर सिंह और अनिल देशमुख का भी FIR में जिक्र
दिशा सालियान केस की FIR में मुंबई के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह और उस समय महाराष्ट्र के गृह मंत्री रहे अनिल देशमुख का नाम भी सामने आया है।
FIR में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच का एक हिस्सा यह पता लगाने से संबंधित बताया गया है कि उस समय मामले की जांच किस तरीके से हुई और क्या किसी स्तर पर जांच को प्रभावित करने, महत्वपूर्ण दस्तावेजों को दबाने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ की कोशिश हुई।
सूरज पंचोली, डिनो मोरिया और रिया चक्रवर्ती के नाम भी
FIR में फिल्म जगत से जुड़े कुछ चर्चित नामों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें अभिनेता सूरज पंचोली, डिनो मोरिया और रिया चक्रवर्ती समेत अन्य लोगों का नाम शामिल बताया गया है।
इसके अलावा शोविक चक्रवर्ती, रोहन रॉय और आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड सहित कई अन्य व्यक्तियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है। FIR में सचिन वाजे, परमबीर सिंह, DCP विशाल ठाकुर तथा उस समय के कई पुलिस अधिकारियों के नामों का भी उल्लेख है।
मामले में जांच का दायरा केवल राजनीतिक और फिल्म जगत से जुड़े लोगों तक सीमित नहीं बताया गया है, बल्कि उस समय की पुलिस जांच और फॉरेंसिक प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है।
पुलिस अधिकारियों और फॉरेंसिक टीम की भूमिका पर भी सवाल
FIR में मालवणी पुलिस स्टेशन से जुड़े अधिकारियों सहित कई पुलिस अधिकारियों के नामों का उल्लेख किया गया है। इनमें API अशोक देवाड़े, PI जगदेव कलापड़, PI शैलेंद्र नगरकर, PI चिमाजी आधव और PI अर्जुन राजाने समेत अन्य अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग का उल्लेख है।
इसके साथ ही दिशा सालियान के पोस्टमार्टम में कथित देरी तथा फॉरेंसिक जांच से जुड़े अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। FIR में डॉक्टर संजय जाधव और कालिना स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी से जुड़े अधिकारियों, जिनमें N.P. भाले का भी उल्लेख है, की भूमिका की जांच की मांग बताई गई है।
बिल्डिंग के सुरक्षा गार्डों से लेकर कई अन्य लोगों के नाम
मामले की FIR में उस बिल्डिंग से जुड़े सुरक्षा कर्मचारियों और अन्य लोगों के नामों का भी उल्लेख है, जहां दिशा सालियान की मौत हुई थी।
इनमें सुरक्षा गार्ड सुशील कुमार यादव और शिवमुराद गौतम उर्फ मुन्ना के अलावा प्रीति राणे, प्रवीण राणे, अंकिता सातुर, इंद्रनील वैद्य, दीप अजमेरा, हिमांशु शिखारे, रेशा पाडवाल, सतवंत सिंह, नावेद मुजावर और प्रियेश राणे सहित कई अन्य लोगों का नाम बताया गया है।
FIR में SIT के वरिष्ठ सदस्यों और उन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है, जिनकी निगरानी में कथित तौर पर जांच और पूछताछ की गई थी।
गैंगरेप की धारा का उल्लेख, मामले ने पकड़ा नया मोड़
दिशा सालियान केस से जुड़ी FIR में कथित तौर पर गैंगरेप समेत कई गंभीर आपराधिक धाराओं का उल्लेख होने की बात सामने आई है। यही बिंदु इस मामले को और अधिक गंभीर बना रहा है।
FIR में कथित अपराध, आपराधिक साजिश, सबूत नष्ट करने और मामले को दबाने के अलावा घटना से जुड़े अन्य गंभीर आरोपों की जांच की मांग की गई है। हालांकि, इन धाराओं का शामिल होना यह साबित नहीं करता कि FIR में नामित या उल्लेखित सभी व्यक्तियों ने अपराध किया है। जांच एजेंसियों को आरोपों की पुष्टि के लिए सबूत जुटाने होंगे और उसके बाद ही किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी तय हो सकती है।
अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?
दिशा सालियान केस में FIR सामने आने के बाद कई पुराने सवाल फिर से चर्चा में हैं। जांच में यह देखा जा सकता है कि दिशा की मौत से पहले और बाद में वास्तव में क्या घटनाक्रम हुआ था। घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य क्या थे? पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक प्रक्रिया किस तरह हुई? पुलिस जांच में कौन-कौन से अधिकारी शामिल थे? क्या किसी महत्वपूर्ण दस्तावेज या रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ हुई? और क्या किसी व्यक्ति या संस्था ने जांच को प्रभावित करने की कोशिश की?
इसके अलावा FIR में लगाए गए कथित साजिश और मामले को दबाने के आरोपों की भी जांच महत्वपूर्ण होगी।
FIR के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
दिशा सालियान केस लंबे समय से महाराष्ट्र की राजनीति में संवेदनशील मुद्दा रहा है। अब FIR में तत्कालीन मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, पुलिस अधिकारियों और फिल्म जगत से जुड़े लोगों के नामों के उल्लेख ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
आने वाले समय में जांच एजेंसी द्वारा किन लोगों से पूछताछ की जाती है, कौन से दस्तावेज सामने आते हैं और उपलब्ध साक्ष्यों से क्या निष्कर्ष निकलता है—इस पर सभी की नजरें रहेंगी।
फिलहाल, इस मामले में सबसे जरूरी बात यही है कि FIR में नाम या भूमिका की जांच का उल्लेख किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करता। किसी भी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी जांच पूरी होने और अदालत में आरोप साबित होने के बाद ही तय होगी। दिशा सालियान की मौत से जुड़े इस नए घटनाक्रम ने हालांकि एक बार फिर उस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में ला दिया है, जो वर्षों से कई अनुत्तरित सवालों और विवादों से घिरा रहा है।
