देहरादून: उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को होने जा रही मंत्रिमंडल की बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सचिवालय में सुबह 10:30 बजे प्रस्तावित इस बैठक में सरकार कई अहम मुद्दों पर चर्चा कर सकती है और विभिन्न विभागों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी मिलने की संभावना है। खास बात यह है कि आगामी विधानसभा मानसून सत्र को देखते हुए यह कैबिनेट बैठक राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में मानसून सत्र की तिथियों और उसके आयोजन स्थल को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है।
सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन, शहरी विकास, उद्योग, कार्मिक, आवास और नियोजन समेत कई विभागों के प्रस्ताव रखे जा सकते हैं। इनमें कुछ ऐसे प्रस्ताव भी शामिल हो सकते हैं, जिनका सीधा असर प्रदेश के कर्मचारियों, छात्रों, डॉक्टरों और आम जनता पर पड़ेगा।
बैठक का सबसे अहम मुद्दा स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा हो सकता है। प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने वाले डॉक्टरों की पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में उपलब्धता लंबे समय से सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है। बताया जा रहा है कि बॉन्ड व्यवस्था के तहत सेवा देने वाले कई डॉक्टर कुछ समय बाद ही पोस्ट ग्रेजुएशन की तैयारी और पढ़ाई के लिए आवेदन कर देते हैं, जिससे पहाड़ी इलाकों में डॉक्टरों की कमी की समस्या बनी रहती है।
इसी समस्या के समाधान के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव तैयार किया गया है। प्रस्ताव के तहत राजकीय मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को कम से कम तीन वर्ष तक अनिवार्य रूप से सेवाएं देनी पड़ सकती हैं। इसके बाद ही उन्हें पीजी की पढ़ाई के लिए अनुमति दिए जाने का प्रावधान किया जा सकता है। यदि इस प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिलती है तो प्रदेश के पर्वतीय और दूरदराज के इलाकों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में इसे बड़ा कदम माना जाएगा।
इसके अलावा प्रदेश के संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़े मुद्दे पर भी मंत्रिमंडल में चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। लंबे समय से विभिन्न विभागों में कार्यरत संविदा कर्मी अपने भविष्य और सेवा सुरक्षा को लेकर सरकार से निर्णय की मांग करते रहे हैं। ऐसे में यदि यह मामला कैबिनेट के सामने आता है तो कर्मचारियों की नजर इस बैठक पर टिकी रहेगी।
परिवहन विभाग से जुड़ा मुद्दा भी बैठक में महत्वपूर्ण रह सकता है। उत्तराखंड परिवहन निगम के कर्मचारियों को पिछले कुछ महीनों से वेतन भुगतान में देरी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। आगामी रक्षाबंधन और अन्य त्योहारों को देखते हुए सरकार परिवहन निगम कर्मचारियों के लंबित वेतन भुगतान के लिए आवश्यक धनराशि को मंजूरी देने पर विचार कर सकती है। कैबिनेट से इस संबंध में कोई सकारात्मक निर्णय आने पर कर्मचारियों को बड़ी राहत मिल सकती है।
बैठक में प्रदेश में बढ़ती महंगाई का मुद्दा भी चर्चा का विषय बन सकता है। विशेष रूप से चीनी, फल और सब्जियों की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ चीनी की कथित जमाखोरी जैसे मामलों पर सरकार की नजर बनी हुई है। सरकार महंगाई को नियंत्रित करने और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों से रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकती है।
महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग से जुड़े प्रस्ताव पर भी कैबिनेट की मुहर लगने की संभावना है। आलंबन गांव योजना के तहत विभाग को भूमि उपलब्ध कराने से संबंधित प्रस्ताव बैठक में रखा जा सकता है। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो योजना के क्रियान्वयन को गति मिलने की उम्मीद है।
नियोजन विभाग द्वारा तैयार की गई विभिन्न नीतियों पर भी कैबिनेट में चर्चा हो सकती है। इसके साथ ही प्रदेश की बहुप्रतीक्षित ईवी पॉलिसी को लेकर भी कोई महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकता है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में राज्य सरकार की नीति को अंतिम रूप देने पर मंत्रिमंडल की बैठक में विचार किया जा सकता है।
शिक्षा विभाग से संबंधित प्रस्ताव भी बैठक का अहम हिस्सा हो सकते हैं। खासकर शिक्षकों के तबादलों में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से तैयार किए गए प्रस्ताव पर कैबिनेट की मुहर लगने की संभावना है। यदि इस दिशा में कोई ठोस निर्णय लिया जाता है तो शिक्षक स्थानांतरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में होने वाली यह कैबिनेट बैठक कई मायनों में महत्वपूर्ण रहने वाली है। एक ओर सरकार आगामी विधानसभा मानसून सत्र की तैयारियों को अंतिम रूप देने पर विचार करेगी, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, डॉक्टरों की कमी दूर करने, संविदा कर्मचारियों, परिवहन निगम कर्मियों, महंगाई, ईवी नीति और शिक्षा विभाग से जुड़े मुद्दों पर भी महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं। अब सभी की नजर कैबिनेट बैठक के बाद होने वाली आधिकारिक घोषणा पर टिकी है, जिससे साफ होगा कि धामी सरकार ने प्रदेश के लिए किन प्रस्तावों को मंजूरी दी और कौन से फैसले आगे की कार्रवाई के लिए रखे गए।
