बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। राजधानी पटना में छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी बीच बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार के एक बयान ने पूरे विवाद को और हवा दे दी है। अभ्यर्थियों की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर जवाब देते हुए परीक्षा नियंत्रक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हाथी चले बाजार, कुत्ता भौंके हजार।” उनके इस बयान के सामने आने के बाद छात्र संगठनों और विपक्ष की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
दरअसल, बिहार में पिछले कई दिनों से BPSC समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थी प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों की ओर से परीक्षा प्रक्रिया, उत्तर पुस्तिकाओं की जांच, भर्ती नियमों और अन्य मुद्दों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी शिकायतों और मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। इसी बीच BPSC के परीक्षा नियंत्रक मीडिया के सामने आए और उन्होंने आयोग से जुड़े कई सवालों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की।
अभ्यर्थियों के आरोपों पर क्या बोले परीक्षा नियंत्रक?
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार से 70वीं BPSC परीक्षा में तीसरा स्थान हासिल करने वाले अभ्यर्थी की उत्तर पुस्तिका को लेकर उठ रहे सवालों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने आरोपों पर सवाल उठाने वालों को न्यायालय जाने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि यदि किसी अभ्यर्थी को लगता है कि लगाए जा रहे आरोपों में तथ्य हैं, तो उन्हें अदालत का रुख करना चाहिए। परीक्षा नियंत्रक ने 70वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा से जुड़े पुराने विवाद का भी उल्लेख किया और कहा कि उस मामले में भी न्यायालय में जाने के बाद कई बातें स्पष्ट हुई थीं।
इसी दौरान उन्होंने कहा, “हाथी चले बाजार, कुत्ता भौंके हजार।” परीक्षा नियंत्रक का यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इसकी चर्चा शुरू हो गई। छात्रों और विपक्षी नेताओं ने इस भाषा को लेकर सवाल उठाए हैं।
तेजस्वी यादव ने भी साधा निशाना
BPSC परीक्षा नियंत्रक के बयान पर बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी प्रतिक्रिया दी। वह पटना के गर्दनीबाग स्थित धरना स्थल पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने परीक्षा नियंत्रक के बयान का जिक्र करते हुए अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठाया।
तेजस्वी यादव ने कहा कि जिस अधिकारी ने इस तरह का “कुत्ता-बिल्ली वाला बयान” दिया है, उन्हें माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। इस बयान के बाद BPSC विवाद अब केवल परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अधिकारियों के कथित व्यवहार को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं अभ्यर्थी?
बिहार में प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की मांगें कई मुद्दों से जुड़ी हुई हैं। इनमें शिक्षक भर्ती परीक्षा का पैटर्न, नकारात्मक अंक व्यवस्था, पिछली भर्ती परीक्षाओं की जांच और संविदा कर्मचारियों को मिलने वाले वेटेज जैसे मुद्दे शामिल हैं।
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में TRE-4 यानी शिक्षक भर्ती परीक्षा-4 से जुड़े नियम भी शामिल हैं। छात्रों का कहना है कि शिक्षक भर्ती के लिए एक ही परीक्षा होनी चाहिए थी, लेकिन TRE-4 के लिए जारी अधिसूचना में दो परीक्षाओं का प्रावधान किया गया है। इस व्यवस्था को लेकर अभ्यर्थियों में नाराजगी है।
इसके अलावा छात्र नकारात्मक अंक यानी नेगेटिव मार्किंग को हटाने की मांग भी कर रहे हैं। उनका तर्क है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में नकारात्मक अंक व्यवस्था के कारण अभ्यर्थियों को अतिरिक्त नुकसान उठाना पड़ता है। वहीं, प्रदर्शनकारी छात्र पिछली कुछ भर्ती परीक्षाओं की जांच कराने की मांग भी कर रहे हैं।
संविदा वेटेज का मुद्दा भी बना विवाद की वजह
अभ्यर्थियों के बीच संविदा कर्मचारियों को मिलने वाले वेटेज का मुद्दा भी काफी महत्वपूर्ण है। छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में नियम और अंक व्यवस्था पूरी तरह स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सके।
इन तमाम मांगों को लेकर पटना में अभ्यर्थियों का प्रदर्शन जारी है। छात्र चाहते हैं कि आयोग और सरकार उनकी समस्याओं पर बातचीत करे और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विवादों को दूर किया जाए। दूसरी ओर आयोग की ओर से परीक्षा प्रक्रिया और उससे जुड़े फैसलों को लेकर अपनी स्थिति रखी जा रही है।
बयान के बाद बढ़ी सियासी गर्मी
BPSC परीक्षा नियंत्रक के बयान ने पहले से चल रहे छात्र आंदोलन को एक नया राजनीतिक मुद्दा दे दिया है। विपक्षी दल अब सरकार और आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि उनकी शिकायतों का समाधान करने के बजाय यदि उनके सवालों का इस तरह जवाब दिया जाएगा, तो विवाद और बढ़ेगा।
फिलहाल बिहार में BPSC और अन्य भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है। अभ्यर्थियों की मांगें, परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवाल और परीक्षा नियंत्रक का विवादित बयान—इन सभी ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। अब देखना होगा कि सरकार और BPSC की ओर से प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों पर आगे क्या कदम उठाया जाता है और क्या इस विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है।
